पीटी उषा ने ट्रैक और फील्ड खेल की दुनिया में अपनी काबिलियत के बूते वो मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना हर एथलीट करता है। महिलाओं के बीच इस खेल को लोकप्रिय बनाने में पीटी उषा का अहम योगदान रहा। 9 साल की उम्र में स्कूल चैंपियन को हराकर शुरु हुआ सफर कई बड़ी उपलब्धियों तक पहुंचा।
पीटी उषा का जन्म 27 जून, 1964 को केरल के कोझिकोड जिले के पय्योली गांव में हुआ। उषा का बचपन गरीबी में बिता और एक समय पर उनके पास जूते खरीदने तक के पैसे नहीं हुआ करते थे। पीटी उषा को दौड़ने का शौक स्कूली दिनों से ही था। 9 साल की उम्र में उषा की काबिलियत को पहली बार पहचान मिली। स्कूल में हुई प्रतियोगिता में उषा ने हर किसी को चौंकाते हुए अपने से तीन साल बड़े स्कूल चैंपियन को हरा दिया।
उषा ने स्कूल में अपनी पढ़ाई के दौरान ही जिला स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। उषा जहां जाती वहां अपनी दौड़ने की क्षमता के कारण चर्चा का विषय बन जातीं। उषा की प्रतिभा को देखते हुए केरल सरकार ने उन्हें 250 रुपये की छात्रवृति से भी सम्मानित किया। उस दौर और गरीबी में बचपन बिताने वाली उषा के लिए वो 250 रुपये बेहद कीमती थे। इसके बाद ट्रेनिंग और पढ़ाई जारी रखने के लिए उषा ने विशेष स्कूल में अपना दाखिला करवाया।