भारत के पूर्व हॉकी खिलाड़ी अशोक दीवान की गिनती देश के सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर्स में की जाती है। उन्होंने अपने इंटरनेशनल करियर के दौरान कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। वह हॉकी विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे और उन्होंने टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।
अशोक दीवान का जन्म 9 अगस्त, 1954 को हुआ। अशोक का शुरुआत से ही हॉकी के प्रति खास लगाव था और उन्होंने जल्द ही इस खेल में करियर बनाने का फैसला किया। बतौर गोलकीपर अशोक ने घरेलू स्तर पर जल्द ही अपनी पहचान बना ली। लगातार अच्छा प्रदर्शन का इनाम अशोक को मिला और उनकी भारतीय हॉकी टीम में एंट्री हुई। साल 1975 में हुए विश्व कप में अशोक को टीम में जगह दी गई। अशोक अपनी टीम की उम्मीदों पर एकदम खरे उतरे और उन्होंने टूर्नामेंट के दौरान शानदार गोलकीपिंग की।
विश्व कप के फाइनल मुकाबले में पाकिस्तान के खिलाफ अशोक दीवान ने कई अहम बचाव किए और भारत को पहली बार चैंपियन बनाया। बता दें कि 1975 के बाद भारतीय हॉकी टीम अब तक दोबारा विश्व कप के खिताब को अपने नाम नहीं कर सकी है। अशोक 1976 में हुए मॉन्ट्रियल ओलंपिक में भी भारतीय टीम का हिस्सा रहे। हालांकि, इस ओलंपिक में भारतीय टीम का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा।
अशोक दीवान का जन्म 9 अगस्त, 1954 को हुआ। अशोक का शुरुआत से ही हॉकी के प्रति खास लगाव था और उन्होंने जल्द ही इस खेल में करियर बनाने का फैसला किया। बतौर गोलकीपर अशोक ने घरेलू स्तर पर जल्द ही अपनी पहचान बना ली। लगातार अच्छा प्रदर्शन का इनाम अशोक को मिला और उनकी भारतीय हॉकी टीम में एंट्री हुई। साल 1975 में हुए विश्व कप में अशोक को टीम में जगह दी गई। अशोक अपनी टीम की उम्मीदों पर एकदम खरे उतरे और उन्होंने टूर्नामेंट के दौरान शानदार गोलकीपिंग की।
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साल 2002 में अशोक को मेजर ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कोविड-19 के दौरान अशोक दीवान अपने बेटे से मुलाकात करने के लिए अमेरिका गए थे, लेकिन वीजा प्रतिबंध के कारण वही फंस गए। अचानक से उनकी तबीयत भी काफी बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्होंने भारत के खेल मंत्रालय और ओलंपिक संघ से मदद की गुहार लगाई थी। इसके बाद भारतीय सरकार ने उनके इलाज की व्यवस्था कराई थी और वह रिकवर करने में सफल रहे थे।