प्रो रेसलिंग लीग (पीडब्ल्यूएल) का असर घरेलू सर्किट पर दिखाई दे रहा है। लीग के ऐतिहासिक पांचवें सीजन में हिस्सा लेने वाले कई पहलवानों ने 10 से 12 मई के बीच गोंडा में हुए सीनियर ओपन रैंकिंग कुश्ती टूर्नामेंट में अपना दमखम दिखाया। इस प्रतियोगिता में पदक जीतने वाले पहलवानों को आगामी वर्ल्ड चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप के लिए चयन ट्रायल में शामिल होने की पात्रता मिल गई है।
पीडब्ल्यूएल सीजन-5 में कई एथलीट्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक अपने नाम किए। इससे यह साबित होता है कि लीग द्वारा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शीर्ष पहलवानों के साथ लगातार अभ्यास और मुकाबले का जो मौका दिया जाता है, वह कितना कीमती है।
पीडब्ल्यूएल के सितारों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया था, और अब घरेलू स्तर पर मिली उनकी सफलता इस बात को और पुख्ता करती है कि लीग ने बेहतरीन खिलाड़ियों को निखारा है।
पुरुषों की फ्रीस्टाइल श्रेणी में, यूपी डोमिनेटर्स के सागर ने 57 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड जीता। वहीं, महाराष्ट्र केसरी के पहलवान यश तुशीर ने 74 किलोग्राम वर्ग में जीत हासिल की।
वर्ल्ड जूनियर ब्रॉन्ज मेडलिस्ट तुशीर ने आखिरी बार दो साल पहले एशियन चैंपियनशिप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिस्सा लिया था। इसके बाद उन्हें घुटने, कंधे और पैर के अंगूठे में चोटों जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, जिसके चलते छह महीने तक ब्रेक लेना पड़ा था। इसके बाद तुशीर ने शानदार वापसी की।
मुंबई दंगल्स के पहलवान नवीन ने 79 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड जीता। वहीं, मशहूर पहलवान दीपक पूनिया ने महाराष्ट्र केसरी का प्रतिनिधित्व करते हुए 92 किलोग्राम वर्ग में शीर्ष स्थान हासिल करते हुए अपने शानदार करियर में एक और गोल्ड जीत लिया है।
वर्ल्ड जूनियर ब्रॉन्ज मेडलिस्ट तुशीर ने आखिरी बार दो साल पहले एशियन चैंपियनशिप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिस्सा लिया था। इसके बाद उन्हें घुटने, कंधे और पैर के अंगूठे में चोटों जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, जिसके चलते छह महीने तक ब्रेक लेना पड़ा था। इसके बाद तुशीर ने शानदार वापसी की।
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इस लीग का असर इस बात से भी पता चलता है कि सीनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में भारत के जीते 17 मेडल्स में से 11 मेडल्स पीडब्ल्यूएल के पहलवानों ने जीते हैं। यह इस बात को और मजबूत करता है कि भारतीय पहलवानों के लिए कॉन्टिनेंटल और ग्लोबल लेवल पर सफल होने का यह एक अहम जरिया है।