India vs Japan First Ever T20I Match: अचानक ही जापान और भारत के बीच एक टी20 इंटरनेशनल की घोषणा हो गई I अगर इस मैच को मीडिया में एक ऐतिहासिक घटना लिखा जा रहा है तो गलत नहीं। सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड पर सुज़ुकी कप के लिए 22 सितंबर को खेलने वाले इस मैच का महत्व सिर्फ ये नहीं है कि भारत और जापान पहली बार क्रिकेट में आमने-सामने हो रहे हैं; इस मैच के साथ ही भारत-जापान राजनयिक संबंधों की 75वीं सालगिरह के जश्न की शुरुआत भी होगी।
ये तो तय है कि मौजूदा टी20 वर्ल्ड चैंपियन भारत के मुकाबले कागज पर जापान काफी कमजोर टीम है क्योंकि वे तो टी20 इंटरनेशनल रैंकिंग में नंबर 41 टीम हैं। खास बात ये है कि इसके बावजूद दुनिया की सबसे मजबूत क्रिकेट टीम ने, उस टीम से खेलने को मंजूरी दी जो अभी क्रिकेट के मामले में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही है। भारत के इस फैसले से वहां के खिलाड़ियों, अधिकारियों, स्पांसर और युवा फैन को ऊंचे स्तर पर इंटरनेशनल क्रिकेट देखने का मौका मिलेगा।
पहली बात तो ये कि आम सोच के उलट, जापान के लिए क्रिकेट कोई नया नहीं है। क्रिकेट वहां 19वीं सदी से खेल रहे हैं; योकोहामा में 1863 में ही क्रिकेट खेलने का रिकॉर्ड मौजूद है। जापान क्रिकेट एसोसिएशन की स्थापना 1984 में हुई और वे 1989 में आईसीसी के एफिलिएट और 2005 में एसोसिएट सदस्य बने। जापान की टीम 1996 एसीसी ट्रॉफी में खेली जो उनके लिए किसी मान्यता प्राप्त टूर्नामेंट में हिस्सा लेने का पहला मौका था।
इसके बाद जापान ने 2005 और 2007 में आईसीसी ईएपी क्रिकेट कप जीता। हाल के दिनों में और प्रगति का सबूत ये कि 2026 में, जापान ने ईएपी टी20 वर्ल्ड कप क्वालीफायर की मेजबानी की और ये वहां आयोजित हुआ अब तक का सबसे बड़ा इंटरनेशनल क्रिकेट टूर्नामेंट था जिसमें 9 टीम ने हिस्सा लिया था। इसमें जापान ने पापुआ न्यू गिनी के विरुद्ध मैच 26 रन से जीता भी जिसे आईसीसी रैंकिंग शुरू होने के बाद से उनकी सबसे अच्छी जीत कहेंगे। भारत के विरुद्ध खेलने वाली टीम इस बात का सबूत है कि अन्य कुछ टीम के मुकाबले जापान, एक मजबूत टीम बनाने के लिए, इधर-उधर से खिलाड़ी इम्पोर्ट नहीं कर रहा।
इसलिए, वास्तव में भारत, जापान को क्रिकेट से परिचित नहीं करा रहा, जापान में क्रिकेट को आगे बढ़ाने के अभियान में हिस्सा ले रहा है। भारत का वहां मैच खेलना, वहां क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ाने में वह मदद करेगा जो पारंपरिक तौर पर कर पाने में मुश्किल होती और कई साल लगते।
संयोग ये कि क्रिकेट की कुछ और दिग्गज टीम की तुलना में, भारत कहीं ज्यादा अलग-अलग टीम के विरुद्ध खेलता रहा है। जिम्बाब्वे, अफगानिस्तान और आयरलैंड सभी के विरुद्ध खेले और इन टीमों को भी इसका फायदा मिला। एशियाई खेलों और एशिया कप जैसे टूर्नामेंट में खेले तो नई पहचान बना रहे क्रिकेट देशों को आर्थिक तौर पर उसका फायदा मिला। अफगानिस्तान, जो अपने देश में इंटरनेशनल क्रिकेट की मेजबानी भी नहीं कर पा रहे, उन्हें तो भारत में क्रिकेट के लिए एक 'घर' भी मिला है।
भारत ने अब तक 19 टीम के विरुद्ध 287 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं और जल्द ही इस लिस्ट में जापान का नाम भी जुड़ जाएगा: अब तक ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध 37, दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध 36, इंग्लैंड के विरुद्ध 35, श्रीलंका के विरुद्ध 33, वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड के विरुद्ध 31-31, बांग्लादेश के विरुद्ध 18, जिम्बाब्वे और पाकिस्तान के विरुद्ध 17-17, आयरलैंड के विरुद्ध 10, अफगानिस्तान के विरुद्ध 9, नामीबिया, नीदरलैंड, यूएई और यूएसए के विरुद्ध 2-2, और हांगकांग, नेपाल, ओमान और स्कॉटलैंड के विरुद्ध 1-1 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं।
क्रिकेट का विकास सिर्फ पारंपरिक देशों तक ही सीमित नहीं रह सकता। भारत-जापान मैच इस सोच को और आगे बढ़ाएगा। अगर दुनिया का क्रिकेट में नंबर 1 देश, जापान में क्रिकेट की बेहतरी में मदद कर सकता है, तो इससे ऐसा रिश्ता बनेगा जो आगे चलकर सिर्फ एक टी20 इंटरनेशनल तक सीमित न रह, एक ऐसा व्यापारिक मंच खोल सकता है, जिसकी किसी ने उम्मीद भी न की होगी।
इस मामले में भारत का कई और दूसरे क्रिकेट देशों से अलग नजरिया रहा है। संयोग से हाल ही में इंग्लैंड पर नए क्रिकेट देशों को पूरी तरह नजरअंदाज करने और कोई मदद न देने का आरोप लगा है। ईसीबी ने तो 'यूरोपियन नेशंस कप' खेलने के प्रपोजल को भी सपोर्ट न किया और साफ कह दिया कि उनके क्रिकेट के इंटरनेशनल कैलेंडर में इसके लिए जगह बनाना बड़ा मुश्किल है। इसके उलट भारत ने अपने खिलाड़ियों के बढ़ते वर्कलोड के बावजूद ऐसे देशों को सपोर्ट किया।
मुद्दा ये है कि अगर अमीर और मजबूत क्रिकेट टीम के ज्यादातर बोर्ड, एक-दूसरे के विरुद्ध ही खेलते रहेंगे, तो क्रिकेट में अपनी पहचान बना रहे नए देश कैसे प्रगति कर बड़ी टीमों से फर्क को कम करेंगे? इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया आम तौर पर दो टीम वाली सीरीज के दायरे में, गिनी चुनी टीम के विरुद्ध ही खेले हैं जबकि इसके उलट, भारत ने दो टीम वाली सीरीज में भी, नई-नई टीम को जोड़ा है। ऑस्ट्रेलिया ने जापान को कोचिंग और वहां क्रिकेट को बढ़ाने में मदद की पर उनके विरुद्ध इंटरनेशनल खेलने का कभी प्रोग्राम नहीं बनाया।
अब भारत ने जापान में एक टी20 इंटरनेशनल खेलने का प्रोग्राम बनाया तो इसका फायदा दोनों देश को मिलेगा। बीसीसीआई और जेसीए के बीच जो रिश्ता बनेगा उसमें स्कोरबोर्ड सबसे जरूरी चीज नहीं है। भारत अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर न सिर्फ जापान, और दूसरे उभरते हुए देशों के साथ भी क्रिकेट के जरिए जुड़ सकता है। इसलिए भारत-जापान टी20 इंटरनेशनल मैच, दो टीम के बीच एक मैच से कहीं ज्यादा है।
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2036 में ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी करने की भारत की उम्मीद के संदर्भ में, यह टी20 इंटरनेशनल मैच 'स्पोर्ट 75' के प्रोजेक्ट में पहला कदम होगा। जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुए समझौते में एक खास पॉइंट ये है कि दोनों देशों के बीच खेल के रिश्तों को बढ़ावा देंगे। भारत को, 22 सितंबर का मैच, एशियाई खेलों से पहले अच्छी तैयारी का मौका भी देगा।