क्या आप जानते हैं कि अपने हेलमेट पर तिरंगा लगाने वाला पहला क्रिकेटर कौन थे और किस मैच में ऐसे हेलमेट को पहना? किसी क्रिकेटर के हेलमेट पर भारतीय ध्वज लगाने की पहली मिसाल का रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम है। इस घटना ने, शुरुआत करने वाले उस एशिया कप मैच को इसीलिए ऐतिहासिक बना दिया। तेंदुलकर के बाद विराट कोहली, रोहित शर्मा और युवराज सिंह जैसे कई क्रिकेटरों ने भी अपने हेलमेट पर भारतीय ध्वज लगाना शुरू कर दिया और फिर तो ये सिलसिला ही चल पड़ा। सचिन तेंदुलकर आज भी, अपने हेलमेट पर पहली बार तिरंगा लगाने वाले उस ऐतिहासिक अवसर को याद करते हैं। 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उन्होंने जो बात कही, वह तो खूब चर्चा में रही: 'मैं हमेशा अपने हेलमेट पर भारतीय ध्वज को लगाते हुए बड़ा गर्व महसूस करता हूं।'
जिस ऐतिहासिक एशिया कप मैच का जिक्र कर रहे हैं, वह 1997 के एशिया कप में भारत का पहला मैच था। 18 जुलाई को कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में श्रीलंका के विरुद्ध खेले उस मैच में भारत ने 50 ओवर में 6 विकेट पर 227 रन बनाए और जवाब में श्रीलंका ने 44.4 ओवर में 4 विकेट पर 231 रन बनाकर, जब 6 विकेट से जीत हासिल की तो उनके हिस्से की 32 गेंद बची थीं। मैन ऑफ द मैच अर्जुन रणतुंगा रहे, 131* बनाकर (152 गेंद खेले, 17 चौके और अटापट्टू और डेब्यू कर रहे लंका डी सिल्वा के साथ 100 रन वाली पार्टनरशिप कीं)। बाद में उन्होंने इसे, अपनी सबसे बेहतर पारी में से एक बताया था।
विश्वास कीजिए, उस समय अपने कपड़ों पर तिरंगा लगाया जाना या इसी तरह किसी और सामान पर तिरंगा लगाना मना था। तब सचिन तेंदुलकर के अपने हेलमेट पर भारतीय ध्वज लगा कर खेलने से पूरे देश में बहस शुरू हो गई थी। ढेरों उन्हें सपोर्ट करने वाले थे तो ढेरों इसे गलत बताने वाले भी थे। ये बहस अगले कई साल तक जारी रही! सबसे बड़ी बात ये थी कि उस समय लागू फ्लैग कोड के अनुसार कपड़ों पर तिरंगा लगाने पर प्रतिबंध था। टीवी एंकर मंदिरा बेदी के, वर्ल्ड कप के दौरान तिरंगा डिजाइन वाली साड़ी पहनने पर भी बड़ा हंगामा हुआ था। इस स्टोरी की विस्तार से चर्चा अलग से करेंगे। आखिरकार फरवरी 2005 में, इंडियन फ्लैग कोड के तहत, सरकार ने एक आदेश जारी कर दिया जिसमें बीसीसीआई और उनसे जुड़े हर किसी पर, कपड़ों पर ध्वज का उपयोग करने का प्रतिबंध लगा दिया।