Major Dhyan Chand Khel Ratna: निशानेबाजी को आधुनिक समय में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक प्रतिष्ठित खेल का दर्जा प्राप्त है। भारतीय निशानेबाजों ने भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बड़ी सफलता हासिल की है और देश का नाम रोशन किया है। 2008 में बीजिंग ओलंपिक में अभिनव बिंद्रा ने जहां स्वर्ण पदक जीता था, वहीं 2024 में पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर ने भी कांस्य पदक जीता था।
कॉमनवेल्थ गेम्स और निशानेबाजी पर आधारित प्रतियोगिताओं में भारतीय टीम का प्रदर्शन अच्छा रहा है। 2010 में आठवीं राष्ट्रमंडल निशानेबाजी प्रतियोगिता में भारतीय टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान प्राप्त किया था।
भारतीय टीम ने 35 स्वर्ण, 25 रजत और 14 कांस्य सहित कुल 74 पदक जीते थे।
इंग्लैंड दूसरे स्थान पर रही। इंग्लैंड 4 स्वर्ण सहित 31 पदक के साथ दूसरे और वेल्स चार स्वर्ण सहित 13 पदक जीतकर तीसरे स्थान पर रहा। ऑस्ट्रेलिया 3 स्वर्ण सहित 19 पदक जीतकर चौथे स्थान पर रही।
भारत की तरफ से पदक जीतने वालों में गुरप्रीत सिंह, समरेश जंग, विजय कुमार, श्वेता चौधरी, अनुराज सिंह, पुष्पांजलि राणा, और गगन नारंग प्रमुख नाम रहे।
नारंग ने 596 अंक बनाकर राष्ट्रमंडल निशानेबाजी का नया रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन टाईब्रेकर में वह ऑस्ट्रेलियाई निशानेबाज से मामूली अंतर से पिछड़ गए थे।
मौजूदा समय में भारतीय निशानेबाजी पहले से अधिक मजबूत हो गई है। मनु भाकर और स्वप्निल कुसाले जैसे युवाओं ने ओलंपिक जैसे वैश्विक मंच पर भारत की सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है।
नारंग ने 596 अंक बनाकर राष्ट्रमंडल निशानेबाजी का नया रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन टाईब्रेकर में वह ऑस्ट्रेलियाई निशानेबाज से मामूली अंतर से पिछड़ गए थे।
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कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत ने निशानेबाजी में अब तक सबसे ज्यादा 135 पदक जीते हैं। यह खेल भारत के लिए कॉमनवेल्थ में सबसे सफल रहा है।