गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) को लेकर उनके बचपन के कोच संजय भारद्वाज (Sanjay Bhardwaj) ने उनके बचपन को लेकर एक बड़ी चीज का खुलासा किया है। संजय ने गंभीर को लेकर कहा है कि वह नादान बच्चे थे जो मैच हारने के बाद रोया करते थे। गंभीर की बात करें तो बतौर हेड कोच उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ अपनी पहली टी20 इंटरनेशनल सीरीज जीती थी लेकिन तीन मैचों की वनडे सीरीज में उनके अंडर टीम ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है। पहला वनडे मैच टाई हो गया था जबकि दूसरे में भारत को हार का सामना करना पड़ा था। 

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भारद्वाज ने कहा कि, '12 साल का बच्चा जो हमेशा जीत की ओर अग्रसर रहता है और हार को हल्के में नहीं लेता। आज भी वह एक मासूम बच्चे की तरह हैं। उनकी कोई गलती नहीं है। वह 12 साल के बच्चे जैसा है। लोग सोचते हैं कि वह अहंकारी है, लेकिन जीतने के प्रति उनका रवैया यही है। मैं उन्हें नेट्स के बाद मैच खेलने को कहता था और वह मैच हारने के बाद रोता था। उस समय भी उन्हें हारना पसंद नहीं था। तो उनके जैसा सच्चा व्यक्तित्व वाला व्यक्ति जाहिर तौर पर गंभीर रहेगा।"

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पहला वनडे मैच टाई और दूसरा मैच हारने के बाद हेड कोच गंभीर की प्लानिंग की कई पूर्व क्रिकेटर्स और एक्सपर्ट्स ने आलोचना की थी। गंभीर की कोचिंग को लेकर भी संजय भारद्वाज नबे अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। उन्होंने कहा कि हेड कोच के रूप में गंभीर की भूमिका रवि शास्त्री और राहुल द्रविड़ जैसे अलग होगी।

भारद्वाज ने आगे कहा कि, "गौतम गंभीर तकनीकी पहलुओं के पीछे नहीं पड़ेंगे क्योंकि उस स्तर पर तकनीकी सुधार की जरूरत नहीं है। आप वहां हैं क्योंकि आप तकनीकी रूप से काफी अच्छे हैं। गंभीर जिस चीज पर काम करेंगे वह टैक्टिकल अस्पेक्ट है। गंभीर का काम उस खिलाड़ी का मनोबल बढ़ाना और उसमें आत्मविश्वास भरना होगा जो शायद खुद को लेकर आश्वस्त नहीं है।"

लेखक के बारे में

Nitesh Pratap
मैं पिछले 4 सालों से क्रिकेट में हिंदी कंटेंट राइटिंग कर रहा हूँ। मुझे क्रिकेट खेलना, देखना और उसके बारे में पढ़ना काफी पसंद है। मैं अपनी क्रिकेटिंग राइटिंग स्किल्स को बेहतर करने के लिए पिछले कुछ महीनों से cricketnmore के साथ जुड़ा हुआ है। यहाँ मुझे क्रिकेट की बारीकियों के बारे में काफी जानने और सीखने को मिल रहा है। Read More
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