कुछ खिलाड़ियों में टैलेंट कूट-कूटकर भरा होता है, तो कुछ खिलाड़ी कड़ी मेहनत के दम पर अपनी पहचान बनाते हैं। ऐसी ही खिलाड़ी रहीं चित्रा.के.सोमन, जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर 400 मीटर की दौड़ में देश का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया।
चित्रा का जन्म 10 जुलाई, 1983 को केरल के कोट्टायम में हुआ। चित्रा को शुरुआत से ही दौड़ने का काफी शौक था। वह स्कूल स्तर पर होने वाली प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं। जल्द ही उनकी काबिलियत को कोच ने पहचाना और चित्रा ने बतौर धावक करियर बनाने का फैसला कर लिया। साधारण परिवार में जन्मीं चित्रा ने अपनी लगन और कड़ी मेहनत के दम पर सफलता की सीढ़ियां चढ़ती चली गईं।
कुछ खिलाड़ियों में टैलेंट कूट-कूटकर भरा होता है, तो कुछ खिलाड़ी कड़ी मेहनत के दम पर अपनी पहचान बनाते हैं। ऐसी ही खिलाड़ी रहीं चित्रा.के.सोमन, जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर 400 मीटर की दौड़ में देश का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया।
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इसके बाद, साल 2007 में हुई एशियाई ग्रांड प्रिक्स में भी चित्रा का जलवा देखने को मिला। उन्होंने 400 मीटर की दौड़ में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। 400 मीटर की दौड़ को चित्रा ने 51.30 सेकंड में पूरा किया, जो उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा। साल 2007 में चित्रा को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारतीय सरकार द्वारा 'अर्जुन पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। चित्रा ने उस दौर में इस खेल में अपनी पहचान बनाई, जब काफी सीमित साधन हुआ करते थे। वह उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं, जो छोटे शहर से आकर अपने खेल के दम पर विश्व में पहचान बनाने की इच्छा रखती हैं।