ओलंपिक और वर्ल्ड ट्रायथलॉन चैंपियन जॉनी ब्राउनली ने 36 साल की उम्र में खेल से संन्यास की घोषणा की है। इसी उम्र में ब्राउनली के बड़े भाई एलेस्टेयर ब्राउनली ने भी रिटायरमेंट का ऐलान किया था।

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छह बार के वर्ल्ड चैंपियन और मिक्स्ड टीम इवेंट में ओलंपिक गोल्ड मेडल जीतने वाले ब्राउनली ने कहा कि संन्यास की पुष्टि करने से पहले वह कुछ समय से इस बारे में सोच रहे थे। 'बीबीसी स्पोर्ट' के अनुसार, जॉनी ने कहा, "मैं कुछ समय से इस बारे में सोच रहा था। मैंने उससे कहीं ज्यादा हासिल किया है जितना मैंने कभी सोचा था। एक बात जिस पर मुझे सच में गर्व है, वह यह है कि हमने ओलंपिक मेडल जीतने और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए पूरी तरह से खुद को समर्पित किया। अब मुझे नहीं लगता कि मैं ऐसा और कर सकता हूं। प्रोफेशनल खेल के लिए तो यह खत्म हो गया है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि आप कभी सच में पूरी तरह रुकते हैं।"

जॉनी ने 2012 लंदन ओलंपिक में ब्रॉन्ज और 2016 रियो में व्यक्तिगत सिल्वर मेडल जीता था। आखिरकार 2020 टोक्यो गेम्स में मिक्स्ड रिले में वह गोल्ड मेडल जीतने में सफल रहे थे। ब्रिटिश खिलाड़ी ने कहा कि उनके बच्चे के जन्म ने उन्हें संन्यास के फैसले के बारे में स्पष्टता दी।

ब्राउनली ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि मैं वैसा समर्पण दिखा सकता हूं , क्योंकि जिंदगी अब वैसी नहीं रही। अब मेरी प्राथमिकता वह (बच्चा) और मेरा परिवार है, साथ ही मेरा शरीर भी। पहले ट्रेनिंग सेशन छूटने का ख्याल दुनिया की सबसे बुरी बात लगती थी, जबकि अब अगर फ्रेडी बीमार है या उसे मेरी जरूरत है तो मैं बिना किसी सवाल के वही करता हूं।"

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अब चोट लगने का डर लगता है, क्योंकि तब वह अपने 10 महीने के बेटे को गोद में नहीं उठा पाएंगे। उन्होंने कहा, "पहले मुझे रेसिंग से बिल्कुल भी डर नहीं लगता था। मैं अपनी बाइक पर 60 किमी/घंटा की रफ्तार से कोनों पर मुड़ जाता था और परवाह नहीं करता था। अगर मैं उस मोड़ पर टकराकर गिर जाता हूं और मेरी कलाई टूट जाती है तो मैं पांच से छह हफ्ते तक फ्रेडी को गोद में नहीं ले पाऊंगा। मैं सोच रहा था कि क्या यह सब अब भी इतना जरूरी है।"

36 साल के इस खिलाड़ी ने अपने सफर को याद करते हुए कहा कि उन्हें लंदन 2012 पर बहुत गर्व है। इसके साथ ही, उन्होंने मैक्सिको में हुई 2016 वर्ल्ड सीरीज ट्रायथलॉन रेस का भी जिक्र किया, जहां गर्मी की वजह से वे लगभग गिर ही गए थे, लेकिन उनके बड़े भाई ने उन्हें सहारा देकर दूसरे स्थान पर फिनिश लाइन तक पहुंचाया था।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अब चोट लगने का डर लगता है, क्योंकि तब वह अपने 10 महीने के बेटे को गोद में नहीं उठा पाएंगे। उन्होंने कहा, "पहले मुझे रेसिंग से बिल्कुल भी डर नहीं लगता था। मैं अपनी बाइक पर 60 किमी/घंटा की रफ्तार से कोनों पर मुड़ जाता था और परवाह नहीं करता था। अगर मैं उस मोड़ पर टकराकर गिर जाता हूं और मेरी कलाई टूट जाती है तो मैं पांच से छह हफ्ते तक फ्रेडी को गोद में नहीं ले पाऊंगा। मैं सोच रहा था कि क्या यह सब अब भी इतना जरूरी है।"

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उन्होंने 2016 की उस रेस का भी जिक्र किया जिससे उन्हें चिढ़ होती थी। जॉनी ने कहा, "शुरुआत में मुझे इससे सच में चिढ़ होती थी। मैंने कई ओलंपिक मेडल और वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती हैं, लेकिन लोग उसी घटना को याद रखते थे। अक्सर लोग पूछते हैं, 'आप कौन हैं? क्या आप वो हैं जिसने सहारा दिया था या वो जिसे सहारा दिया गया था तो हां, यह बात मुझे थोड़ी खटकती है।"

Article Source: IANS

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