ओवल टेस्ट में इंग्लैंड की जीत तो सबसे बड़ी बात है ही पर टेस्ट में और भी कुछ ऐसा हुआ जिसका जिक्र क्रिकेट में हमेशा होता रहेगा। ये किस्सा है ब्रॉड का स्टंप्स के ऊपर रखी बेल्स को छेड़ना, उन्हें आपस में बदलना (स्टंप्स के एक सेट पर ही बाएं से दाएं) और संयोग से इसी के बाद फ़ौरन विकेट गिरना। पहली पारी में मार्नस लाबुशेन तो दूसरी पारी में टॉड मर्फी के साथ ये हुआ। ब्रॉड ने स्टंप्स पर रखी बेल्स की अदला-बदली को 'किस्मत बदलने' की एक कोशिश कह दिया पर और साथ में ये भी कहा कि नाथन लियोन भी तो ऐसा करते थे। क्या ये सच है?

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इस मामले में लियोन का सबसे यादगार किस्सा ओल्ड ट्रैफर्ड, 2019- एशेज के चौथे टेस्ट का है। इंग्लैंड का स्कोर 163-2 और जो रूट एवं  रोरी बर्न्स 138 रन की पार्टनरशिप कर चुके थे। तब लियोन ने नॉन-स्ट्राइकर स्टंप्स पर बेल्स स्विच कीं और बर्न्स सिर्फ 2 और रूट सिर्फ 3 और रन बनाने के बाद आउट हो गए।

अगर बेल्स को स्टंप्स से हटाने का कोई सबसे मजेदार किस्सा जानना है तो सीधे 1971 के इंग्लैंड-भारत टेस्ट पर जाना होगा। संयोग से तब भी टेस्ट ओवल में था और ये वही टेस्ट है जिसमें अजीत वाडेकर की टीम ने, इंग्लैंड के विरुद्ध, इंग्लैंड में पहली टेस्ट जीत हासिल की थी। इंग्लैंड को दूसरी पारी में सिर्फ 101 पर आउट किया था। 

इस टेस्ट में जीत में एकनाथ सोलकर की भूमिका को बहुत याद किया जाता है- जो स्कोर कार्ड नहीं बताते, उसके लिए भी। जब वह टेस्ट टीम जीतने वाली को, कुछ साल पहले, मुंबई के नेहरू सेंटर में सम्मानित किया गया, तब तक सोलकर इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे लेकिन सोलकर वह क्रिकेटर थे जिनका उस प्रोग्राम में सबसे ज्यादा जिक्र हुआ। 

चंद्रशेखर ने कहा- 'जो कैच लपके वे कमाल के थे- ख़ास तौर पर टेस्ट की दूसरी पारी में वेंकटराघवन की गेंद पर एलन नॉट को आउट करने वाला कैच।' उस प्रोग्राम के समय अजीत वाडेकर जीवित थे और उन्होंने बताया कि कैसे सोलकर ने, अपने समय में दुनिया के सबसे बेहतर विकेटकीपर एलन नॉट को 'स्टम्प्ड' कर दिया था। क्या किया था सोलकर ने कि बार-बार नॉट को आउट करने का ही जिक्र हुआ?

असल में नॉट की एक बड़ी अजीब आदत थी (इसे उनका अंधविश्वास भी कह सकते हैं)- जब बल्लेबाजी के लिए आते थे तो अपने गार्ड पर निशान लगाने के लिए बैट नहीं, बेल्स का इस्तेमाल करते थे। नॉट बड़े अड़ियल किस्म के बल्लेबाज थे और उनका विकेट कई बार, कई टीम के लिए सरदर्द बना। भारत की टीम भी, उस सीरीज में उनसे परेशान थी। नॉट ने इससे पहले, इसी सीरीज में बैट से उपयोगी योगदान देकर इंग्लैंड को बचाया था। यहां तक कि, ओवल में भी पहली पारी में, उन्होंने 90 रन बनाए और इंग्लैंड को 139-4 से 278-6 तक ले गए थे। इसलिए भारत की टीम के लिए उनका विकेट बड़ा ख़ास था। 

जैसे उसी साल के पोर्ट ऑफ़ स्पेन टेस्ट में अजीत वाडेकर ने सुनील गावस्कर को छिपा लिया था ताकि गैरी सोबर्स, अपनी किस्मत चमकाने के लिए, उन्हें छू न पाएं- वैसे ही ओवल में, सोलकर ने स्टंप्स पर रखी बेल्स छिपा लीं ताकि नॉट उनसे अपने गार्ड का निशान न बना पाएं। उन्हें अपनी जेब में रख लिया था। जब नॉट, अपने गार्ड पर निशान लगाने के लिए, बेल्स उठाने मुड़े तो बेल्स थीं ही नहीं स्टंप्स पर। वाडेकर के शब्दों में- 'इससे नॉट का मिजाज एकदम बिगड़ गया।'  उनके, बैट से, गार्ड बनाते ही सोलकर ने बेल्स वापस स्टंप्स पर रख दीं।  

नॉट इसके बाद, वह नॉट लगे ही नहीं, जिसके लिए वे मशहूर थे। टीम तब संकट में थी और स्कोर 60-4 था और वह सिर्फ 1 रन पर आउट हो गए। ये मानने वालों की कमी नहीं है कि उनके आउट होने के बाद ही, वाडेकर की टीम को ये लगा था कि अब वास्तव में इंग्लैंड को कम स्कोर पर आउट कर सकते हैं। नॉट को 1 रन पर आउट करने के लिए एकी ने वह मशहूर कैच लपका जिसका जिक्र सबसे बेहतरीन कैच की चर्चा में अक्सर होता है।
 

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Charanpal Singh Sobti
Charanpal Singh Sobti is a veteran cricket writer with more than five decades of experience covering the game. At Cricketnmore, he brings his extensive knowledge, unique perspective and deep understanding of cricket to readers through insightful news, analysis, historical pieces and fascinating stories from the world of cricket. Read More
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