The Day Women Made History at Lord’s: 1976 का वह 4 अगस्त का दिन था जब लॉर्ड्स में पहला महिला वनडे इंटरनेशनल (60-ओवर) खेले थे और ये वनडे सिर्फ एक क्रिकेट मैच नहीं, अपने आप में एक इतिहास था। कई साल के विरोध के बाद, महिला क्रिकेट को एक बड़ी कामयाबी मिली, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया टीम ने लॉर्ड्स में इतिहास रचा और पहली बार महिला क्रिकेटर ने लॉर्ड्स की ऑउटफील्ड पर कदम रखा।
विमेंस क्रिकेट एसोसिएशन (तब महिला क्रिकेट वे चलाते थे, आईसीसी नहीं) का इस मौके के लिए लंबा इंतज़ार आखिरकार खत्म हुआ। एसोसिएशन ने कई बार कोशिश की और सबसे ख़ास जनवरी 1929 में लॉर्ड्स में मैच की इजाजत मांगी जो न मिली। 1951 में ऑस्ट्रेलिया टीम के टूर पर महिलाओं को लॉर्ड्स में सिर्फ प्रैक्टिस की इजाजत मिली, मेन ग्राउंड तब भी उनकी पहुंच से बाहर रहा। 1973 में जब पहले महिला वर्ल्ड कप को इंग्लैंड ने हेहो फ्लिंट की कप्तानी में जीता तो लॉर्ड्स में खेलने की बात ने जोर पकड़ा पर एमसीसी ने इजाजत नहीं दी। हेहो फ्लिंट अब एमसीसी के नज़रिए में बदलाव के लिए और इंतज़ार के मूड में नहीं थीं। उन्होंने खुलेआम चैलेंज किया और इक्वल अपॉर्चुनिटीज़ कमीशन में जाने की धमकी दे दी। तब आखिरकार, एमसीसी ने मंजूरी दी।
इंग्लैंड की कप्तान और महिला क्रिकेट में कई ऐतिहासिक शुरुआत करने वाली रेचल हेहो फ्लिंट (Rachael Heyhoe Flint) के लिए तो ये मौका मानो एक और बड़ी रुकावट पार करने जैसा था। मजे की बात ये कि मौका आया तो अचानक ही यह मैच खेले थे। ऑस्ट्रेलिया टीम के टूर शेड्यूल में ये मैच लॉर्ड्स में नहीं था। इसे तो सनबरी में खेलना था और उस दिन लॉर्ड्स में एक अन्य मैच था। तब भी एमसीसी ने कहा कि अगर उस दिन मिडिलसेक्स का जिलेट कप मैच शेड्यूल न हुआ तो महिला वनडे खेल लेंगे। संयोग से इतिहास बना और मिडिलसेक्स टीम अपने जिलेट कप मैच में हार से, टूर्नामेंट से बाहर हो गई और लॉर्ड्स में इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया सीरीज का दूसरा वनडे शेड्यूल हो गया।