Untold Story of Luhnu Cricket Ground - क्रिकेट में जब भी हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत स्टेडियम के बारे में सोचते हैं, तो आम तौर पर चर्चा धर्मशाला की खूबसूरत बर्फ से ढकी चोटियों के बीच बने स्टेडियम से शुरू होती है और वहीं खत्म हो जाती है। बहरहाल बहुत जल्दी एक रणजी ट्रॉफी मैच धर्मशाला से लगभग 150 किलोमीटर दूर के एक स्टेडियम को वह चर्चा दिलाएगा जिसका इंतजार है। ये है बिलासपुर (Bilaspur) का लुहणू क्रिकेट ग्राउंड (Luhnu Cricket Ground) और इस मैच से नोट किया जाएगा कि देश में एक ऐसा खूबसूरत क्रिकेट स्टेडियम भी है।
लगातार और बेमौसम बारिश के कारण धर्मशाला स्टेडियम के आउटफील्ड में पानी भरा है और हालात देख, हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन ने मान लिया है कि मौजूदा चैंपियन मुंबई और हिमाचल प्रदेश के बीच एलीट ग्रुप डी का हाई-प्रोफाइल रणजी ट्रॉफी मैच वहां 18 अक्टूबर 2026 से आयोजित कर पाना बड़ा मुश्किल है। नतीजा: एसोसिएशन ने ये मैच अपने ही राज्य में, लुहणू क्रिकेट ग्राउंड (Luhnu Cricket Ground) में शिफ्ट कर दिया है।
विश्वास कीजिए, कई जानकार लुहणू क्रिकेट ग्राउंड को पिचों के बेहतर रखरखाव और बड़े एवं बेहतर आउटफील्ड के लिएधर्मशाला स्टेडियम से भी बेहतर, 4.4-स्टार रेटिंग देते हैं। तब भी ये ग्राउंड चर्चा में नहीं क्योंकि सालों से हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन पर जिस परिवार का कंट्रोल रहा,धर्मशाला उनका शहर है और हर चर्चा एवं विकास का बड़ा हिस्सा धर्मशाला तक ही रुक गया। वह भी तब जबकि लुहणू क्रिकेट ग्राउंड मौसम के मामले में भी कम जोखिम वाला है।
स्टेडियम की ऊपर से फोटो देखिए, विशाल गोविंद सागर झील (Gobind Sagar Lake) के किनारे पर है ये और यहां हाल ही में अपग्रेड की गई SIS Grass हाइब्रिड पिचें हैं। प्राकृतिक घास की सतह में 5% कृत्रिम पॉलीमर फाइबर डालकर, पिच बनाई हैं जो न सिर्फ ज्यादा टिकाऊ और मजबूत हैं, भारी बारिश के बाद भी बहुत तेजी से ठीक हो जाती है। तब भी रणजी ट्रॉफी तक के मैच सालों से इस स्टेडियम को नहीं मिले।
लुहणू ने पहली बार 1999 में यूथ क्रिकेट की मेजबानी की थी। इसके बाद 2001/02 रणजी ट्रॉफी में हिमाचल-दिल्ली मैच और 2002/03 में हैदराबाद के विरुद्ध मैच हुआ। उसके बाद इस स्टेडियम को कोई और बड़ा सीनियर घरेलू मैच नहीं मिला। पिच और आउटफील्ड को आधुनिक बनाने के बाद भी कई महीने के इंतजार के बाद ये मैच मिला है, भला हो धर्मशाला स्टेडियम में पानी भरने का।
वैसे ऐसा नहीं है कि लुहणू क्रिकेट ग्राउंड में कोई स्टार क्रिकेटर कभी आया नहीं या इंटरनेशनल मीडिया में इसकी कोई चर्चा नहीं हुई। यहां से जुड़ा एक किस्सा ऐसा है जो बड़ा अजीब है और हैरानी की बात ये कि उसे भारत में कोई खास चर्चा नहीं मिली। 7 मार्च 2024 से भारत-इंग्लैंड सीरीज का एक खास और निर्णायक 5वां टेस्टधर्मशाला में खेले थे। विश्वास कीजिए ये टेस्ट शुरू होने में 48 घंटे भी नहीं बचे थे तो टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा और हेड कोच राहुल द्रविड़, बिलासपुर के लुहणू क्रिकेट ग्राउंड में थे।
तब जो हुआ पूरा किस्सा ही बड़ा अजीब, डराने और साथ-साथ हैरान करने वाला भी है। शायद इसलिए इसकी चर्चा भारत में कम और भारत से बाहर ज्यादा हुई। टीम इंडिया टेस्ट के लिएधर्मशाला पहुंच गई पर कप्तान रोहित शर्मा गायब थे। वे तो अनंत अंबानी के एक के बाद प्री-वेडिंग फंक्शन में हिस्सा ले रहे थे। टेस्ट सिर पर था। 4-5 मार्च की रात बीसीसीआई ने एक चार्टर्ड फ्लाइट से रोहित शर्मा को दिल्ली पहुंचाया। वे 5 मार्च की सुबह 4 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर थे।
यहां उनके आगे के सफर के लिए एक हेलीकॉप्टर तैयार था जो सुबह 5.30 बजे, उन्हें ले उड़ा लेकिन धर्मशाला जाने के लिए नहीं, बिलासपुर के लुहणू क्रिकेट ग्राउंड के लिए। इस प्राइवेट हेलीकॉप्टर ने पहाड़ों के उतार-चढ़ाव भरे मौसम (जो उन दिनों बहुत अच्छा नहीं था और जोखिम था) का सामना करते हुए रोहित शर्मा को सीधे बिलासपुर पहुंचाया। विश्वास कीजिए, ये क्रिकेट ग्राउंड के आउटफील्ड पर लैंड हुआ।
हेड कोच राहुल द्रविड़ वहां पहले से मौजूद थे और दोनों ने लुहणू क्रिकेट ग्राउंड पर 'संसद खेल महाकुंभ 3.0 (Sansad Khel Mahakumbh 3.0 )' का उद्घाटन किया। खूबसरत झील के किनारे बने ग्राउंड पर कुछ लोकल खिलाड़ियों के साथ टेनिस-बॉल क्रिकेट खेला। उद्घाटन के वक्त ही तब के भारत के खेल मंत्री और भूतपूर्व बीसीसीआई चीफ अनुराग ठाकुर ने सभी के सामने रोहित शर्मा की वहां पहुंचने के लिए दिखाई हिम्मत की तारीफ की और कहा कि वे वहां जमा 75 हजार युवा ग्रामीण खिलाड़ियों को प्रेरित करने के लिए आए हैं।
ये सब हो रहा था तो राहुल द्रविड़ और रोहित शर्मा का ध्यानधर्मशाला में अटका हुआ था। उस दिन नेट प्रेक्टिस थी और इंग्लैंड की टीम के न चाहते हुए भी, उन्हें सुबह का स्लॉट दिया ताकि दोपहर 12.30 बजे से शुरू होने वाले सेशन के लिए द्रविड़ और रोहित पहुंच जाएं। प्रोग्राम तो ये था कि सड़क के रास्ते ये दोनों बिलासपुर से धर्मशाला जाएंगे पर देर इतनी हो चुकी थी कि इसके लिए समय नहीं था। फिर से हेलीकॉप्टर का इंतजाम हुआ और धौलाधार की बर्फीली चोटियों के ऊपर से वे सीधे धर्मशाला पहुंचे। समय बचाने के लिए लैंडिंग स्टेडियम के बिलकुल करीब कांगड़ा डिस्ट्रिक्ट बैडमिंटन एसोसिएशन ग्राउंड पर हुई। तब तक रोहित शर्मा का किट बैग स्टेडियम पहुंच गया था और दोनों सीधे नेट्स पर थे।
इस किस्से से हटकर, कुछ बातें लुहणू और बिलासपुर के बारे में। जानकार मानते हैं कि लुहणू का पूरा अस्तित्व एक 'पुनर्जन्म' की कहानी से जुड़ा है। 1960 के दशक में, मशहूर भाखड़ा डैम बना जिसने सतलुज नदी का रूप ही बदल दिया। बिलासपुर का पुराना ऐतिहासिक शहर पूरी तरह से पानी में डूब गया। ऊंची जमीन पर एक नया बिलासपुर शहर बसाया और इस वजह से क्रिकेट ग्राउंड बनाने के लिए भी पहाड़ों के बीच जमीन मिल गई।
धर्मशाला स्टेडियम से चोटियां दिखती हैं जबकि लुहणू स्टेडियम में खिलाड़ियों और दर्शकों को झील के किनारे का शानदार और शांत नजारा देखने को मिलता है। हरा-भरा आउटफील्ड, ऐसा मानो सीधे गोविंद सागर डैम (Gobind Sagar reservoir) के पानी में हों। सर्दियों में एक अलग नजारा होता है और मशहूर साइबेरियन क्रेन (Siberian Crane) भरतपुर के लिए उड़ते हुए यहीं रुकती हैं और हवा में चीड़ की पत्तियों की सोंधी महक घुली रहती है।
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यह भारत के सबसे खूबसूरत स्टेडियम में से एक है। अब तो आस-पास के पानी को एडवेंचर वॉटर स्पोर्ट्स और बोटिंग फेस्टिवल के एक सेंटर के तौर पर विकसित कर रहे हैं। लुहणू तेजी से एक पसंदीदा कम्युनिटी पार्क से बदलकर एक खास मल्टी-स्पोर्ट डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। जब मुंबई की टीम यहां खेलेगी तो जरूर झील के किनारे बने इस ग्राउंड को आखिरकार वह चर्चा मिलेगी, जो देने में बड़ी देर का दी।