गुजरात के अहमदाबाद में प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप का आयोजन 4 से 8 जून तक किया गया था। इस चैंपियनशिप में 60 से अधिक देशों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। भारत की टीम में बिहार राज्य के खिलाड़ी भी शामिल थे और उन्होंने अपने प्रदर्शन से न सिर्फ देश के लिए पदकों की संख्या बढ़ाई, बल्कि बिहार राज्य का नाम रोशन किया। अहमदाबाद से पटना लौटने पर बिहार के प्रतिभागियों का भव्य स्वागत किया गया।
एयरपोर्ट पर सारांश कुमार, दिलीप कुमार और सुधांशु शेखर का स्वागत माला पहनाकर किया गया। तीनों को प्रशंसकों और शुभचिंतकों ने मालाओं से लाद दिया।
मीडिया से बात करते हुए सारांश कुमार ने कहा, "मैंने स्वर्ण पदक जीता है। इसके लिए मैं बिहार सरकार को धन्यवाद देना चाहूंगा। बिहार सरकार की वजह से ही मुझे बेहतर प्रशिक्षण का अवसर मिला और मैं स्वर्ण पदक जीत सका।"
सारांश कुमार ने कहा, "मैं युवाओं से कहना चाहता हूं कि आप शिक्षा के साथ ही खेल के क्षेत्र में भी भी अपना करियर बना सकते हैं। खेल में भी करियर के काफी अवसर हैं। राज्य सरकार ने बहुत पहले 'मेडल लाओ नौकरी पाओ' की एक नीति लागू की थी। इसके तहत अच्छी नौकरियां उपलब्ध हैं।"
उन्होंने कहा कि दिसंबर में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भी हमारी तैयारी है। हम उसमें भी स्वर्ण पदक प्राप्त करेंगे।
सारांश कुमार ने कहा, "मैं युवाओं से कहना चाहता हूं कि आप शिक्षा के साथ ही खेल के क्षेत्र में भी भी अपना करियर बना सकते हैं। खेल में भी करियर के काफी अवसर हैं। राज्य सरकार ने बहुत पहले 'मेडल लाओ नौकरी पाओ' की एक नीति लागू की थी। इसके तहत अच्छी नौकरियां उपलब्ध हैं।"
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अहमदाबाद में 4 से 8 जून तक आयोजित योगासन चैंपियनशिप योगा के क्षेत्र में अपने तरह की पहली प्रतियोगिता थी। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि यह चैंपियनशिप भविष्य में ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर योगा को खेल की श्रेणी में शामिल कराने के लिए बेहद अहम हो सकता है।