महज 17 साल की उम्र में ताइपे ओपन का खिताब जीतकर इतिहास रचने वालीं भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी तन्वी शर्मा का कहना है कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वह इस खिताब को अपने नाम करने में सफल रहेंगी। तन्वी के अनुसार, उन्होंने टूर्नामेंट में सिर्फ अपना 100 प्रतिशत देने का प्रयास किया और नतीजे उनके पक्ष में रहे।
तन्वी ने 'आईएएनएस' के साथ बातचीत करते हुए खिताब जीतने के बाद अपनी पहली प्रतिकिया को लेकर कहा, "ऐसा कुछ था नहीं था। मैं अपने आप में प्रोसेस नहीं कर पा रही थी। मुझे यह उम्मीद करके नहीं गई थी कि मैं खिताब को जीतने में सफल रहूंगी। मैंने बस अपना 100 प्रतिशत देने का प्रयास किया और पूरे जोश के साथ खेला। खिताब को जीतने के बाद मैं काफी खुशी थी। हालांकि, जीत के तुरंत बाद मेरा अगला लक्ष्य सुपर 500 और 750 के लिए तैयार होना था।"
महज 17 साल की उम्र में ताइपे ओपन का खिताब जीतकर इतिहास रचने वालीं भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी तन्वी शर्मा का कहना है कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वह इस खिताब को अपने नाम करने में सफल रहेंगी। तन्वी के अनुसार, उन्होंने टूर्नामेंट में सिर्फ अपना 100 प्रतिशत देने का प्रयास किया और नतीजे उनके पक्ष में रहे।
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तन्वी का प्रदर्शन टूर्नामेंट में शानदार रहा। उन्होंने महिला सिंगल्स के फाइनल मुकाबले में वियतनाम की खिलाड़ी गुयेन थुई को 21-16, 21-16 से हराते हुए खिताब को अपने नाम किया। वह साइना नेहवाल के बाद इस खिताब को जीतने वाली महज दूसरी भारतीय खिलाड़ी बनीं। इसके साथ ही वह ताइपे ओपन का खिताब जीतने वाली सबसे युवा खिलाड़ी भी बनीं। उन्होंने इस टूर्नामेंट में भारत के लिए 17 साल का सूखा भी खत्म किया।