इंग्लैंड ने मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में भारत के विरुद्ध चौथे टेस्ट के लिए खब्बू स्पिनर लियाम डॉसन (Liam Dawson) को टीम में शामिल किया है। शोएब बशीर के बाएं हाथ की एक उंगली में फ्रैक्चर हुआ लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान जिससे टीम में जगह बन गई और सेलेक्टर्स ने 35 साल के डॉसन को उनकी जगह टीम में शामिल कर लिया। वे इंग्लैंड के लिए आखिरी टेस्ट जुलाई 2017 में दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध खेले थे। काउंटी चैंपियनशिप में लगातार अच्छा प्रदर्शन (2023 में 49 और 2024 में 54 फर्स्ट क्लास क्रिकेट विकेट उनके दो सबसे कामयाब सीजन हैं) उन्हें टीम में वापस लाए हालांकि मौजूदा इंग्लिश सीजन में 9 मैच में 21 विकेट ही लिए हैं।

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इस तरह, लियाम डॉसन 8 साल बाद इंग्लैंड के लिए फिर से टेस्ट खेल सकते हैं। वह हेंपशायर काउंटी क्लब के स्पिन ऑलराउंडर हैं। अब ये टीम मैनेजमेंट का फैसला होगा कि क्या वे फिर से टेस्ट खेलेंगे? इस समर में वे वेस्टइंडीज के विरुद्ध इंग्लैंड की लिमिटेड ओवर टीम में वापसी कर चुके हैं। वैसे डॉसन का अब टेस्ट टीम में जगह बनाना भी कोई कम ख़ास नहीं क्योंकि जैक लीच (जिनका नाम सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट वाले खिलाड़ियों में है), ऑलराउंडर रेहान अहमद और विल जैक्स की चुनौती को पार किया है। डॉसन ने 2016 और 2017 में अपने तीन टेस्ट मैच खेले लेकिन फर्स्ट क्लास क्रिकेट लगातार खेले और फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 371 विकेट उनके नाम हैं जिसमें 15 बार 5 विकेट शामिल हैं।

उनका नाम तो पिछले साल के भारत टूर के लिए भी चर्चा में था। वे बस सेलेक्टर से ये गारंटी मांग रहे थे कि टूर टीम में 'स्पिनर के तौर पर पहली पसंद' के तौर पर उनका नाम होगा। सेलेक्टर्स ने ऐसी कोई गारंटी दी नहीं और वे सिर्फ 'टूरिस्ट' के तौर पर भारत आने की जगह, सनराइजर्स ईस्टर्न केप के लिए ज्यादा पैसा देने वाली SA20 में खेलने चले गए। ये नहीं मालूम कि क्या इस बार सेलेक्टर्स ने उन्हें कोई गारंटी दी है?

डॉसन अभी तक अपने पिछले 2017 में दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध आखिरी दो टेस्ट भूले नहीं है भले ही वे उनके लिए कड़वी याद हैं। तब कप्तान रूट और उस समय के चीफ कोच ट्रेवर बेलिस ने उन्हें 'पहली पसंद के स्पिनर' के रोल का भरोसा दिलाया पर ये तो बाद में पता चला कि असल में ये एक चाल थी दूसरी टीम का मोईन की तरफ से ध्यान हटाने की। वही हुआ और मोईन लॉर्ड्स में 10 और हेडिंग्ले में 4 विकेट ले गए जबकि डॉसन ने इन दोनों टेस्ट मैचों में 5 विकेट लिए और उसके बाद उन्हें भुला दिया गया।

अब बहरहाल वे टीम में वापस आ गए हैं और प्लेइंग इलेवन में भी नाम आने की पूरी संभावना है। जुलाई 2017 में दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध नॉटिंघम में उनके आखिरी टेस्ट के बाद से इंग्लैंड ने 102 टेस्ट खेले हैं यानि कि वे लगातार 102 के लिए टीम से बाहर रहने के बाद वापसी करेंगे।

डॉसन ने दिसंबर 2016 में भारत के खिलाफ चेन्नई में टेस्ट डेब्यू किया था। ये वही टेस्ट था जिसमें करुण नायर ने भारत के लिए 300 बनाया था। संयोग से उसके बाद जल्दी ही टीम में अपनी जगह खोने के बाद, मौजूदा सीरीज में करुण नायर ने भी वापसी की है। वे 77 टेस्ट नहीं खेल पाए थे। इसलिए, 2016 में भारत और इंग्लैंड के बीच चेन्नई टेस्ट इन दो टेस्ट टीम में वापसी करने वाले खिलाड़ियों के करियर में एक ख़ास कड़ी है। अगर डॉसन वास्तव में मैनचेस्टर टेस्ट में प्लेइंग इलेवन में आए तो अपने दो टेस्ट मैचों के बीच सबसे ज्यादा टेस्ट न खेलने के रिकॉर्ड में, टॉप 10 में आ जाएंगे और 100 या उससे ज्यादा टेस्ट न खेलने के बाद वापसी करने वालों में, न खेले टेस्ट की गिनती के अनुसार नंबर 7 होंगे।

टेस्ट टीम में वापसी करने वालों से जुड़ी कुछ ख़ास बातें :

अपने दो टेस्ट के बीच, न खेले, सबसे ज्यादा टेस्ट: इंग्लैंड के गैरेथ बैटी 2005 और 2016 के बीच 142 टेस्ट में नहीं खेले और उसके बाद वापसी की। दिलचस्प बात ये कि उनकी आखिरी टेस्ट सीरीज़ में डॉसन ने डेब्यू किया था। 2016 में बांग्लादेश के विरुद्ध टेस्ट में वापसी की और संयोग से 2005 में अपना आखिरी टेस्ट भी बांग्लादेश के विरुद्ध ही खेले थे। गैरेथ बैटी वही गेंदबाज हैं, जिनकी गेंद पर ब्रायन लारा ने अपना 400वां रन बनाया था।

इंग्लैंड के लिए, उसके बाद जो सबसे ज्यादा टेस्ट न खेले: मार्टिन बिकनेल 114 टेस्ट, डेरेक शेकल्टन 103 टेस्ट और लेस जैक्सन 96 टेस्ट न खेले।

ओल्ड ट्रैफर्ड में खेले तो डॉसन क्या रिकॉर्ड बनाएंगे: इंग्लैंड के क्रिकेटरों में, टेस्ट की गिनती के अनुसार, सबसे ज्यादा टेस्ट न खेलने के बाद वापसी करने वालों में वे नंबर 4 होंगे (अन्य तीन: गैरेथ बैटी, मार्टिन बिकनेल और डेरेक शेकल्टन)। साथ ही, वह लगातार 100 टेस्ट मैच मिस करने वाले 7वें खिलाड़ी बनेंगे।

भारतीय रिकॉर्ड: यह जयदेव उनादकट के नाम है जो 20 दिसंबर 2010 से 22 दिसंबर 2022 के बीच 118 टेस्ट मैच नहीं खेले और फिर वापसी की।

वापसी पर कप्तान: वेस्टइंडीज के फ्लॉयड रेफर के नाम तो बड़ा अनोखा रिकॉर्ड है। जब लगातार 109 टेस्ट न खेलने के बाद वापसी की तो वे वेस्टइंडीज के कप्तान थे। असल में हुआ ये कि बोर्ड से किसी मुद्दे पर असहमति की वजह से चुनी प्लेइंग इलेवन हड़ताल पर चली गई तो बोर्ड ने एक नई टीम चुनी और रेफर को कप्तान बना दिया।

2 टेस्ट का सेट: पाकिस्तान के यूनिस अहमद ने 2 टेस्ट खेले और अपने अगले दो टेस्ट के लिए 17 साल से भी ज़्यादा इंतज़ार किया। वापसी पर उनकी उम्र 40 साल थी।

लगातार 100 से ज़्यादा टेस्ट मैच न खेलने वालों का छोटा करियर: इनमें से अब तक किसी ने भी 10 टेस्ट भी नहीं खेले हैं। गैरेथ बैटी और करुण नायर 9 टेस्ट के करियर के साथ टॉप पर हैं। ओल्ड ट्रैफर्ड टेस्ट में खेले तो करुण नायर इनमें से 10 टेस्ट खेलने वाले पहले खिलाड़ी बन सकते हैं।

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लियाम डॉसन उन खिलाड़ियों के क्लब में शामिल होने के लिए तैयार हैं जो लगातार 100 या उससे ज़्यादा टेस्ट नहीं खेले और वापसी की।

लेखक के बारे में

Charanpal Singh Sobti
Charanpal Singh Sobti is a veteran cricket writer with more than five decades of experience covering the game. At Cricketnmore, he brings his extensive knowledge, unique perspective and deep understanding of cricket to readers through insightful news, analysis, historical pieces and fascinating stories from the world of cricket. Read More
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