बड़ी पुरानी कहावत है, 'जहां चाह, वहां राह।' बैडमिंटन की दुनिया में सफलता के नए आयाम छूने की ऐसी ही चाहत भारत की स्टार खिलाड़ी त्रिशा जॉली की भी थी। बैडमिंटन के खेल से इस कदर लगाव हुआ कि ट्रेनिंग के लिए अपना शहर छोड़कर हैदराबाद शिफ्ट हो गईं। कड़ी मेहनत, लगन और दमदार प्रदर्शन के बूते त्रिशा आज इस खेल में किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं।
त्रिशा का जन्म 27 मई, 2003 को केरल में हुआ। बचपन से ही त्रिशा को बैडमिंटन में खास रुचि थी। उनके पिता स्कूल में शारीरिक शिक्षक (पीटी टीचर) थे। त्रिशा की प्रतिभा और इस खेल के प्रति उनके लगाव को पिता ने ही पहचाना। पिता की देखरेख में त्रिशा इस खेल की बारीकियां सीखने लगीं।
हालांकि, केरल में बैडमिंटन के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। इसी वजह से त्रिशा ने हैदराबाद शिफ्ट होने का फैसला किया और यहां आकर उन्होंने गोपीचंद एकेडमी में दाखिला लिया। इसके बाद त्रिशा इस खेल में रमती गईं और उन्होंने धीरे-धीरे नाम कमाना शुरू कर दिया। जूनियर स्तर पर लगातार अच्छे प्रदर्शन के बूते त्रिशा ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचना शुरू कर दिया।
हालांकि, त्रिशा को सबसे बड़ी कामयाबी साल 2022 में हाथ लगी। बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में त्रिशा ने गायत्री गोपीचंद के साथ मिलकर महिला युगल में कांस्य पदक अपने नाम किया। इस टूर्नामेंट में त्रिशा के खेल ने उन्हें इंटरनेशनल स्टेज पर पहचान दिलाई। इसी साल ऑल इंग्लैंड ओपन में भी गायत्री संग मिलकर त्रिशा ने शानदार प्रदर्शन किया।
हालांकि, केरल में बैडमिंटन के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। इसी वजह से त्रिशा ने हैदराबाद शिफ्ट होने का फैसला किया और यहां आकर उन्होंने गोपीचंद एकेडमी में दाखिला लिया। इसके बाद त्रिशा इस खेल में रमती गईं और उन्होंने धीरे-धीरे नाम कमाना शुरू कर दिया। जूनियर स्तर पर लगातार अच्छे प्रदर्शन के बूते त्रिशा ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचना शुरू कर दिया।
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यह उनका पहला सुपर सीरीज 300 खिताब भी रहा। लगातार अच्छे प्रदर्शन के बूते त्रिशा महिला युगल में विश्व रैंकिंग में टॉप 10 में पहुंचीं। त्रिशा से आने वाले वर्षों में देश को और पदक की उम्मीद है। कॉमनवेल्थ गेम्स में वह एक बार फिर दमदार प्रदर्शन से छाप जरूर छोड़ना चाहेंगी।