T20 World Cup: संजू सैमसन की प्रतिभा और क्षमता पर कभी सवाल नहीं था, लेकिन अपनी क्षमता को निरंतरता के साथ प्रदर्शित न कर पाना उनकी सबसे बड़ी कमजोरी के रूप में उभरी थी। अपनी इस कमी को संजू ने टी20 क्रिकेट के महाकुंभ टी20 विश्व कप 2026 में दूर किया है और लगातार मैचों में विस्फोटक पारियां खेलते हुए भारत को फाइनल का टिकट दिलाया है।
सैमसन की पिछली मैचों में खेली गई पारियों ने उनके बारे में क्रिकेट आलोचकों की तमाम धारणाएं बदल ही हैं। अपने इस करिश्माई प्रदर्शन के लिए संजू ने खेल के साथ ही अपने दिमाग पर भी काम किया है। इंग्लैंड के खिलाफ मैच के बाद आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा, "टूर्नामेंट से पहले का समय उनके लिए आसान नहीं था। टीम में जगह न मिलना मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण रहा। न्यूजीलैंड सीरीज के दौरान वह टीम में अपनी जगह पक्की करने के लिए काफी कोशिश कर रहे थे और शायद इसी वजह से वह थोड़ा ज्यादा दबाव में खेल रहे थे।"
उन्होंने कहा, "पीछे मुड़कर देखने पर महसूस हुआ कि उन्हें खेल को थोड़ा शांत दिमाग से लेना चाहिए था। टी20 क्रिकेट भले ही तेज और आक्रामक फॉर्मेट है, लेकिन इसमें भी धैर्य और बेसिक्स का उतना ही महत्व है। दुनिया के कई बड़े बल्लेबाज भी इस फॉर्मेट में लगातार रन बनाने के लिए संघर्ष करते हैं, इसलिए खेल के मूल सिद्धांतों का सम्मान करना जरूरी है।"
सैमसन ने कहा, "मैंने खेल की बुनियादी बातों पर फिर से काम किया और खुद को बेहतर तरीके से तैयार किया। इसी बदलाव की वजह से टूर्नामेंट में अब तक सफलता मिली है।"
विकेटकीपर बल्लेबाज ने कहा, "मुझे लगता है कि जब मुश्किल समय आ रहा था, तो मेरे करीबी लोग, जिन लोगों से मैं प्यार करता हूं, जिन्हें मैं सपोर्ट करता हूं, वे मेरे साथ थे। मैंने अपना फोन बंद कर दिया, सोशल मीडिया पर नहीं था, अभी भी नहीं हूं, इसलिए कम लोग मुझसे इंटरैक्ट कर रहे थे। मुझे लगता है कि इससे मुझे सही दिशा में फोकस करने में सच में मदद मिली और मैं बहुत खुश हूं कि मैं जैसा कर रहा हूं।"
सैमसन ने कहा, "मैंने खेल की बुनियादी बातों पर फिर से काम किया और खुद को बेहतर तरीके से तैयार किया। इसी बदलाव की वजह से टूर्नामेंट में अब तक सफलता मिली है।"
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न्यूजीलैंड के खिलाफ 8 मार्च को होने वाले टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल में भी सैमसन के प्रदर्शन पर नजर रहेगी।