कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के आठवें दिन भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार रहा। सीमा कालीरमन ने विमेंस डिस्कस थ्रो फाइनल में देश को ब्रॉन्ज मेडल दिलाया। ब्रॉन्ज जीतने के बाद सीमा ने बताया कि उनका पूरा ध्यान अपना बेस्ट प्रदर्शन देने पर था और वह मेडल के बारे में ज्यादा नहीं सोच रही थीं।
सीमा ने समाचार एजेंसी 'आईएएनएस' से बातचीत करते हुए कहा, "मेडल जीतने की खुशी है। खुशी इतनी है कि शायद शब्दों में बयां न कर सकूं। मैच के दौरान मेरे दिमाग में कुछ नहीं चल रहा था। जब से मैंने अपने खेल का आनंद लेना शुरू किया है, तब से चीजें अपने आप बेहतर होती जा रही हैं। मैंने आज भी यह नहीं सोचा था कि मैं मेडल लेकर आऊंगी या कितना थ्रो करूंगी। मेरी कोशिश बस यही थी कि मैं अपना बेस्ट प्रदर्शन करूं, फिर चाहे मेडल आए या न आए।"
सीमा अपने बच्चे के बिना कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हिस्सा लेने आई हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने बच्चे को बेहद याद करती हैं और उसके नाम का जिक्र होने पर उनकी भावनाएं बाहर आ जाती हैं। सीमा के पति रविंदर उनके निजी कोच भी हैं और वह इस बार ग्लासगो में उनके साथ हैं। सीमा ने बताया कि साल 2025 में एशियन चैंपियनशिप में पति के न होने का उन्हें काफी नुकसान झेलना पड़ा था।
सीमा ने समाचार एजेंसी 'आईएएनएस' से बातचीत करते हुए कहा, "मेडल जीतने की खुशी है। खुशी इतनी है कि शायद शब्दों में बयां न कर सकूं। मैच के दौरान मेरे दिमाग में कुछ नहीं चल रहा था। जब से मैंने अपने खेल का आनंद लेना शुरू किया है, तब से चीजें अपने आप बेहतर होती जा रही हैं। मैंने आज भी यह नहीं सोचा था कि मैं मेडल लेकर आऊंगी या कितना थ्रो करूंगी। मेरी कोशिश बस यही थी कि मैं अपना बेस्ट प्रदर्शन करूं, फिर चाहे मेडल आए या न आए।"
Also Read: LIVE Cricket Score
उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि जो भी खिलाड़ी खेल में दिलचस्पी दिखाता है उसे सपोर्ट किया जाए। उन्होंने कहा कि मेडल लाने से पहले खिलाड़ियों को कई तरह की कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है। सीमा के अनुसार, एक खिलाड़ी को मानसिक, आर्थिक समेत कई तरह की चुनौतियों को सामना करना पड़ता है। सीमा ने 58.65 मीटर का बेस्ट थ्रो करते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।