स्पेन के खिलाफ मिली 0-1 की हार के साथ ही उरुग्वे फुटबॉल टीम का फीफा वर्ल्ड कप 2026 में सफर समाप्त हो गया। टूर्नामेंट में टीम के खराब प्रदर्शन के लिए हेड कोच मार्सेलो बिएल्सा ने खुद को जिम्मेदार ठहराया है।
बिएल्सा का कहना है कि वह उरुग्वे की टीम से बेस्ट प्रदर्शन करवाने में नाकाम रहे। दो बार की चैंपियन उरुग्वे ग्रुप स्टेज में खेले 3 मुकाबलों में सिर्फ 2 प्वाइंट ही अर्जित कर सकी और तीसरे नंबर पर रही। 'सिन्हुआ' के मुताबिक बिएल्सा ने कहा, "मैं उरुग्वे के खिलाड़ियों की क्षमता के अनुसार उनसे बेस्ट प्रदर्शन करवाने में नाकाम रहा। मैं टीम को एकजुट करके हर खिलाड़ी से उनकी काबिलियत के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करवा सका।"
बिएल्सा ने मैच के दौरान कप्तान फेडेरिको वाल्वरडे की जगह दूसरे खिलाड़ी को मैदान पर भेजने और हाफ टाइम के बाद गोलकीपर फर्नांडो मुस्लेरा को स्थानापन्न करने के अपने फैसले का बचाव किया। बिएल्सा ने बताया कि 56वें मिनट में वाल्वरडे की जगह दूसरे खिलाड़ी को उतारने का मकसद टीम के आक्रमण को और मजबूत बनाना था। उनका मानना था कि इससे उरुग्वे ज्यादा गोल करने के मौके बना सकेगा। हालांकि मैच के बाद टीवी कैमरों में वाल्वरडे सब्स्टीट्यूट बेंच पर भावुक नजर आए और उनकी आंखों में आंसू दिखाई दिए।
बिएल्सा का कहना है कि वह उरुग्वे की टीम से बेस्ट प्रदर्शन करवाने में नाकाम रहे। दो बार की चैंपियन उरुग्वे ग्रुप स्टेज में खेले 3 मुकाबलों में सिर्फ 2 प्वाइंट ही अर्जित कर सकी और तीसरे नंबर पर रही। 'सिन्हुआ' के मुताबिक बिएल्सा ने कहा, "मैं उरुग्वे के खिलाड़ियों की क्षमता के अनुसार उनसे बेस्ट प्रदर्शन करवाने में नाकाम रहा। मैं टीम को एकजुट करके हर खिलाड़ी से उनकी काबिलियत के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करवा सका।"
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इस मुकाबले में स्पेन ने 42वें मिनट में बढ़त बनाई। एलेक्स बेना ने बॉक्स के बाहर से शानदार शॉट लगाया, जो मुस्लेरा के हाथों के बीच से निकलकर गोल में चला गया। उस समय मैदान पर दोनों टीमों के दो खिलाड़ियों का इलाज चल रहा था, लेकिन खेल जारी था और बेना ने मौके का पूरा फायदा उठाया। यही गोल मैच में निर्णायक साबित हुआ।