वेस्टइंडीज के सबसे महान क्रिकेटर में से एक सर गारफील्ड सोबर्स का निधन हो गया है। इन दिनों मीडिया में आम तौर पर फोकस उनकी शानदार क्रिकेट उपलब्धियों के जिक्र पर रहा पर सोबर्स के व्यक्तित्व का एक और पहलू भी है, जो उनके करिश्मा, आकर्षक व्यक्तित्व और क्रिकेट के बाहर भी चर्चा में रहने की खूबी से जुड़ा है।  

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सोबर्स भारत में दो टेस्ट सीरीज खेले जिनमें से 1966-67 सीरीज में कप्तान थे। इसी 1966 टूर के दौरान उनकी लोकप्रियता खूब बढ़ी। उन दिनों, बॉलीवुड से जुड़ना किसी सेलिब्रिटी दर्जे से कम नहीं था और सोबर्स ने तो भारत आने के कुछ ही हफ्तों में यह सब हासिल कर लिया।  

इसमें सबसे चर्चित स्टोरी उनके मॉडल और फिल्म स्टार अंजू महेंद्रू के साथ थोड़े दिन चले उस रोमांस की है, जो फटाफट सगाई में भी बदल गया था। ये किसी इंटरनेशनल क्रिकेटर और बॉलीवुड के बीच नाता जुड़ने के शुरु के सबसे हाई-प्रोफाइल किस्सों में से एक है। जहां एक तरफ सोबर्स एक ग्लोबल क्रिकेट स्टार थे, वहीं अंजू, बंबई की सबसे ग्लैमरस युवा मॉडल में से एक थीं और फिल्मों में अपनी जगह बना रही थीं।  

इस टूर के दौरान की एक पार्टी में सोबर्स की मुलाकात हुई थी अंजू से। वह तब लगभग 20 साल की, खुद पर विश्वास, आधुनिक सोच और मॉडलिंग की दुनिया में एक ख़ास पहचान वाली लड़की थीं। सोबर्स इस चार्म और खूबसूरती के आकर्षण की ओर खिंचे चले गए। दोनों बहुत जल्दी एक-दूसरे के करीब आ गए।  

इसके बाद जो हुआ वह लगभग वैसा ही था जैसा वैभव सूर्यवंशी की किसी टी20 पारी में होता है। कुछ ही मुलाकात के बाद, एक शाम सोबर्स ने अंजू को प्रपोज़ भी कर दिया और वे मान भी गईं। कहते हैं तब वह भी सोबर्स की पर्सनैलिटी, मशहूरी और मिलनसार मिजाज से बड़ी प्रभावित थीं। ये तो बाद में सोचा कि ये सगाई एक जल्दबाजी में लिया फैसला था जिसमें किसी ने भी न सोचा कि आगे कैसे बढ़ेंगे। सगाई की फोटो दुनिया भर के मीडिया में छपी।    

तो फिर दोनों ने आपस में शादी क्यों नहीं की?  यहीं इस किस्से में राजेश खन्ना नाम के कैरेक्टर की एंट्री होती है। असल में अंजू तो इस सब से बहुत पहले से राजेश की दोस्त थीं लेकिन उन दोनों दोनों का रिश्ता उन दिनों तनाव के दौर से गुजर रहा था। बाद में एक इंटरव्यू में, अंजू ने माना भी कि राजेश खन्ना से दूर होने के उस दौर में वह सोबर्स के करीब आ गई थीं। संयोग से जब उनके और राजेश खन्ना के बीच सुलह हो गई, तो आनन-फानन में अंजू ने राजेश खन्ना के घर से सोबर्स को फोन किया और सगाई तोड़ दी।  

राजेश खन्ना तब बॉलीवुड के सबसे बड़े और लाखों के दिल की धड़कन बन रहे स्टार के तौर पर सामने आ रहे थे। जैसे ही अंजू की ज़िंदगी में उनकी एक और एंट्री हुई तो इस ने सोबर्स वाले चेप्टर को बंद कर दिया। वैसे भी, सोबर्स-अंजू रिश्ते में कई चुनौती थीं जैसे कि सोबर्स क्रिकेट खेलने अक्सर टूर पर रहते थे वहीं अंजू बंबई में अपना करियर बना रही थीं और भारत छोड़ने के मूड में नहीं थीं। 1960 के दशक में, एक-दूसरे से दूरी वाला इंटरनेशनल रिश्ता निभाना आसान नहीं था।  

इसका साफ़ मतलब है कि सोबर्स के प्रपोज़ल को मानने का फैसला लेने में अंजू ने जल्दबाजी दिखाई। हां, दोनों तरफ से ये तारीफ वाली बात रही कि कभी एक-दूसरे के बारे में बुरा नहीं कहा और रिश्ता बिना किसी खुले-आम तमाशे के खत्म हो गया।  बाद में, सोबर्स ने 1969 में ऑस्ट्रेलिया की प्रू किर्बी से शादी की। तब ये भी खबर थी कि शादी से पहले उन्होंने अंजू से बात की ताकि उनके बीच आपस में कोई गलतफहमी न रहे।  कुछ साल बाद सोबर्स ने इस किस्से को और एक दिलचस्प मोड़ दिया और अपनी ऑटोबायोग्राफी में लिखा कि अंजू के माता-पिता उनके साथ रिश्ते के सख्त खिलाफ थे और वे ये हजम नहीं कर पा रहे थे कि उनकी बेटी एक अश्वेत वेस्टइंडियन क्रिकेटर से रिश्ता बना रही है।  

इस तरह से, इन सभी उतार-चढ़ाव और मोड़ ने सोबर्स-अंजू के इस किस्से को किसी 'मसाला' हिंदी फ़िल्म जैसा बना दिया। इसमें एक ग्लैमरस हीरोइन, एक ग्लोबल स्पोर्ट्स सुपरस्टार, भविष्य का बॉलीवुड मेगास्टार, सगाई जो टूट गई, माता-पिता का विरोध और दुनिया भर में हर किसी की उन पर नजर, जैसा सब कुछ तो था।  

फिल्म बनाएं तो सब-प्लाट भी कुछ कम मजेदार और नाटकीय नहीं था। अंजू महेंद्रू और राजेश खन्ना तो एक-दूसरे को राजेश खन्ना के थिएटर में काम करने के दिनों से जानते थे। तब वे जतिन खन्ना थे, राजेश खन्ना मशहूर सुपरस्टार नहीं जो वे बाद में बने। उन दोनों के आपसी कई सालों के रिश्ते के बारे में यासिर उस्मान की किताब 'राजेश खन्ना: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ इंडियाज फर्स्ट सुपरस्टार' में बड़े विस्तार से लिखा गया है।  

आखिर में राजेश खन्ना ने 1973 में डिंपल कपाड़िया से शादी की। एक बड़ा मजेदार किस्सा ये है कि जब राजेश खन्ना की बारात चली तो उन्होंने जानबूझकर अपनी बारात का रास्ता बदल दिया और उसे अंजू के घर के सामने से निकाला ताकि इशारा समझ लें कि पिछली बातें खत्म।  

खुद अंजू ने 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' को दिए एक इंटरव्यू में बड़ा साफ-साफ कहा. 'सच ये कि तब मैं और काका एक दूसरे के करीब थे। उन्हीं दिनों किसी बात पर आपस में अनबन हो गई और इधर मेरा गैरी के साथ अफेयर हो गया। ऐसा नहीं है कि मुझे गैरी सोबर्स पसंद नहीं थे। मुझे नहीं मालूम कि अगर राजेश खन्ना मेरी ज़िंदगी में वापस न लौटे होते तो क्या होता?'  

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तो ये साफ़ है कि इस लव-ट्रायंगल में अंजू की ज़िंदगी में सोबर्स तब आए जब राजेश खन्ना के साथ उनका रिश्ता उतार-चढ़ाव के दौर से गुज़र रहा था। जब वह रिश्ता फिर से सही राह पर लौट आया तो अंजू ने सोबर्स के साथ रिश्ता खत्म कर लिया। 

लेखक के बारे में

Charanpal Singh Sobti
Charanpal Singh Sobti is a veteran cricket writer with more than five decades of experience covering the game. At Cricketnmore, he brings his extensive knowledge, unique perspective and deep understanding of cricket to readers through insightful news, analysis, historical pieces and fascinating stories from the world of cricket. Read More
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