FIFA World Cup: इंग्लैंड के पूर्व फुटबॉलर और कमेंटेटर पॉल मेसफील्ड अपने देश के बजाय पुर्तगाल को फीफा विश्व कप 2026 जीतने का प्रबल दावेदार मानते हैं। वीडियो असिस्टेंट रेफरी (वीएआर) को लेकर मेसफील्ड मानते हैं कि भले ही तकनीक कुछ हद तक मदद कर रही है, लेकिन रेफरी का अपना फैसला भी अहम होना चाहिए।

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पॉल मेसफील्ड को लगता है कि इस साल पुर्तगाल फीफा ट्रॉफी अपने नाम कर सकता है। 'जी5' पर फीफा वर्ल्ड कप 2026 मीडिया पैनल के एक्सपर्ट पॉल मेसफील्ड ने 'आईएएनएस' के साथ एक खास बातचीत में कहा, "मैं हर खिलाड़ी और हर टीम को देखता हूं। मैं ग्रुप्स को भी देखता हूं। मैं सब कुछ देखता हूं और हो सकता है कि कुछ लोगों को हैरानी हो, लेकिन मुझे लगता है कि पुर्तगाल जीतेगा। मैं आपको अभी बता रहा हूं, खिलाड़ी वही करेंगे जो अर्जेंटीना की टीम ने पिछले टूर्नामेंट में मेसी के लिए किया था, क्योंकि मेसी ने कभी कप नहीं जीता था और टीम उनके साथ एकजुट हो गई थी। फाइनल में उनका प्रदर्शन शानदार रहा था। उन्होंने मेसी को वर्ल्ड कप दिया, जो उनके लिए एक विदाई का तोहफा माना जा रहा था। मेसी अभी भी एक और कप के लिए यहां हैं। यह निश्चित रूप से उनके लिए आखिरी मौका है। यह निश्चित रूप से रोनाल्डो के लिए भी आखिरी मौका है। मुझे लगता है कि उनके पास जो टीम है, वे रोनाल्डो के साथ एकजुट हो सकते हैं और टूर्नामेंट में बहुत आगे तक जा सकते हैं।"

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इंग्लैंड ने साल 1966 में अपना इकलौता फीफा वर्ल्ड कप खिताब जीता था। इंग्लैंड के पूर्व फुटबॉलर इस साल अपने देश को खिताब का प्रबल दावेदार नहीं मानते। इस टीम के लिए पॉल मेसफील्ड ने कहा, "मैं चाहूंगा कि देश ऐसा करे। मुझे लगता है कि थॉमस ट्यूशेल ने हालात बदल दिए हैं, उन्होंने कुछ खास हुनर ​​वाले खिलाड़ियों के बजाय एक पूरी टीम तैयार की है। इससे मदद मिल सकती है। क्या वे वर्ल्ड कप जीतेंगे? मुझे व्यक्तिगत रूप से नहीं लगता कि यह इंग्लैंड का समय है। मुझे नहीं लगता कि वे इस साल ऐसा कर पाएंगे। जाहिर है, मैं चाहूंगा कि वे टूर्नामेंट के आखिरी चरणों तक पहुंचें, लेकिन मेरे हिसाब से पुर्तगाल और फ्रांस जैसी टीमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।"

मुकाबले के दौरान विवाद कम करने के लिए वीएआर लाया गया था, फिर भी यह इस वर्ल्ड कप में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है। इसे लेकर पॉल मेसफील्ड ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि वीडियो असिस्टेंट रेफरी (वीएआर) का इस्तेमाल उतनी बार किया गया है, जितना हमने दुनिया भर की दूसरी लीग में देखा है। मुझे लगता है कि वहां वीएआर लोगों के लिए एक तरह से रोक लगाने वाली चीज ज्यादा है।" मुझे लगता है कि हम खिलाड़ियों का ऐसा व्यवहार देख रहे हैं, जिससे वे वीएआर के दखल से बचना चाहते हैं।"

उन्होंने कहा, "अगर बड़े फैसलों की बात करें तो, मुझे नहीं लगता कि इस वर्ल्ड कप में अब तक कोई बहुत बड़ा वीएआर फैसला लिया गया है। छोटे-मोटे फैसले तो हुए हैं, लेकिन ऐसा कोई बड़ा मामला नहीं आया जिसमें दो-तीन मिनट तक खेल रुका हो, जैसा कि हम प्रीमियर लीग में हर हफ्ते देखते हैं जब फैसलों पर चर्चा होती है। मुझे लगता है कि तकनीक कुछ हद तक मदद कर रही है, लेकिन रेफरी का अपना फैसला भी अहम होना चाहिए; आखिरकार, उन्हें ही यह तय करना होता है कि वे अपना फैसला बदलें या उस पर कायम रहें। मैं व्यक्तिगत रूप से चाहता हूं कि रेफरी खुद थोड़े और मजबूत बनें और अपने फैसलों पर अडिग रहें।"

इस विश्व कप में रिकॉर्ड 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं। मेसफील्ड मल्टी-नेशन मॉडल को ही भविष्य मानते हैं। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि मल्टी-नेशन मॉडल ही भविष्य है। बहुत सारे मैच हो रहे हैं, लेकिन फीफा सभी को शामिल करने की कोशिश कर रहा है। मुझे लगता है कि यह बहुत जरूरी है, खासकर अफ्रीका और एशियाई देशों को ज्यादा जगह देकर। फीफा दुनियाभर से ज्यादा हुनर और काबिलियत को शामिल करने की कोशिश कर रहा है। मुझे लगता है कि कुछ समय तक यह 48 टीमों वाला फॉर्मेट ही चलेगा। इससे कमजोर या छोटी टीमों को भी क्वालीफाई करने का मौका मिलता है। हमने कुराकाओ और केप वर्डे के साथ दो अलग-अलग मुकाबलों में देखा कि क्या हो सकता है। कुछ दिन पहले केप वर्डे का प्रदर्शन जबरदस्त था। यह साल 2002 के ओपनिंग मैच में सेनेगल के फ्रांस को हराने के बाद से सबसे बड़े उलटफेरों में से एक बन गया है। वर्ल्ड कप यही तो करता है। यह पूरी दुनिया को एक साथ लाता है और जोड़ता है।"

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उन्होंने कहा, "अगर बड़े फैसलों की बात करें तो, मुझे नहीं लगता कि इस वर्ल्ड कप में अब तक कोई बहुत बड़ा वीएआर फैसला लिया गया है। छोटे-मोटे फैसले तो हुए हैं, लेकिन ऐसा कोई बड़ा मामला नहीं आया जिसमें दो-तीन मिनट तक खेल रुका हो, जैसा कि हम प्रीमियर लीग में हर हफ्ते देखते हैं जब फैसलों पर चर्चा होती है। मुझे लगता है कि तकनीक कुछ हद तक मदद कर रही है, लेकिन रेफरी का अपना फैसला भी अहम होना चाहिए; आखिरकार, उन्हें ही यह तय करना होता है कि वे अपना फैसला बदलें या उस पर कायम रहें। मैं व्यक्तिगत रूप से चाहता हूं कि रेफरी खुद थोड़े और मजबूत बनें और अपने फैसलों पर अडिग रहें।"

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उन्होंने कहा, "यूरोप अभी जो करने की कोशिश कर रहा है और जिस बारे में बात हो रही है, वह यह है कि वे छोटी टीमों के लिए एक प्री-क्वालिफाइंग प्रतियोगिता कराएंगे, जिससे बोझ कम होगा। इससे वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई करने की कोशिश कर रहे खिलाड़ियों पर बोझ कम होगा। तो कुल मिलाकर, यह सब फीफा की उस रणनीति का हिस्सा है कि वे क्या करना चाहते हैं और आगे चलकर सभी को कैसे शामिल करना चाहते हैं।"

Article Source: IANS

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