'विंबलडन' विश्व का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम टेनिस टूर्नामेंट है। घास पर खेले जाने वाले इस इकलौते ग्रैंड स्लैम की शुरुआत साल 1877 में हुई थी।
यूं तो, फ्रेंच ओपन के अलावा अन्य सभी ग्रैंड स्लैम इवेंट्स को घास पर खेला जा चुका है, लेकिन बाद में इन्हें ग्रीन क्ले, हार्ड कोर्ट और क्ले कोर्ट पर शिफ्ट कर दिया गया।
विंबलडन में 100 प्रतिशत ऐसी घास (बारहमासी राईग्रास) लगाई जाती है, जो हमेशा हरी रहती है। साल 2001 से पहले इस टूर्नामेंट में 70 प्रतिशत राईग्रास और 30 प्रतिशत रेड फेस्क्यू घास का मिश्रण होता था, लेकिन बाद में इसे शत प्रतिशत राईग्रास कर दिया गया। यह ऐसी दुर्लभ सतहों में से एक है, जिस पर कई खिलाड़ी अपने पूरे जीवनकाल में कभी कदम ही नहीं रख सके हैं।
कोर्ट की निचली सतह को नुकसान पहुंचाए बिना खेल जारी रखने के लिए मिट्टी का सख्त और सूखा होना जरूरी है। एक समान और सख्त सतह के लिए, कोर्ट को रोल किया जाता है और उसे ढक दिया जाता है, ताकि सतह को सूखा और मजबूत बनाए रखा जा सके।
घास के टेनिस कोर्ट में घर्षण कम होता है। उछाल के दौरान ज्यादा ऊर्जा अवशोषित होती है। खिलाड़ियों के लिए यह सबसे चुनौतीपूर्ण सतहों में से एक है, जिस पर गेंद तक पहुंचने के लिए शरीर को नीचे रखना जरूरी है। यह खिलाड़ियों के लिए सबसे फिसलन भरी सतह भी है।
घास के कोर्ट तापमान, नमी और बाहरी प्रभावों से प्रभावित होते हैं। अगर तापमान कम हो, तो घास के नीचे की मिट्टी ज्यादा ठोस होती है, जिससे जमीन पर टकराने के बाद गेंद की गति बढ़ती है। वहीं, फिसलन भरी घास पर गेंद जमीन के और भी करीब रह सकती है। नमी उसकी गति को कम कर देती है। फिसलन भरी सतह पर खिलाड़ियों को दौड़ने में मुश्किल होती है। खासकर, तब जब शुरुआती मुकाबलों में घास कम घिसी हुई होती है।
घास के टेनिस कोर्ट में घर्षण कम होता है। उछाल के दौरान ज्यादा ऊर्जा अवशोषित होती है। खिलाड़ियों के लिए यह सबसे चुनौतीपूर्ण सतहों में से एक है, जिस पर गेंद तक पहुंचने के लिए शरीर को नीचे रखना जरूरी है। यह खिलाड़ियों के लिए सबसे फिसलन भरी सतह भी है।
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विंबडलन के सेंटर कोर्ट पर 9,709 वर्ग फुट की घास है। इसके साथ ही अन्य 17 चैंपियनशिप कोर्ट और 20 घास के प्रैक्टिस कोर्ट हैं। ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस क्लब सितंबर में हर कोर्ट का नवीनीकरण करता है।