फुटबॉल वर्ल्ड कप, जिसे ओलंपिक के बाद सबसे बड़ा खेल मेला कहते हैं, शुरू होने में अब बस कुछ ही दिन बचे हैं। भारत में फुटबॉल के दीवानों को चिंता ये है कि अभी तक इस इवेंट का लाइव ब्रॉडकास्ट पक्का नहीं हुआ तो क्या वे मैच लाइव देख पाएंगे? वजह? कोई भी चैनल ऑफिशियल ब्रॉडकास्ट पार्टनर बनने के अधिकार खरीद ही नहीं रहा।
सीधा इल्जाम क्रिकेट पर है और आरोप है कि क्रिकेट, चाहे इंटरनेशनल हो या आईपीएल, फुटबॉल वर्ल्ड कप पर भी भारी पड़ रहा है। इसलिए फुटबॉल वर्ल्ड कप की जो धूम पहले दिखती थी, अब नहीं है।
वह भी तब जबकि वर्ल्ड कप 2026 तो और भी खास है क्योंकि तीन मेजबान: यूनाइटेड स्टेट्स, कनाडा और मेक्सिको, और पहली बार 48 टीम खेल रही हैं। फीफा ने अगले दो वर्ल्ड कप के ब्रॉडकास्ट अधिकार भारत के बाजार में बेचने का सिलसिला पिछले साल ही शुरू कर दिया था और कीमत मांगी 100 मिलियन डॉलर (लगभग 953 करोड़ रुपये) जो धीरे-धीरे घटा कर अब 35 मिलियन डॉलर (लगभग 334 करोड़ रुपये) कर दी है, तब भी, अभी तक इन्हें लेने वाला कोई नहीं मिला है।
फुटबॉल वर्ल्ड कप, भारत में फुटबॉल फैंस के लिए बहुत बड़ा आकर्षण है और हर चार साल में रात-दिन एक कर, इसे देखते हैं। बहरहाल हाल के सालों में खेलों को देखने के तरीके और रुझान में बड़ा बदलाव आया है। क्रिकेट का हिस्सा बढ़ा और दूसरे खेलों का हिस्सा कम हो गया। ब्रॉडकास्ट और विज्ञापन बजट का एक बड़ा हिस्सा तो क्रिकेट में ही खर्च हो जाता है और इसका असर फुटबॉल वर्ल्ड कप पर भी पड़ा है। पिछले कुछ सालों में भारत में फुटबॉल देखने वालों की गिनती लगातार कम हो रही है।
हाल के सालों में भारत में फीफा वर्ल्ड कप के ब्रॉडकास्ट अधिकार का सफर बड़ा दिलचस्प रहा है:
1998: दूरदर्शन ने अधिकार खरीदे, सभी मैचों का लाइव ब्रॉडकास्ट किया और उस समय 3.50 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया।
2002: टेन स्पोर्ट्स ने अधिकार खरीदे लेकिन दूरदर्शन ने उन्हें सरकारी पॉलिसी की शर्तों के जाल में उलझा लिया। आखिर में वे मजबूरी में अधिकार B4U को बेच गए। दूरदर्शन ने उनके सामने भी वही दिक्कतें खड़ी कर दीं और आखिरकार, B4U ने मजबूरी में कुछ खास मैचों के ब्रॉडकास्ट के लिए दूरदर्शन के साथ पार्टनरशिप की।
2006: ESPN स्टार ने अधिकार खरीदे।
2010: भारत में फुटबॉल की लोकप्रियता एकदम बढ़ी और ESPN स्टार ने 40 मिलियन डॉलर से ज़्यादा की डील में अधिकार हासिल किए।
2014 और 2018: सोनी स्पोर्ट्स ने फीफा वर्ल्ड कप 2014, 2018 और यूरो 2016 के कमर्शियल अधिकार लगभग 90 मिलियन डॉलर (आज के हिसाब से लगभग 856 करोड़ रुपये) में खरीदे। तब वे एक नया चैनल सोनी सिक्स लाए थे और नए उभरते भारतीय बाजार के लिए इस चैनल पर, उन्होंने ये पैसा इन्वेस्टमेंट कर दिया।
2022: रिलायंस ने 60 मिलियन डॉलर (आज के हिसाब से लगभग 571 करोड़ रुपये) में अधिकार खरीदे। उनकी पॉलिसी बड़ी दिलचस्प थी। इस इवेंट को भारत में 16.87 करोड़ दर्शकों ने देखा (जबकि चीन में ये गिनती 1.03 अरब थी) और मजे की बात ये कि टीवी पर मैच मुफ्त दिखाए जबकि स्पोर्ट्स 18HD पर इसे सिर्फ़ 12 रुपये में स्ट्रीम किया। जियो स्टार को इससे कई करोड़ रुपये का नुकसान हुआ लेकिन वे तो ब्रॉडकास्ट बाजार में अपनी धमाकेदार एंट्री के लिए ये इन्वेस्टमेंट कर रहे थे। वे सही साबित हुए।
बाजार के जानकारों को लगता है कि दुनिया के इस हिस्से में फुटबॉल वर्ल्ड कप का ब्रॉडकास्ट अब फायदे का सौदा नहीं रहा। आज स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्ट, एक भावना नहीं, सिर्फ व्यापार है। इसलिए ही तो स्पोर्ट्स, गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स से जुड़ी डेंटसु इंडिया ने भी जापान के वर्ल्ड कप 2026 ब्रॉडकास्ट अधिकार खरीदे, भारत के लिए नहीं।
सबसे ख़ास मैच मुद्दा खेलने के समय का है। भारतीय फुटबॉल प्रेमियों के नजरिए से देखें तो ज़्यादातर मैच आधी रात से अगली सुबह के बीच शुरू होंगे जिससे पिछले वर्ल्ड कप की तुलना में विज्ञापन और टेलीविज़न से कमाई कम रहेगी। इस बार, 104 में से सिर्फ़ 14 मैच आधी रात से पहले शुरू होंगे जबकि कतर 2022 में 64 में से 44 और रशिया 2018 में 63 मैच आधी रात से पहले शुरू हुए थे।
फुटबॉल ब्रॉडकास्ट में विज्ञापन दिखाने के लिए समय का कम होना भी एक खास वजह है मुनाफा न होने की। क्रिकेट मैच में हर ओवर, हर विकेट के बाद एड टाइम मिल जाता है और इसी तरह टेनिस में हर सेट के बाद समय मिल जाता है। फुटबॉल में, मैच से पहले, हाफ टाइम और फुल-टाइम पर ही एड स्लॉट मिलते हैं। खेल बार-बार नहीं रुकता।
खबर ये है कि कुछ ब्रॉडकास्टर 15-20 मिलियन डॉलर की कीमत इन अधिकार के लिए देने को तैयार हैं। साथ में 2030 फुटबॉल वर्ल्ड कप को भी दे दें तो ये कीमत थोड़ी बढ़ सकती है।
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पहला मैच 11 जून को होना है और उम्मीद है कि किक-ऑफ भारत में स्क्रीन पर देखा जाएगा।