19 साल की उम्र में आर्चरी के खेल में रखा कदम। सात साल किया पहले मेडल का इंतजार। शेन वॉट्सन की किताब 'द विनर्स माइंडसेट' ने बदली मानसिकता। साहस और संघर्ष से भरी यह कहानी है भारत के साहिल जाधव की है, जो एशियन गेम्स 2026 में भारत की 12 सदस्यीय आर्चर टीम का हिस्सा होंगे।
साहिल ने आर्चरी के खेल में आने का फैसला 19 साल की उम्र में किया। हालांकि, शुरुआत में साहिल के हाथ लगातार निराशा लगी और उन्हें अपने नेशनल खिताब के लिए 7 साल का इंतजार करना पड़ा। हालांकि, संघर्ष से भरे वर्षों में साहिल के परिवार ने उनका भरपूरा साथ निभाया और बुरे वक्त में उनकी ढाल बनकर खड़े रहे। साई मीडिया के साथ बात करते हुए साहिल ने कहा, "मैंने 19 साल की उम्र में काफी देर से आर्चरी शुरू की। हालांकि, मेरे परिवार ने मुझे बहुत सपोर्ट किया। असल में, मेरे परिवार ने मुझसे ज्यादा त्याग किए हैं। मुश्किल भरे उन वर्षों में वे मेरे साथ खड़े रहे और हर तरह से मेरी मदद की। नेशनल लेवल पर अपना पहला मेडल जीतने में मुझे सात साल लग गए। यह सब्र और हिम्मत की परीक्षा थी क्योंकि हर साल मैं बहुत कम अंतर से चूक जाता था।"
साहिल जाधव की वर्षों की कड़ी मेहनत और लगन साल 2024 में रंग लाई। उन्होंने सीनियर नेशनल में अपने करियर का पहला मेडल गोल्ड के रूप में जीता। इसके बाद 2025 में हुए वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में व्यक्तिगत कैटेगरी में साहिल चैंपियन बने और उन्होंने टीम इवेंट में भी सिल्वर मेडल जीतकर इंटरनेशनल स्तर पर सफलता हासिल की।