जितना पुराना क्रिकेट का खेल है, उतने ही पुराने क्रिकेट में झगड़ों के किस्से हैं। जैसे आईपीएल में हरभजन-श्रीसंथ थप्पड़ किस्से से बढ़कर कुछ नहीं, वही 1981 के एक टेस्ट में डेनिस लिली-जावेद मियांदाद, बदसूरत विवाद के बारे में कहना गलत नहीं होगा। 1981 का साल डेनिस लिली कभी भूलेंगे नहीं- फरवरी में उन्हीं की वजह से सुनील गावस्कर, टीम के टेस्ट बीच में छोड़ने पर आमादा थे तो साल के ख़त्म होने से पहले के इस नए किस्से ने उन्हें और क्रिकेट दोनों को खूब बदनाम कराया। डेनिस लिली और जावेद मियांदाद- दोनों लोकप्रिय, मशहूर और गजब के क्रिकेटर पर साथ में 'लड़-मरने' वाले क्रिकेटर भी। जब ऐसे दो आपस में टकराएं तो तूफान तो आएगा ही। उस पर आज तक जगह-जगह इस किस्से की अधूरी और गलत रिपोर्टिंग। चलिए सीधे चलते हैं उस टेस्ट पर :

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टेस्ट कौन सा था : सीरीज का पहला टेस्ट, WACA ग्राउंड, पर्थ, 13 - 17 नवंबर, 1981, मेहमान पाकिस्तान टीम का ऑस्ट्रेलिया में

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ऑस्ट्रेलिया 180 (इमरान खान 4- 66) और 424/8 (किम ह्यूज 106, ब्रूस लेयर्ड 85, इमरान खान 3-90)

पाकिस्तान 62 (डेनिस लिली 5-18, टेरी एल्डरमैन 4-36) और 256 (जावेद मियांदाद 79, ब्रूस यार्डले 6-84)

ऑस्ट्रेलिया 286 रन से जीत

मैच ऑफ द मैच टेरी एल्डरमैन

हुआ क्या था : संक्षेप में किस्सा ये है कि रन ले रहे मियांदाद से लिली बीच में ही टकराए, जिसके कारण दोनों में तीखी नोकझोंक हुई। उसके बाद लिली ने शर्मनाक तरीके से मियांदाद को पीछे से किक किया और उस पर जावेद ने जवाब में बैट उठा लिया। जावेद कुछ और करते, इससे पहले ही अंपायर ने दोनों के बीच शारीरिक झड़प को आगे न बढ़ने दिया पर गालियां तो वे भी न रोक पाए। लिली ये नहीं कह सकते कि उन्होंने किक नहीं किया क्योंकि इसकी रिकॉर्डिंग मौजूद है। ये बहस आज तक चल रही है कि दोनों में से झगड़ा किसने शुरू किया और गलत कौन था?

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इस सवाल पर इस टेस्ट के माहौल को समझना होगा। तब पाकिस्तान के कप्तान थे जावेद मियांदाद और कप्तान के तौर पर उनका पहला विदेशी टूर और उस पर टीम ऐसी जो टुकड़ों में बंटी थी। टीम के कई सीनियर उन्हें कप्तान बनाने से नाखुश थे और ये नाराजगी खुलेआम जाहिर कर रहे थे। उस पर टेस्ट में पाकिस्तान की पतली हालत। भले ही ऑस्ट्रेलिया ने नम पिच पर 180 रन बनाए पर पाकिस्तान को तो 62 रन पर ही समेट दिया (एक समय स्कोर 26-8 था)। उस पर ऑस्ट्रेलिया ने 424-8 बनाए तथा पाकिस्तान को जीत के लिए लगभग असंभव 543 रन का लक्ष्य दिया। ऐसी मुश्किल में जावेद टेस्ट बचाने की कोशिश में लगे थे। तो ये बात है टेस्ट के चौथे दिन की जब जावेद एक रन पूरा करने के दौरान गेंदबाज लिली से टकरा गए। यही विवाद है कि टकराए कैसे और आम तौर पर यही माना गया कि गलती लिली की थी और वे जानबूझकर बल्लेबाज के रास्ते में आ गए। जावेद ने ऐसे में लिली को धक्का दे 'रास्ते से हटाया' और लिली ने अपने रन-अप पर जाते हुए उन्हें किक कर दिया। इस पर जावेद ने बैट उठा लिया। अंपायर टोनी क्राफ्टर ने रोका, तब तक आस्ट्रेलिया के कप्तान ग्रेग चैपल भी बीच-बचाव के लिए दौड़े। बैट उठाए जावेद की फोटो अगले दिन हर अखबार में थी।

इसके बाद क्या हुआ : लिली की हर तरफ आलोचना हुई। खुद कई पुराने, टेस्ट देख रहे ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने भी उन्हें नहीं बख्शा। कप्तान चैपल तब भी लिली को बचते रहे और पूरा दोष जावेद को देते हुए मारपीट शुरू करने और शर्मनाक हरकत का दोषी बता दिया। जावेद ने धक्का दिया और लिली को रास्ते से हटाया अन्यथा रॉडनी मार्श की थ्रो पर रन आउट हो जाते।

लिली ने बाद में अपने व्यवहार के लिए पाकिस्तान टीम से माफी मांगी पर ये भी कहा कि उन्होंने जो किया वह जावेद की हरकत का जवाब था। इससे तो और आग भड़क गई। तब पाकिस्तान टीम के मैनेजर एजाज बट थे और उनका कहना था कि 'अगर लिली, मेरे खिलाड़ियों में से एक होते तो वह दोबारा टेस्ट क्रिकेट नहीं खेल पाते।' जावेद ने 'कटिंग एज: माई ऑटोबायोग्राफी' में लिखा कि लिली ने उनके पैड पर लात मारी और वापस अपने रन-अप पर जाते हुए गाली दी तो उन्होंने पलटकर उसे बैट से धमकाया। ये भी लिखा कि इस किस्से में, उनकी जगह इंग्लैंड का कप्तान होता, तो लिली कतई किक मारने की हिम्मत न करते।

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किसे क्या सजा मिली : इस सवाल के जवाब ने तो इस मसले को और उलझा दिया। सिर्फ डेनिस लिली पर 200 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का जुर्माना लगा। इस पर ऑस्ट्रेलियाई टीम भड़क गई और उनकी दलील थी कि लिली को जावेद ने उकसाया था। उधर पाकिस्तानी टीम मैनेजमेंट भी इस सजा से खुश नहीं था। अंपायर भी इस बहस में कूद पड़े और साफ़ कहा कि लिली को कम सजा दी, और सिर्फ लिली को ही सजा क्यों?

माहौल बिगड़ता देख ऑस्ट्रेलियाई बोर्ड ने सजा के रिव्यू का आर्डर दे दिया। मीडिया में ये चर्चा शुरू हो गई थी कि अब लिली को सस्पेंड करेंगे। इस पर लिली ने प्रेस स्टेटमेंट दी कि अगर उन्हें सस्पेंड किया तो वे फ़ौरन क्रिकेट से रिटायर हो जाएंगे। पाकिस्तान टीम के मैनेजर एजाज बट ने रिव्यू करने वालों को चेतावनी दी कि अगर लिली को सस्ते में छोड़ा तो पाकिस्तान टीम सीरीज के बीच में ही वापस लौट जाएगी। रिव्यू में जुर्माना बदला- इसे घटाकर 120 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर कर दिया लेकिन लिली को दो वनडे के लिए सस्पेंड कर दिया। न लिली रिटायर हुए और न पाकिस्तान टीम सीरीज अधूरी छोड़ वापस लौटी। लिली और जावेद ने अंततः सुलह कर ली पर आज भी दोनों अपनी-अपनी बेगुनाही का दावा करते हैं।

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लिली ने 1984 में अपनी किताब 'ओवर एंड आउट!' में लिखा कि उनके करियर का ये ग्राउंड का अकेला ऐसा विवाद है जिसका उन्हें सचमुच अफसोस है। उन्हें इस बात का भी अफसोस था कि जिन हजारों बच्चों ने इसे देखा, क्या सीखा होगा?

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लेखक के बारे में

Charanpal Singh Sobti
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