क्या होगा जब एक टीम किसी क्रिकेट सीरीज में ऑफिशियल तौर पर 'होम टीम' है, लेकिन इसे अपने देश में न खेल, दूसरी टीम के देश में खेले? यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट में पहले भी ऐसा अनोखा इंतजाम हो चुका है। अब इसे 2026 में फिर से देख रहे हैं: अफगानिस्तान ऑफिशियल तौर पर भारत में भारत की मेजबानी कर रहा है।

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पहली बार ऐसा हुआ था 2009 में जब पाकिस्तान ने न्यूजीलैंड के साथ 3 टेस्ट की सीरीज की मेजबानी पाकिस्तान में नहीं, न्यूजीलैंड में की। इसकी वजह थी न्यूजीलैंड टीम की पाकिस्तान में सुरक्षा को लेकर चिंता से। ये वह दौर था जब इस वजह से विदेशी टीम, पाकिस्तान टूर पर आ ही नहीं रही थीं। मार्च 2009 में जब लाहौर में श्रीलंकाई टीम पर हमला हुआ तो उसके बाद माहौल और भी खराब हो गया। इसी में न्यूजीलैंड ने अपना पाकिस्तान टूर रद्द कर दिया। इसमें 3 टेस्ट, 4 वनडे और 2 टी20 मैच होने थे।

पाकिस्तान क्रिकेट के लिए ये बड़ी परेशानी का दौर था और अपना इंटरनेशनल प्रोग्राम जारी रखने के लिए वे उन दिनों में आम तौर पर विदेशी टीमों की मेजबानी यूएई में कर रहे थे। इसी कड़ी में इस न्यूजीलैंड वाली सीरीज को भी यूएई ले जाने का प्रोग्राम बना रहे थे पर न्यूजीलैंड ने उन्हें एक अनोखा प्रपोजल दिया: सीरीज में पाकिस्तान ही मेजबान रहे पर टेस्ट न्यूजीलैंड में ही खेले जाएं।

पाकिस्तान के लिए ये किसी न्यूट्रल ग्राउंड में खेलने से भी बेहतर प्रपोजल था और इसमें खर्चा भी कम था। तब पीसीबी चीफ एजाज बट थे और उन्होंने साफ कहा कि यूएई में सीरीज आयोजित करने के मुकाबले न्यूजीलैंड में खेलना सस्ता पड़ेगा। सबसे बड़ी बचत थी पाकिस्तान में इंटरनेशनल टीमों की मेजबानी करते हुए भारी सुरक्षा इंतजाम के खर्चे में। वहां होटल भी यूएई की तुलना में सस्ते पड़े। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने हर तरह की मदद का भी वायदा किया।

तो इस तरह से जो इंतजाम हुआ, वह अनोखा था। वेन्यू न्यूजीलैंड के और टेस्ट भी उन्होंने ही आयोजित किए, लेकिन पाकिस्तान होम टीम था। टेलीविजन अधिकार पाकिस्तान के पास ही रहे और सीरीज की मेजबानी से जुड़े सारे खर्चे की जिम्मेदारी भी पाकिस्तान की ही थी। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने साफ बता दिया था कि वह सिर्फ पैसा कमाने के लिए ऐसा नहीं कर रहे। उनके सीईओ जस्टिन वॉन ने कहा कि इस टेस्ट सीरीज के आयोजन में वास्तव में तो उन्हें नुकसान हुआ क्योंकि ब्रॉडकास्टिंग अधिकार भी उनके पास नहीं थे।

ये तीन टेस्ट मैच 24 नवंबर से 15 दिसंबर 2009 के बीच डुनेडिन, वेलिंगटन और नेपियर में खेले गए। पहला टेस्टन्यूजीलैंड ने 32 रन से जीता जबकि पाकिस्तान ने दूसरा टेस्ट 141 रन से जीता और तीसरा टेस्ट ड्रॉ रहा। इस तरह सीरीज का स्कोर 1-1 रहा।

इस सीरीज का एक पहलू रहा इसमें हुआ रोमांचक ड्रामा। सिर्फ 19 साल की उम्र में टेस्ट डेब्यू करने वाले उमर अकमल ने डुनेडिन में 129 और 75 रन बनाए और सीरीज में कुल 379 रन और सीरीज के रन चार्ट में वे टॉप पर थे। दो साल बाद टेस्ट क्रिकेट में वापसी की न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज शेन बॉन्ड ने और पहले टेस्ट में 8 विकेट लिए। यही उनका आखिरी टेस्ट भी साबित हुआ। पाकिस्तान के लिए मोहम्मद आसिफ ने 19 विकेट लिए और सबसे अच्छी गेंदबाजी की जबकि डेनियल विटोरी ने 287 रन बनाए।

इस स्टोरी का सबसे दिलचस्प पहलू स्कोर कार्ड से हटकर था- अपने देश से हजारों किलोमीटर दूर होम टीम होने का आर्थिक पहलू। तब खबर थी कि पीसीबी ने तीन टेस्ट के आयोजन के खर्च के तौर पर क्रिकेट न्यूजीलैंड को लगभग 5 लाख अमेरिकी डॉलर का पेमेंट किया। बदले में उन्हें टिकट बिक्री और स्टेडियम में एड का पूरा पैसा मिला।

इस बड़ी रकम से बजट बिगड़ गया। पाकिस्तान भरसक कोशिश के बावजूद टेस्ट सीरीज के लिए कोई टाइटल स्पांसर न ढूंढ पाया। जहां एक तरफ किसी न्यूजीलैंड कंपनी ने सीरीज में कोई रूचि न ली, वहीं पाकिस्तानी बाजार से भी किसी ने दिलचस्पी न ली। सबसे बड़ी वजह थी टेस्ट का पाकिस्तान में सुबह तड़के टेलीकास्ट जिससे कोई ख़ास टीआरपी न बन पाई। टेलीविजन अधिकार टेन स्पोर्ट्स के दुबई ऑफिस ने खरीदे और न्यूजीलैंड के नियमित ब्रॉडकास्टर, स्काई स्पोर्ट ने इन्हें लेने में कोई दिलचस्पी न दिखाई।

इस तरह पाकिस्तान के पास होम सीरीज से जुड़े सभी कमर्शियल अधिकार तो थे पर ये उतना पैसा भी न ला पाए कि न्यूजीलैंड क्रिकेट को दिया आयोजन का खर्चा निकलता। तब भी पाकिस्तान को ये तसल्ली थी कि मुनाफा न हुआ तो क्या हुआ, सीरीज रद्द न हुई, मैच खेले गए और पाकिस्तान इंटरनेशनल क्रिकेट में अपनी मौजूदगी दर्ज कर सका।

ये सब पहली बार हो रहा था पर एक बड़ा सबक था। ये समझ में आ गया कि होम टीम का दर्जा मिलना और अपने देश में ही खेलना दो अलग-अलग बात हैं। मेजबानी के दर्जे से ब्रॉडकास्टिंग अधिकार तो मिले पर अपने देश में खेलने के जो पारंपरिक फायदे मिल सकते थे, वे न मिले। साफ है कि सीरीज में पाकिस्तान ऑफिशियल तौर पर होम टीम थी, लेकिन हालात पर उनका कोई कंट्रोल नहीं था। पिच न्यूजीलैंड के लोकल क्यूरेटर ने बनाईं। इसके उलट जब वे दुबई में खेलते थे तो वहां पाकिस्तानी क्यूरेटर बुलाए जाते थे और वे पिच तैयार करते थे। इन पिचों पर पाकिस्तान को अपने देश में खेलने से मिलने वाला फायदा मिल जाता था।

तब भी पाकिस्तान ने कोई चिंता न की क्योंकि उनका असली इरादा था, इस मुश्किल दौर में भी पाकिस्तान का इंटरनेशनल क्रिकेट खेलना जारी रहे। सिर्फ इस वजह से कि दूसरी टीम अपनी सुरक्षा पर चिंतित है, सीरीज रद्द नहीं हुई।

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लगभग 17 साल बाद, वही बुनियादी सिद्धांत एक नए अंदाज में है। अफगानिस्तान ऑफिशियल तौर पर भारत में भारत का मेजबान है और मैच दिल्ली में खेले। हालात भी वैसे नहीं जो 2009 में पाकिस्तान में थे। एक देश बहरहाल अपने इंटरनेशनल क्रिकेट मैच आयोजित करने के लिए किसी दूसरे देश के इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करते हुए 'होम-टीम' का दर्जा अपने पास रख सकता है। अफगानिस्तान-भारत सीरीज ने उस इंतजाम की याद ताजा करा दी जो तब बड़ा अनोखा लगा था। इस प्रयोग ने ये भी दिखा दिया कि इंटरनेशनल क्रिकेट में, 'होम' कभी-कभी किसी जमीन के बजाय एक दर्जा (स्टेटस) हो सकता है।

लेखक के बारे में

Charanpal Singh Sobti
Charanpal Singh Sobti is a veteran cricket writer with more than five decades of experience covering the game. At Cricketnmore, he brings his extensive knowledge, unique perspective and deep understanding of cricket to readers through insightful news, analysis, historical pieces and fascinating stories from the world of cricket. Read More
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