इमरान खान के नाम क्रिकेट के कई रिकॉर्ड हैं लेकिन स्टैटिस्टिशियन उनके एक नए रिकॉर्ड को नोट करने से चूक गए। बदकिस्मती से जुड़ा उनका नया रिकॉर्ड ये है कि वह 1000 से भी ज़्यादा दिन से जेल में हैं।

Advertisement

इमरान खान की क्रिकेट में कामयाबी और उनकी लोकप्रियता सब जानते हैं। 1971 से 1992 तक 88 टेस्ट और 175 ओडीआई खेले और 1992 में पाकिस्तान की पहला वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के कप्तान थे। कई जानकार उन्हें क्रिकेट के सबसे महान ऑलराउंडर में से एक गिनते हैं और इसमें कोई शक नहीं कि वह पाकिस्तान के टॉप क्रिकेटर तो हैं ही।

Advertisement

आज स्थिति ये है कि उनकी बहन अलीमा खान, उन्हें सपोर्ट करने वालों के साथ, उस जेल के बाहर, हर हफ्ते प्रोटेस्ट करती हैं, जहां पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और पीएम बंद हैं। वह लगातार, अलग-अलग कोर्ट में, एक के बाद एक पिटीशन फाइल कर रही हैं, जिसमें उनकी गैर-कानूनी कैद और जेल में उन्हें यातना देने का जिक्र है। साथ ही साथ वे उनके और सपोर्टर से अपील भी करती हैं कि जेल के बाहर की इन प्रोटेस्ट में और बड़ी तादाद में शामिल हों ताकि सरकार पर ज़्यादा दबाव पड़े, 'आइए और इस बात पर जोर दें कि इमरान खान का किसी सही हॉस्पिटल में इलाज हो।'

इमरान खान के समर्थक और उनकी पॉलिटिकल पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ, जिस पर अब बैन लगा हुआ है, नियमित पाकिस्तानी पार्लियामेंट के बाहर भी प्रोटेस्ट कर रहे हैं।

क्रिकेट के पुराने कप्तानों के एक ग्रुप ने भी पाकिस्तान सरकार को चिट्ठी लिख, बिना देरी इमरान खान के लिए सही मेडिकल मदद की मांग की है। ये चिट्ठी पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ग्रेग चैपल ने ड्राफ्ट की और पाकिस्तान सरकार को इमरान खान के लिए मेडिकल मदद के साथ-साथ पिछले ढाई साल से भी ज़्यादा से जेल में उनकी हालत पर चिंता जाहिर करते हुए भेजी। इस पर साइन करने वालों में सुनील गावस्कर, कपिल देव, क्लाइव लॉयड, एलन बॉर्डर, ग्रेग चैपल, इयान चैपल, जॉन राइट, माइकल आथर्टन, माइकल ब्रेयरली, बेलिंडा क्लार्क, किम ह्यूज, नासेर हुसैन, स्टीव वॉ और डेविड गॉवर भी हैं।

उनके समय में खेले, ये सभी क्रिकेटर खूब जानते हैं कि इस दुनिया में क्रिकेट और पॉलिटिक्स का आपस में कोई लेना-देना नहीं है। बस पॉलिटिशियन अपनी मर्जी से, जब चाहें, क्रिकेट में पॉलिटिक्स को ले आते हैं। हालांकि, इमरान खान को इस चिट्ठी से भी कोई मदद नहीं मिली क्योंकि सरकार ने तो अभी तक इस चिट्ठी का कोई जवाब भी नहीं दिया है।

Advertisement

खबरों में लगातार पढ़ने को मिल रहा है कि इमरान खान ठीक नहीं हैं और जेल में रहते हुए उन्हें सही मेडिकल इलाज की ज़रूरत है, जो उन्हें लंबे समय से नहीं मिल रहा है। उनकी सेहत को लेकर चिंता, उनके साथ बुरा बर्ताव और जेल में कहीं से कोई मदद न मिलना, इन हालात को सब जानते हैं लेकिन इससे इमरान खान को तो कोई मदद नहीं मिल रही।

इमरान खान की बहन, पाकिस्तान सरकार के इस दावे को गलत बताती हैं कि जेल में बंद पूर्व पीएम की सेहत ठीक है। आरोप ये है कि इमरान खान ठीक से देख नहीं पा रहे और उनकी दाहिनी आंख में सिर्फ 15% ही रोशनी बची है। रिकॉर्ड के अनुसार वे मई 2023 से अलग-अलग आरोप में, जेल में हैं। पिछले कुछ महीनों में, उनकी आंखों की नजर काफी हद तक चली गई है। सरकार का कहना है कि उनकी नज़र में काफ़ी सुधार हुआ है, लेकिन कोई नहीं जानता कि यह दावा कितना सच है।

इमरान खान को जानने वालों में से या उनके परिवार से किसी ने भी उन्हें जेल में नहीं देखा है, कोई उनके सेल में नहीं गया है ताकि ये मालूम हो सके कि पूर्व पीएम के तौर पर उन्हें क्या सुविधाएं वहां दी जा रही हैं। इस बारे में, एक बड़ी हैरानी की बात और हुई। जिस तरफ से किसी मदद या सहानुभूति की उम्मीद कोई कर ही नहीं रहा था, वहां से इस तरफ़ बड़ी दिलचस्पी दिखाई जा रही है। ये हैं, उनकी पूर्व पत्नी जेमिमा खान (जो पहले जेमिमा गोल्डस्मिथ थीं) और जेमिमा ने इमरान खान के, यूके के सिटीजन बेटों, कासिम, 26 और सुलेमान खान, 29 को उनसे मिलने के लिए पाकिस्तान जाने से नहीं रोका है।

Advertisement

कासिम और सुलेमान को पाकिस्तान जाने के लिए वीजा चाहिए। पिछले कुछ महीनों से दोनों पाकिस्तान जाने के लिए वीजा पाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ऑफिशियल सिस्टम ने तो उनकी एप्लीकेशन पर कोई एक्शन ही नहीं लिया है। इसे मंज़ूर कर न तो वीजा दिया है और न ही इनकार किया है। इमरान की बहन भी पाकिस्तान में उनके एप्लीकेशन को मंजूर कराने की कोशिशें कर रही हैं लेकिन अभी तक तो इसका भी कोई फायदा नजर नहीं आया है।

जेमिमा ने ट्वीट किया: मेरे बेटों सुलेमान और @kasim_khan_1999 ने जनवरी में (फिर से…) वीजा के लिए अप्लाई किया था ताकि वे पाकिस्तान में अपने पिता @ImranKhanPTI से मिल सकें। पाकिस्तानी कॉन्सुलेट का कहना है कि ऑनलाइन वीजा अप्लाई करें तो आम तौर पर 7-10 दिन में इस पर एक्शन ले लेते हैं। अब तो 60 दिन हो गए हैं। यह तो तब है जब डिफेंस मिनिस्टर और होम मिनिस्टर दोनों ने पब्लिक में वादा किया था कि 4 साल बाद वहां जा रहे ये दोनों, बिना दिक्कत और सुरक्षा में अपने पिता से मिलने जा सकते हैं।’

पाकिस्तान में अधिकारियों ने तो कासिम और सुलेमान को, इमरान से फ़ोन पर बात या और किसी तरह से संपर्क की इजाज़त नहीं दी है। 2022 में जब उन्हें जान से मारने की कोशिश में गोली मारी गई थी, उसके बाद से ये दोनों उनसे मिले नहीं हैं। जेमिमा ने पाकिस्तान के मौजूदा पीएम से भी सीधे अपील की कि प्लीज, इमरान खान के दोनों बेटों को जल्द से जल्द अपने पिता से मिलने दें, खासकर तब जब, हर रिपोर्ट से ये पता चल रहा है कि उनकी सेहत खराब है।

Advertisement

रिकॉर्ड के मुताबिक, इमरान की पत्नी, बुशरा बीबी भी उसी जेल में 24 घंटे अकेले रहने वाली कैद में हैं। पाकिस्तान की अख़बारों में लगातार पढ़ने को मिल रहा है कि इमरान खान को टीवी, किताबें, अखबार या पढ़ने के लिए और भी कुछ नहीं दिया जा रहा है। यहां तक कि उनके वकीलों या उनकी पार्टी के लीडर को भी उनसे मिलने की इजाज़त नहीं है। जब उन्हें कोर्ट लाते हैं तो वहां कर्फ्यू जैसा माहौल होता है और मीडिया पर कोई भी पिक्चर लेने या वीडियो बनाने का बैन है।

पाकिस्तान से खबरों के अनुसार, मजे की बात यह है कि अब तक किसी भी कोर्ट ने इमरान खान को अल-कादिर ट्रस्ट केस या तोशखाना-II केस में अकेले रहने वाली कैद की सजा नहीं दी है। इसका मतलब है कि रोजाना उन्हें लगभग 22 घंटे तक, बिना किसी कानूनी मंज़ूरी, अकेले रखा जा रहा है।

इमरान को मई 2023 में जेल भेजा था। इसके बाद सितंबर में उन्हें रावलपिंडी की बदनाम अदियाला जेल भेज दिया था। इमरान जेल गए, पहले टेस्ट क्रिकेटर नहीं हैं, लेकिन इनमें से उनके अतिरिक्त और कोई भी अपने देश का पीएम नहीं था। उनकी पॉलिटिकल पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पर पिछले आम चुनाव से पहले बैन लगा दिया था और चुनाव में हिस्सा लेने की भी इजाजत नहीं थी। उनकी पार्टी के चुनाव निशान ‘क्रिकेट बैट’ पर भी बैन लगा दिया था। कई उम्मीदवार तब भी, इमरान खान का नाम लेकर, इंडिपेंडेंट के तौर पर चुनाव लड़े और जीते भी लेकिन इससे इमरान खान को कोई मदद नहीं मिली।

Advertisement

जुलाई 2024 में, उन्हें मनमाने ढंग से हिरासत में रखे जाने पर यूएन वर्किंग ग्रुप (UN Working Group) ने राय दी कि इमरान को मनमाने ढंग से हिरासत में रखना इंटरनेशनल कानून का उल्लंघन है। दिसंबर 2025 में, जेल में उन्हें यातनाएं दिए जाने पर यूएन स्पेशल रैपोर्तोर (Rapporteur), एलिस जिल एडवर्ड्स (Alice Jill Edwards) ने पाकिस्तान सरकार से अपील की कि इमरान खान की अमानवीय और अपमानजनक हिरासत की रिपोर्ट में जो आ रहा है, उसे ठीक करने के लिए बिना देरी एक्शन लें और पक्का करें कि वे उन्हें, इंटरनेशनल क़ानून और स्टैंडर्ड के हिसाब से रख रहे हैं।

इस साल मार्च में द टाइम्स अखबार में माइक आथर्टन (इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेट कप्तान) की एक रिपोर्ट छपी। उसके अनुसार इमरान खान के बेटों कासिम और सुलेमान को, जनवरी के बाद, पहली बार अपने पिता इमरान खान से बात करने की इजाज़त मिली। कासिम और सुलेमान जानते हैं कि उनके पिता एक पॉलिटिकल कैदी हैं और उनकी तबीयत भी ठीक नहीं है, इसलिए उनके लिए, उनसे बात करना आसान नहीं था।

‘हमने पूछा कि वह फिजिकली कैसे हैं, लेकिन उन्होंने इस बात को बिल्कुल नजरअंदाज सा कर दिया और कहा, मैं ठीक हूं और बताया कि उनकी नज़र पहले से बेहतर हो रही है। ये सुनकर बड़ा अच्छा लगा। इस बार वह अपनी पत्नी को लेकर खास तौर पर परेशान थे; ज़ाहिर है कि उनकी हालत भी, उनकी तरह ही खराब है। उन्होंने बड़े आत्मविश्वास से कहा कि वे लोग उन्हें कभी नहीं तोड़ पाएंगे। उन्हें लगता है कि वह खुद, चाहे जो भी हो जाए, उसे झेल लेंगे लेकिन जब परिवार के दूसरे लोग भी शामिल हों तो मुश्किल हो जाती है,’ कासिम ने बताया।

‘उन्होंने मेडिटेशन करना और खुद को अंदर से जानना सीख लिया है। मज़े की बात यह है कि यातना सहते हुए उन्होंने अंदर की मजबूती पर टिके रहना सीख लिया है,’ कासिम ने बताया। कासिम और सुलेमान दोनों ही, अपनी लड़ाई को इसके बाद भी जारी रखे हुए हैं। कुछ दिन पहले वे जिनेवा (Geneva) गए जहां दोनों भाइयों में से खुलकर बोलने वाले कासिम ने यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स काउंसिल (United Nations Human Rights Council) के एक इवेंट में भी इस बारे में बात की।

वे अपने वीज़ा एप्लीकेशन पर भी मंजूरी चाहते हैं ताकि वे अपने पिता से मिल सकें, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। सुलेमान कहते हैं, 'उन्होंने वीजा रिजेक्ट नहीं किया है, लेकिन हमने जनवरी में अप्लाई किया था, और इसमें आम तौर पर दस दिन लगते हैं पर अब तो महीनों हो गए हैं।'

पाकिस्तान के ऑफिशियल्स का कहना है कि कासिम और सुलेमान चाहें तो अपने नेशनल आइडेंटिटी कार्ड फॉर ओवरसीज पाकिस्तानी (NICOP : National Identity Card for Overseas Pakistanis) पर ट्रैवल कर सकते हैं, लेकिन इस मुद्दे पर उनकी मां जेमिमा खान ने अपना रिएक्शन, अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया और उसमें लिखा कि 'इसका मतलब तो ये होगा कि उन्हें ब्रिटिश सिटीजन होने के नाते जो सुरक्षा मिल सकती है, वे उसके बिना वहां जाएंगे।'

कासिम और सुलेमान को ये तो नहीं मालूम कि इमरान को कब आजादी से घूमने का मौका मिलेगा, लेकिन ये यकीन जरूर है कि उनके पिता कोई सौदा नहीं करेंगे। सुलेमान कहते हैं, 'जाहिर है हम चाहते हैं कि वह रिहा हो जाए, लेकिन हाल फिलहाल हमारा फोकस ये पक्का करने पर है कि उनके साथ सही सलूक हो रहा है।'

Also Read: LIVE Cricket Score

कासिम और सुलेमान मन ही मन, ये दिमाग में बसा चुके हैं कि शायद इमरान खान को अब फिर कभी न देख पाएं। कासिम इस बात को भुला नहीं पाते कि जब वे छोटे थे तो अपने पिता से, उनके पॉलिटिक्स में होने की वजह से, नफरत करते थे। एक बार, कराची में, माफिया से जुड़े एक पॉलिटिशियन से इमरान का झगड़ा हो गया। तब भी कासिम ने उन्हें बड़ा समझाया था कि पॉलिटिक्स से बाहर निकल आएं और ये सब छोड़ दें लेकिन इमरान नहीं माने। इमरान खान के बेटे अब कहते हैं: पापा कभी कोई सौदा नहीं करेंगे, भले ही जेल में मौत आ जाए। अब 1000 दिन का रिकॉर्ड तो बन ही चुका है तो सवाल ये है कि और कितने दिन?

Advertisement

लेखक के बारे में

Charanpal Singh Sobti
Read More
ताजा क्रिकेट समाचार