मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद का मानना है कि त्रिशा जॉली और गायत्री गोपीचंद का बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप में जीता गया ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल भारत की अगली पीढ़ी के लिए एक बड़ा बूस्ट साबित हो सकता है। इसके साथ ही उनका कहना है कि भारत की यह युवा महिला डबल्स जोड़ी भविष्य में और भी सफलताएं हासिल करेगी।
गोपीचंद ने 'आईएएनएस' से खास बातचीत करते हुए कहा, "मुझे लगता है कि वे दोनों युवा हैं, ऐसा नहीं है कि यह उनका एकमात्र अच्छा प्रदर्शन है। वे टॉप 10 जोड़ी रही हैं। उन्होंने दो बार ऑल इंग्लैंड के सेमीफाइनल में जगह बनाई है, उनके नाम कॉमनवेल्थ मेडल और दो एशियन चैंपियनशिप के मेडल हैं। तो कुल मिलाकर, उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन वे युवा हैं, इसलिए वे अभी कुछ समय तक खेलती रहेंगी। उस नजरिए से देखें तो हां, लेकिन बड़े इकोसिस्टम की बात करें तो मुझे यकीन है कि इससे दूसरे युवा खिलाड़ियों का भी आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे भविष्य में अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे।"
वर्ल्ड चैंपियनशिप में त्रिशा और गायत्री का शानदार सफर तब खत्म हुआ जब शुक्रवार को सेमीफाइनल में उन्हें चीन की मौजूदा चैंपियन और टॉप सीड जोड़ी लियू शेंग शू और टैन निंग से 21-18, 13-21, 8-21 से हार का सामना करना पड़ा। हारने के बावजूद, भारतीय जोड़ी ने ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल जीता। यह 15 वर्षों में भारत का वर्ल्ड चैंपियनशिप के महिला डबल्स कैटेगरी में पहला मेडल रहा।इससे पहले 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था।