भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण का मानना है कि आधुनिक दौर के शीर्ष स्तर के खेलों में चोट लगना एक अनिवार्य हिस्सा है। उन्होंने बताया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की भूमिका सिर्फ चोटिल खिलाड़ियों के पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा इससे कहीं व्यापक है। सपोर्ट स्टाफ, सेलेक्टर और टीम मैनेजमेंट के बीच बहुत अच्छा तालमेल है।
सीनियर पुरुष और महिला टीमों को अलग-अलग मौकों पर चोटों की समस्या का सामना करना पड़ा है। इसे देखते हुए लक्ष्मण ने बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मन्हास, सचिव देवजीत सैकिया, कोषाध्यक्ष रघुराम भट्ट और संयुक्त सचिव प्रभतेज सिंह भाटिया के साथ रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इन सभी ने लक्ष्मण के साथ बेंगलुरु के बाहरी इलाके में करीब 40 एकड़ में फैले इस हाई-परफॉर्मेंस सेंटर में चोटों की बढ़ती समस्या पर चर्चा करने के लिए एक मीटिंग भी की।
लक्ष्मण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "सीओई सिर्फ एक रिहैब सेंटर नहीं है। क्रिकेटर्स को बेहतरीन प्रदर्शन करने में मदद करने के लिए इसकी भूमिका और भी बड़ी है। यह चिंता की बात नहीं है, लेकिन जाहिर है, जब कोई टॉप लेवल पर खेलता है, तो उसे शत प्रतिशत से ज्यादा देना होता है। अगर आप ऐसा नहीं करते, तो आप अपनी भूमिका या टीम में चुने जाने के मकसद के साथ न्याय नहीं कर रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं कि आज के खिलाड़ियों को उस समय की तुलना में कहीं ज्यादा क्रिकेट खेलना पड़ता है जब मैं खेलता था। जाहिर है, टी20 और तीनों फॉर्मेट के आने से ऐसा हुआ है, लेकिन यहीं पर सीओई और एसएसएम स्टाफ की पहल खिलाड़ियों के काम आएगी। यह सिर्फ अनुबंध वाले या चुने हुए खिलाड़ियों के लिए नहीं है, बल्कि इससे राज्य स्तर के खिलाड़ियों को भी फायदा होगा। इसलिए मुझे लगता है कि चोटें किसी भी खिलाड़ी के खेल का एक अहम हिस्सा होती हैं।"