भारत के मशहूर वेटलिफ्टर जेरेमी लालरिनुंगा ने अपनी ताकत, मेहनत और समर्पण से खेल जगत में शोहरत हासिल की है। महज 19 साल की उम्र में कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीतने वाले जेरेमी युवा वेटलिफ्टर्स के लिए प्रेरणा स्रोत बने।
26 अक्टूबर 2002 को मिजोरम राज्य के आइजोल में जन्मे जेरेमी को खेल विरासत में मिला। उनके पिता लालनीहटलुआंगा एक मुक्केबाज थे। लालनीहटलुआंगा जूनियर लेवल पर राष्ट्रीय पदक जीत चुके थे। जेरेमी जब छोटे थे, तो अक्सर पिता के साथ ट्रेनिंग सेशन में जाते। वह खुद भी पिता की तरह बॉक्सर बनना चाहते थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
जब जेरेमी ने अपने दोस्तों को वेटलिफ्टिंग करते देखा, तो इस खेल के प्रति रुचि जागने लगी। महज 8 साल की उम्र में जेरेमी ने वेटलिफ्टिंग की शुरुआत कर दी।
जेरेमी ने आर्मी स्पोर्ट्स के सेलेक्शन ट्रायल में हिस्सा लिया, जिसमें सफल रहे। इसके बाद वह ट्रेनिंग के लिए पुणे शिफ्ट हो गए।
महज 13 साल की उम्र में जेरेमी ने जूनियर वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2016 के 56 किलोग्राम भार वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर सुर्खियां बटोरीं। इसके बाद एशियन जूनियर चैंपियनशिप में सिल्वर जीतकर उन्होंने नेशनल कैंप में जगह बनाई।
अगले साल जेरेमी ने कॉमनवेल्थ यूथ और जूनियर चैंपियनशिप में गोल्ड जीता, जिसके बाद ब्यूनस आयर्स के यूथ ओलंपिक में गोल्ड अपने नाम किया। वह यूथ ओलंपिक में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय वेटलिफ्टर बने।
महज 13 साल की उम्र में जेरेमी ने जूनियर वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2016 के 56 किलोग्राम भार वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर सुर्खियां बटोरीं। इसके बाद एशियन जूनियर चैंपियनशिप में सिल्वर जीतकर उन्होंने नेशनल कैंप में जगह बनाई।
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ऐसा लगा कि जेरेमी बर्मिंघम में खेले जाने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा नहीं ले सकेंगे, लेकिन महज 19 साल की उम्र में नायब सूबेदार जेरेमी लालरिनुंगा ने जीवटता का परिचय देते हुए 31 जुलाई 2022 को दर्द की परवाह किए बगैर 67 किलोग्राम भारवर्ग में 300 किलोग्राम भार उठाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच में 140 किलोग्राम वेट लिफ्ट किया, जबकि क्लीन एंड जर्क में 160 किलो भार उठाया।