त्रिपुरा में अगले साल तक अपना चाय नीलामी केंद्र बनने की उम्मीद है। इस कदम से राज्य के चाय उद्योग को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह जानकारी बुधवार को ‘रन फॉर टी – 2025’ कार्यक्रम के दौरान त्रिपुरा टी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के चेयरमैन समीर रंजन घोष ने दी। कार्यक्रम में युवा मामले और खेल मंत्री टिंकू रॉय, अगरतला के मेयर दीपक मजूमदार, वेस्ट त्रिपुरा जिला परिषद के सभापति बिस्वजीत शील, ओलंपियन जिम्नास्ट दीपा करमाकर और टी बोर्ड ऑफ इंडिया के डिप्टी डायरेक्टर रमन लाल बैश्य भी मौजूद रहे।

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उद्योग और वाणिज्य मंत्री संताना चकमा ने कहा, "त्रिपुरा टी कॉर्पोरेशन की तरफ से रन फॉर टी-2025 हमने आयोजित किया। इसका उद्देश्य श्रेष्ठ त्रिपुरा, श्रेष्ठ भारत है। हमारा लक्ष्य त्रिपुरा में चाय उत्पादन को बढ़ावा देना है। त्रिपुरा की चाय की लोकप्रियता को बढ़ाने के साथ ही युवाओं को नशे से दूर रखना है। हम प्रधानमंत्री के नारे 'वोकल फॉर लोकल' को आगे बढ़ाने की राह पर चल रहे हैं।"

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मंत्री टिंकु राय ने कहा, "चाय त्रिपुरा का सबसे बड़ा उद्योग है। यह बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध कराता है। ‘रन फॉर टी’ का आयोजन हर साल त्रिपुरा टी कॉर्पोरेशन और भारत का टी बोर्ड संयुक्त रूप से करते हैं। ये पहल न केवल त्रिपुरा चाय की ब्रांडिंग में मदद करती है, बल्कि युवाओं को सकारात्मक गतिविधि में भी शामिल करती है। इससे वे ड्रग्स के खतरे से दूर रहते हैं। भविष्य में स्थापित होने वाले नीलामी केंद्र से चाय उद्योग और मजबूत होगा और त्रिपुरा की पहचान भारत के प्रमुख चाय उत्पादक राज्यों में होगी।"

प्रस्तावित नीलामी केंद्र का लक्ष्य राज्य में चाय उत्पादकों के सामने लंबे समय से आ रही परिवहन की समस्या की दिक्कतों को दूर करना है। त्रिपुरा की चाय का एक बड़ा हिस्सा गुवाहाटी और पश्चिम बंगाल के नीलामी बाजार में भेजा जाता है। इससे लागत बढ़ती है और प्रतिस्पर्धा कड़ी होती है। राज्य के अंदर नीलामी केंद्र होने से परिवहन का खर्च काफी कम होने की उम्मीद है। इससे चाय उत्पादकों, विक्रेताओं और इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को बेहतर कीमत मिल सकेगी।

त्रिपुरा में चाय के अभी 54 बड़े बागान हैं, जिनमें सरकारी त्रिपुरा चाय विकास कॉर्पोरेशन लिमिटेड और त्रिपुरा कोऑपरेटिव सोसाइटी के बागान शामिल हैं, साथ ही प्राइवेट बागान भी हैं। इसके अलावा, लगभग 2,800 छोटे चाय उगाने वाले राज्य के कुल चाय उत्पादन में करीब 30 प्रतिशत का योगदान देते हैं, जो सालाना लगभग 90 लाख किलोग्राम है। इस उत्पादन का 60 प्रतिशत से ज्यादा अभी राज्य के बाहर नीलामी बाजारों के जरिए बेचा जाता है।

प्रस्तावित नीलामी केंद्र का लक्ष्य राज्य में चाय उत्पादकों के सामने लंबे समय से आ रही परिवहन की समस्या की दिक्कतों को दूर करना है। त्रिपुरा की चाय का एक बड़ा हिस्सा गुवाहाटी और पश्चिम बंगाल के नीलामी बाजार में भेजा जाता है। इससे लागत बढ़ती है और प्रतिस्पर्धा कड़ी होती है। राज्य के अंदर नीलामी केंद्र होने से परिवहन का खर्च काफी कम होने की उम्मीद है। इससे चाय उत्पादकों, विक्रेताओं और इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को बेहतर कीमत मिल सकेगी।

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इस साल की दौड़ में मंत्रियों और जनता के प्रतिनिधियों समेत 1,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया।

Article Source: IANS

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