मणिपुर पिछले कुछ वर्षों में भारतीय खेल के क्षेत्र के पावरहाउस के रूप में उभरा है। एथलीट न सिर्फ पारंपरिक खेलों बल्कि हर तरह के खेल में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी राज्य से निकली एक बड़ा नाम अनुराधा देवी थोकचोम हैं जिन्होंने हॉकी के क्षेत्र में बड़ा नाम बनाया है।
अनुराधा देवी थोकचोम का जन्म 2 फरवरी 1989 को तौबुल, मणिपुर में हुआ था। अनुराधा की पारिवारिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनके पिता, थोकचोम चुरामणि, एक रिक्शा चालक थे। अनुराधा तीन भाई-बहन हैं। उनके बड़े भाई फुटबॉल के खिलाड़ी थे। उनका परिवार खेती और मछली पालन से भी जुड़ा था।
मणिपुर में हॉकी को लेकर बहुत ज्यादा रुझान नहीं रहा है। व्यापक तौर पर फुटबॉल खेली जाती थी, लेकिन भाई-बहनों के मार्गदर्शन में अनुराधा ने बहुत कम उम्र में ही हॉकी स्टिक पकड़ ली। थोकचोम ने तोबुल यूथ क्लब में हॉकी खेलना शुरू किया और बाद में इम्फाल स्थित पोस्टीरियर हॉकी अकादमी मणिपुर में दाखिला लिया।
अनुराधा देवी थोकचोम का जन्म 2 फरवरी 1989 को तौबुल, मणिपुर में हुआ था। अनुराधा की पारिवारिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनके पिता, थोकचोम चुरामणि, एक रिक्शा चालक थे। अनुराधा तीन भाई-बहन हैं। उनके बड़े भाई फुटबॉल के खिलाड़ी थे। उनका परिवार खेती और मछली पालन से भी जुड़ा था।
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वह 2013 में क्वालालंपुर में आयोजित एशिया कप में कांस्य और 2016 में सिंगापुर में एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में स्वर्ण जीतने वाली टीम की सदस्य रही हैं। इस खिताबी जीत के बाद उन्होंने हॉकी को अलविदा कह दिया था। वर्तमान में वे भारतीय रेलवे के लिपिक विभाग में कार्यरत हैं।