भारत के पारंपरिक खेल 'मलखंभ' में खिलाड़ी लकड़ी के खंभे या रस्सी पर योगासन, ताकत और संतुलन का प्रदर्शन करते हैं। मलखंभ भारतीय खेल विरासत की अनमोल धरोहर है, जो शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी के साथ खिलाड़ी की एकाग्रता और आत्मविश्वास को बढ़ाती है।

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मलखंभ शब्द 'मल्ल' यानी 'पहलवान' और 'खंभ' यानी 'खंभा' से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है 'पहलवान का खंभा'।

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मलखंभ का खेल 12वीं शताब्दी में महाराष्ट्र से जुड़ा है। 1135 ई. में लिखे गए चालुक्य राजाओं के ग्रंथ 'मानसोल्लास' में भी इसका उल्लेख मिलता है, जहां पहलवानों को प्रशिक्षित करने के लिए इसे खेला जाता था।

1600 के दशक के अंत से 1800 के दशक की शुरुआत तक मलखंभ का खेल कुछ हद तक निष्क्रिय रहा।

18वीं सदी में बलमभट्ट दादा देवधर ने इस खेल को पुनर्जीवित किया और रानी लक्ष्मीबाई ने भी इसे सीखा। यह कला 'गुरिल्ला युद्ध' में उपयोगी साबित हुई।

1958 में दिल्ली में आयोजित नेशनल जिम्नास्टिक चैंपियनशिप में इस खेल का प्रदर्शन किया गया। 1962 में पहली बार नेशनल मलखंभ चैंपियनशिप आयोजित की गई, जिसके बाद साल 1981 में 'मलखंभ फेडरेशन ऑफ इंडिया' की स्थापना हुई। इसके बाद नियमों को भी औपचारिक रूप दिया गया।

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मलखंभ भले ही अभी तक ओलंपिक में मेडल इवेंट के तौर पर शामिल नहीं किया गया, लेकिन 1936 बर्लिन ओलंपिक में इसे एग्जीबिशन गेम के तौर पर शामिल किया गया था। उस समय मलखंभ उन भारतीय खेलों में से एक था, जिसमें अन्य देशों ने भी हिस्सा लिया था। यही वजह रही कि इस खेल का प्रसार दूसरे देशों में भी हुआ।

साल 2019 में पहली बार मलखंभ वर्ल्ड चैंपियनशिप का आयोजन किया गया, जिसमें 15 देशों के 150 से ज्यादा एथलीट्स ने हिस्सा लिया। 1928 ओलंपिक गेम्स में भी इस खेल को प्रदर्शनी खेल में शामिल किया गया। मलखंभ तीन प्रकार के होते हैं, पोल मलखंभ, रोप मलखंभ और हैंगिंग मलखंभ।

'पोल मलखंभ' एक पारंपरिक रूप है, जिसमें एथलीट्स 2.6 मीटर की ऊंचाई वाले लकड़ी के खंभे पर अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। 'रोप मलखंभ' में प्रतियोगी 5.5 मीटर लंबी और 2 सेंटीमीटर चौड़ी रस्सी की मदद से अपनी कला को प्रदर्शित करते हैं, जबकि 'हैंगिंग मलखंभ' में एक छोटा सा पोल जंजीर के सहारे लटका होता है।

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साल 2019 में पहली बार मलखंभ वर्ल्ड चैंपियनशिप का आयोजन किया गया, जिसमें 15 देशों के 150 से ज्यादा एथलीट्स ने हिस्सा लिया। 1928 ओलंपिक गेम्स में भी इस खेल को प्रदर्शनी खेल में शामिल किया गया। मलखंभ तीन प्रकार के होते हैं, पोल मलखंभ, रोप मलखंभ और हैंगिंग मलखंभ।

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मलखंभ के खेल में भारत विश्व में अग्रणी है, जिसमें इस देश का दबदबा रहा है। हाल के वर्षों में सरकार और खेल संस्थाओं के प्रयास से मलखंभ को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। इसे ओलंपिक स्तर तक पहुंचाने की दिशा में भी पहल जारी है। अगर यह खेल ओलंपिक में शामिल होता है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा भारत को ही मिलता नजर आता है।

Article Source: IANS

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