भारत में मुक्केबाजी बहुत तेजी और मजबूती से बढ़ता हुआ खेल है। पुरुष और महिला दोनों ही वर्ग में भारतीय मुक्केबाजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी दमदार मौजूदगी पिछले एक दशक में दर्ज कराई है। ओलंपिक हो या विश्व चैंपियनशिप, एशियाई खेल हों या कॉमनेवल्थ गेम्स हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय मुक्केबाजों का जलवा दिखा है। मुक्केबाजी की दुनिया में भारतीयों का जलवा दिखने वाला है, इसकी झलक हमें 16 साल पहले 17 मई 2010 को मिली थी।
भारतीय मुक्केबाजी के इतिहास में 17 मई 2010 का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। भारतीय मुक्केबाजों ने इस दिन इतिहास रचा था और कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग चैंपियनशिप के सभी छह स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे। सर्वाधिक 36 अंकों के साथ भारतीय टीम पहले स्थान पर रही थी, जबकि इंग्लैंड 34 अंक के साथ दूसरे नंबर पर रही थी। भारत के मुक्केबाजों ने अपने दमदार प्रदर्शन से दुनियाभर के प्रशंसकों को हैरान कर दिया था।
भारत में मुक्केबाजी बहुत तेजी और मजबूती से बढ़ता हुआ खेल है। पुरुष और महिला दोनों ही वर्ग में भारतीय मुक्केबाजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी दमदार मौजूदगी पिछले एक दशक में दर्ज कराई है। ओलंपिक हो या विश्व चैंपियनशिप, एशियाई खेल हों या कॉमनेवल्थ गेम्स हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय मुक्केबाजों का जलवा दिखा है। मुक्केबाजी की दुनिया में भारतीयों का जलवा दिखने वाला है, इसकी झलक हमें 16 साल पहले 17 मई 2010 को मिली थी।