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वुशू: आत्मरक्षा, फुर्ती और संतुलन का खेल, आदिमानवों ने भी किया इस कला का इस्तेमाल
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IANS News
March 16, 2026 • 18:00 PM View: 492
ASIAN GAMES: चीनी मार्शल आर्ट 'वुशू' आत्मरक्षा, फुर्ती और संतुलन का खेल है, जो शारीरिक क्षमता, अनुशासन और मानसिक एकाग्रता को बढ़ाने में मदद करता है। 'वु' का अर्थ सैन्य या मार्शल 'युद्ध' है, जबकि 'शू' का मतलब 'कला' है। वुशू उन मार्शल आर्ट अभ्यासों के लिए एक सामूहिक शब्द है जिनकी शुरुआत और विकास चीन में हुआ। यह कला चीनी मार्शल आर्ट की संस्कृति और छवि को दर्शाती है।
माना जाता है कि वुशू की जड़ें 3000-1200 ईसा पूर्व से जुड़ी हैं। उस समय आदिमानव खुद की रक्षा के लिए इस तकनीक का प्रयोग करते थे। मध्यकालीन युग में इसे 'वी यू' के रूप में जाना गया। 1626-1644 के दौरान कविताओं में वुशू शब्द का उल्लेख भी मिलता है।
साल 1928 में नानजिंग (चीन) में नेशनल मार्शल आर्ट एकेडमी की स्थापना हुई, जिसमें इस खेल को बढ़ावा मिला। इसके बाद 1950 के दशक में चीनी सरकार ने इसे एक पारंपरिक खेल के रूप में मान्यता दी। साल 1990 में इंटरनेशनल वुशू फेडरेशन (आईडब्ल्यूयूएफ) का गठन हुआ। अगले ही साल बीजिंग में पहली वर्ल्ड चैंपियनशिप आयोजित की गई।
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