इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (आईओसी) ने ओलंपिक खेलों के कार्यक्रम और मेजबान शहर चुनने की प्रक्रिया में बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है। इन सुधारों का उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, किफायती, टिकाऊ और खिलाड़ियों के हितों के अनुरूप बनाना है।
आईओसी की कार्यकारी बोर्ड बैठक के बाद अध्यक्ष क्रिस्टी कोवेंट्री ने इन प्रस्तावों की जानकारी दी। ये बदलाव आईओसी की "फिट फॉर द फ्यूचर" पहल का हिस्सा हैं, जिसके तहत संगठन भविष्य की जरूरतों के अनुसार खुद को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है।
सबसे बड़ा बदलाव खेलों के मूल्यांकन के तरीके में प्रस्तावित किया गया है। अभी तक आईओसी किसी पूरे खेल का मूल्यांकन करता था, लेकिन अब वह उसके भीतर मौजूद अलग-अलग डिसिप्लिन (प्रतियोगिता श्रेणियों) का अलग-अलग आकलन करेगा। आईओसी का मानना है कि इससे यह बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा कि किसी विशेष डिसिप्लिन के लिए कितने संसाधनों, मैदानों और खर्च की जरूरत होगी। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो नया सिस्टम 2032 ब्रिस्बेन ओलंपिक से लागू किया जा सकता है।
नए ढांचे के तहत डिसिप्लिन को दो श्रेणियों में बांटा जाएगा। पहली श्रेणी में वे डिसिप्लिन होंगे जो पहले से ओलंपिक कार्यक्रम का हिस्सा हैं। दूसरी श्रेणी में वे नए डिसिप्लिन होंगे जो ओलंपिक में शामिल होना चाहते हैं। दोनों समूहों का मूल्यांकन समान मानकों पर किया जाएगा, लेकिन उनके प्रदर्शन और उपलब्ध आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सभी डिसिप्लिन को पहले एक पात्रता जांच से गुजरना होगा। इसमें सुशासन, एंटी-डोपिंग नियमों का पालन, खेल की ईमानदारी और खिलाड़ियों की सुरक्षा जैसी बातों की समीक्षा की जाएगी।
इसके बाद उनकी वैश्विक लोकप्रियता, आयोजन की लागत, संचालन की जटिलता और खिलाड़ियों के प्रतिनिधित्व जैसे मानकों के आधार पर जांच होगी। अंतिम चरण में सबसे अच्छे नए उम्मीदवारों और सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले मौजूदा डिसिप्लिन की सीधी तुलना की जाएगी।
इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि ओलंपिक कार्यक्रम में किन खेलों को जगह मिलनी चाहिए। आईओसी का कहना है कि इस नई व्यवस्था से ओलंपिक खेलों का आकार संतुलित रहेगा, दुनिया भर में उनकी प्रासंगिकता बनी रहेगी और नए खेलों को भी अवसर मिलेंगे।
इसके बाद उनकी वैश्विक लोकप्रियता, आयोजन की लागत, संचालन की जटिलता और खिलाड़ियों के प्रतिनिधित्व जैसे मानकों के आधार पर जांच होगी। अंतिम चरण में सबसे अच्छे नए उम्मीदवारों और सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले मौजूदा डिसिप्लिन की सीधी तुलना की जाएगी।
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आईओसी का मानना है कि इन बदलावों से संभावित मेजबान शहर कम खर्च में बेहतर योजनाएं तैयार कर सकेंगे। साथ ही सरकारों को योजना बनाने में सुविधा मिलेगी और जनता का समर्थन जुटाने के लिए अधिक समय मिलेगा। आईओसी सत्र में इन प्रस्तावों को मंजूरी मिल जाती है, तो यह हाल के वर्षों में ओलंपिक प्रशासन और संचालन व्यवस्था में सबसे बड़े सुधारों में से एक माना जाएगा।