नीदरलैंड की महिला क्रिकेट टीम के लिए टी20 वर्ल्ड कप 2026 तक का सफर किसी साधारण खेल कहानी से कहीं आगे का है। यह सफर संघर्ष, धैर्य, सीमित संसाधनों और लगातार खुद को साबित करने की कहानी है। नीदरलैंड महिला क्रिकेट टीम की कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज बैबेट डी लीडे का इसमें अहम योगदान रहा है। उनका कहना है कि अब सिर्फ ऊपर ही जाना है।

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नीदरलैंड ने ग्लोबल क्वालीफायर के माध्यम से वर्ल्ड कप में जगह बनाई। नेपाल के कीर्तिपुर में खेले गए निर्णायक मैच में अमेरिका के खिलाफ 129 रन का पीछा करते हुए बारिश ने खेल को बाधित कर दिया। 12 ओवर में 90/2 के स्कोर पर पहुंच चुकी नीदरलैंड डकवर्थ-लुईस-स्टर्न (डीएलएस) नियम के तहत आगे थी और जीत की ओर बढ़ रही थी। बारिश के चलते मैच रुक गया और अंततः नीदरलैंड को विजेता घोषित किया गया। इस जीत ने नीदरलैंड को पहली बार टी20 विश्व कप में जगह दिलायी।

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बैबेट ने उस क्षण को याद करते हुए आईएएनएस से कहा, "वो अनुभव अविश्वसनीय और भावनात्मक था। यह जीत वर्षों की मेहनत का परिणाम थी, जिसमें टीम ने लगातार सुधार किया और हर चुनौती का सामना किया।"

उन्होंने कहा, "नीदरलैंड महिला क्रिकेट टीम का सफर आसान नहीं रहा है। एक समय ऐसा था जब टीम लगातार वैश्विक क्वालीफायर्स में संघर्ष कर रही थी और बड़े मंच पर जीत हासिल करना दूर की बात थी। देश में महिला क्रिकेट को वह पहचान नहीं मिली थी, जो फुटबॉल या अन्य खेलों को मिलती है। कई लोग तो क्रिकेट को ही ठीक से नहीं समझते थे और इसे किसी अन्य खेल से जोड़ देते थे।"

बैबेट ने कहा, "समय के साथ बदलाव आया। 2020 में टीम को पहला फुल-टाइम कोच मिला, जिसने उनके खेल की दिशा बदल दी। इससे पहले खिलाड़ी पढ़ाई, नौकरी और क्रिकेट के बीच संतुलन बनाकर खेलती थीं। नियमित प्रशिक्षण की कमी टीम की सबसे बड़ी चुनौती थी। धीरे-धीरे सुधार दिखने लगा। 2024 के ग्लोबल क्वालीफायर में टीम छठे स्थान पर रही। हालांकि, वे वर्ल्ड कप में सीधे जगह नहीं बना पाईं, लेकिन उन्होंने यह समझ लिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए क्या जरूरी है। इसी दौरान आईसीसी ने वर्ल्ड कप में टीमों की संख्या बढ़ाकर 10 से 12 कर दी, जिससे उनके लिए दरवाजे खुले।"

उन्होंने कहा, "नेपाल में खेले गए क्वालीफायर में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और सभी पांच ग्रुप मैच जीतकर इतिहास रच दिया। अमेरिका के खिलाफ बारिश से मिली जीत ने हमारे सपने को वास्तविकता में बदल दिया। जश्न का माहौल बेहद भावुक था, खिलाड़ी भीगते हुए रेन कवर पर फिसलकर खुशी मना रही थीं। यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि वर्षों के संघर्ष का परिणाम था।"

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बैबेट डी लीडे की क्रिकेट यात्रा भी उतनी ही प्रेरणादायक है। उन्होंने 16 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलना शुरू किया और धीरे-धीरे टीम की अहम खिलाड़ी बन गईं। उनकी कप्तानी में टीम ने रणनीतिक रूप से बेहतर प्रदर्शन करना सीखा। बैबेट इकोनॉमेट्रिक्स की छात्रा हैं। उनका विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण मैदान पर उनकी कप्तानी में झलकता है। वे आंकड़ों और रणनीति पर गहरी पकड़ रखती हैं। विरोधी बल्लेबाजों के स्ट्राइक जोन, गेंदबाजों के पैटर्न और मैच की परिस्थितियों का अध्ययन उनकी तैयारी का अहम हिस्सा है। उनकी यह डेटा-ड्रिवन सोच टीम के लिए एक नया आयाम जोड़ती है।

नीदरलैंड की कप्तान ने कहा, "हमारी टीम की खासियत यह है कि अधिकतर खिलाड़ी पूर्णकालिक पेशेवर नहीं हैं। कई खिलाड़ी डॉक्टर, छात्र, शोधकर्ता और तकनीकी क्षेत्र में काम करती हैं। एक खिलाड़ी मेडिकल फील्ड में काम करती हैं, तो दूसरी क्रिमिनोलॉजी की पढ़ाई के साथ खेलती हैं। यह संतुलन उन्हें और भी विशेष बनाता है।"

उन्होंने कहा, "टीम के भीतर संसाधनों की कमी और सीमित अनुभव के बावजूद खिलाड़ियों का जज्बा मजबूत है। वे ऑस्ट्रेलिया, भारत, दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसी दिग्गज टीमों के साथ खेलने के लिए तैयार हैं। यह हमारे लिए एक चुनौती और अवसर दोनों है। अनजान परिस्थितियां कभी-कभी फायदा भी देती हैं, क्योंकि विरोधी टीम उनके खेल को पूरी तरह नहीं समझती।"

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नीदरलैंड्स की कप्तान का मानना है कि उनका लक्ष्य सिर्फ भाग लेना नहीं है, बल्कि बड़े उलटफेर करना है। वे कम से कम दो मैच जीतकर टॉप-आठ में जगह बनाना चाहती हैं, जिससे 2028 वर्ल्ड कप के लिए सीधा क्वालिफिकेशन मिल सके।

बैबेट डी लीडे ने कहा कि पूर्व इंग्लिश क्रिकेटर सारा टेलर उनकी प्रेरणा हैं। उनकी इच्छा है कि वे उनसे मिलें और उनके अनुभव से सीखें।

नीदरलैंड में क्रिकेट धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रहा है, खासकर महिला टीम के प्रदर्शन के बाद। अब खिलाड़ियों को पहले से ज्यादा पहचान मिल रही है और युवा लड़कियां इस खेल की ओर आकर्षित हो रही हैं।

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कप्तान ने कहा, "इंग्लैंड की परिस्थितियों को देखते हुए टीम खुद को तैयार मानती है, क्योंकि नीदरलैंड्स का मौसम भी काफी अनिश्चित और चुनौतीपूर्ण होता है। बारिश, हवा और सीम मूवमेंट जैसी स्थितियां उन्हें परिचित लगती हैं।"

बैबेट मानती हैं कि यह वर्ल्ड कप सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं है, बल्कि एक अवसर है दुनिया को यह दिखाने का कि नीदरलैंड की टीम भी किसी से कम नहीं। उनका लक्ष्य है कि टीम अपना सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खेले और भविष्य में महिला क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक ले जाए।

कप्तान ने कहा, "इंग्लैंड की परिस्थितियों को देखते हुए टीम खुद को तैयार मानती है, क्योंकि नीदरलैंड्स का मौसम भी काफी अनिश्चित और चुनौतीपूर्ण होता है। बारिश, हवा और सीम मूवमेंट जैसी स्थितियां उन्हें परिचित लगती हैं।"

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नीदरलैंड ग्रुप ए का हिस्सा है। इस ग्रुप में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका है।

Article Source: IANS

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