ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (एआईएफएफ) ने इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) क्लबों के मालिकों और प्रतिनिधियों और जीनियस स्पोर्ट्स के साथ एक बैठक बुलाई। गुरुवार को हुई इस बैठक का मकसद लीग के कमर्शियल अधिकारों के लिए कंपनी के प्रस्ताव की समीक्षा करना था, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत की टॉप-टियर प्रतियोगिता को विकसित करने का एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण है।
चर्चा का मुख्य फोकस इंडियन सुपर लीग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी फुटबॉल लीग के रूप में विकसित करने, फैंस की भागीदारी बढ़ाने और व्यावसायिक रूप से मजबूत बनाने पर रहा।
जीनियस स्पोर्ट्स ने साझेदारी आधारित मॉडल पेश किया, जिसमें तकनीक, डेटा और व्यावसायिक विशेषज्ञता के जरिए लीग को आगे बढ़ाने की योजना बताई गई। इसका उद्देश्य लीग को दुनिया की प्रमुख प्रतियोगिताओं जैसे प्रीमियर लीग, लीगा एमएक्स, बेल्जियन प्रो लीग, कन्फेडेरासाओ ब्रासीलेइरा डी फुटेबोल (सीबीएफ) और स्विस फुटबॉल लीग जैसे वैश्विक मानकों के करीब लाना है।
एआईएफएफ ने बताया है कि कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय खेल इकोसिस्टम में अपने अनुभव पर प्रकाश डाला। इसमें रेफरिंग (प्रीमियर लीग), एनालिटिक्स (नॉटिंघम फॉरेस्ट) और फैंस की भागीदारी (एलए रैम्स) जैसे क्षेत्रों में किए गए काम शामिल थे। कंपनी ने इन क्षमताओं को भारतीय फुटबॉल के निरंतर विकास में सहायता के लिए एक आधार के रूप में प्रस्तुत किया।
बैठक का मुख्य विषय लीग के ढांचे को मजबूत बनाने में तकनीक की भूमिका रहा। इसमें व्यावसायिक रणनीति, डिजिटल प्लेटफॉर्म और मैच संचालन को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई। साथ ही चरणबद्ध और टिकाऊ तरीके से एआई आधारित ऑफिशिएटिंग टूल्स लागू करने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि फैसलों में एकरूपता और पारदर्शिता बढ़ाई जा सके।
प्रस्तावित ढांचे में रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल भी शामिल है, जिससे भविष्य की कमाई का फायदा क्लबों को मिले और उसे पूरे फुटबॉल इकोसिस्टम के विकास में दोबारा निवेश किया जा सके।
बैठक का मुख्य विषय लीग के ढांचे को मजबूत बनाने में तकनीक की भूमिका रहा। इसमें व्यावसायिक रणनीति, डिजिटल प्लेटफॉर्म और मैच संचालन को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई। साथ ही चरणबद्ध और टिकाऊ तरीके से एआई आधारित ऑफिशिएटिंग टूल्स लागू करने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि फैसलों में एकरूपता और पारदर्शिता बढ़ाई जा सके।
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सभी पक्षों ने आईएसएल के विकास के लिए एक सहयोगात्मक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के महत्व पर जोर दिया। इसमें प्रोडक्शन की गुणवत्ता में सुधार, क्लब संरचनाओं को मजबूत करना और अधिक व्यवस्थित अंतरराष्ट्रीय वितरण के जरिए लीग की पहुंच का विस्तार करना शामिल था।