भारत में दिग्गज पहलवानों के नामों का जब जिक्र किया जाता है, तो उसमें महान पहलवान रहे उदय चंद का नाम सबसे ऊपर आता है। उदय विश्व कुश्ती चैंपियनशिप का खिताब जीतने वाले आजाद भारत के पहले पहलवान रहे। कुश्ती के खेल में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित होने वाले उदय देश के पहले पहलवान रहे।
उदय चंद का जन्म 25 जून, 1935 को हरियाणा के हिसाब जिले (अब फतेहाबाद) के जांडली गांव में हुआ। उदय के बड़े भाई हरिराम भी पहलवान थे, तो उन्होंने उनके साथ ही अखाड़े में इस खेल की बारीकियों को सीखा। धीरे-धीरे उदय ने अपनी दमदार दांवों के बूते इस खेल में नाम कमाना शुरू कर दिया। उदय साल 1958 से लेकर 1970 तक लगातार 13 वर्ष नेशनल चैंपियन रहे। उनका यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड आजतक कोई पहलवान नहीं तोड़ सका है।
1961 में जापान में आयोजित हुई विश्व कुश्ती चैंपियनशिप को जीतकर उदय ने इतिहास रचा। वह आजादी के बाद इस खिताब को जीतने वाले देश के पहले पहलवान बने। इस टूर्नामेंट में उदय के साथ-साथ उनके भाई हरिराम ने भी हिस्सा लिया था। उदय चंद का दबदबा एशियाई खेलों में भी देखने को मिला।
उदय चंद का जन्म 25 जून, 1935 को हरियाणा के हिसाब जिले (अब फतेहाबाद) के जांडली गांव में हुआ। उदय के बड़े भाई हरिराम भी पहलवान थे, तो उन्होंने उनके साथ ही अखाड़े में इस खेल की बारीकियों को सीखा। धीरे-धीरे उदय ने अपनी दमदार दांवों के बूते इस खेल में नाम कमाना शुरू कर दिया। उदय साल 1958 से लेकर 1970 तक लगातार 13 वर्ष नेशनल चैंपियन रहे। उनका यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड आजतक कोई पहलवान नहीं तोड़ सका है।
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उदय अपने दांव और मजबूत पकड़ के दम पर बड़े से बड़े पहलवानों को धूल चटा दिए करते थे। उन्हें साल 1961 में सरकार ने अर्जुन पुरस्कार से नवाजा और वह कुश्ती में यह पुरस्कार पाने वाले भारत के पहले पहलवान बने। उदय भारतीय सेना में 1953 से लेकर 1970 तक सूदेबार की पोस्ट पर कार्यरत रहे। बतौर खिलाड़ी अपार सफलता पाने के बाद उदय चंद ने कोचिंग की दुनिया में भी खूब नाम कमाया। 1970 से लेकर 1995 के बीच उन्होंने हरियाणा कृष्ण विश्वविघालय में बतौर ट्रेनर सेवाएं दीं और देश को कई नेशनल और इंटरनेशनल लेवल के पहलवान तैयार करके दिए।