जर्मनी के अटैकिंग मिडफील्डर फ्लोरियन विर्ट्ज ने बेहद कम समय में काफी नाम कमाया है। यूपो कप 2024 में विर्ट्ज जर्मनी की तरफ से गोल करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने थे। इसके साथ ही मैच का आगाज होते ही महज 7 सेकंड के अंदर गोल दागने का रिकॉर्ड भी विर्ट्ज के नाम दर्ज है।
3 मई, 2003 को जर्मनी के पुलहाइम में जन्मे फ्लोरियन विर्ट्ज ने महज 7 साल की उम्र में फुटबॉल का दामन थामा। विर्ट्ज ने अपने करियर की शुरुआत एफसी कोलन की युवा टीम के साथ की। इस क्लब के साथ विर्ट्ज ने फुटबॉल की बारीकियां सीखीं और अपनी स्किल्स पर दिन-रात जमकर मेहनत की।
करीब एक दशक तक क्लब के साथ रहने के बाद वह 2020 में बायर लेवरकुसेन क्लब में शामिल हुए। अंडर-17 में विर्ट्ज का प्रदर्शन जबरदस्त रहा, जिसके बाद 2020 में उन्हें बुंडसलीगा लीग में लेवरकुसेन की तरफ से सीनियर लेवल पर डेब्यू करने का मौका मिला। बस इसके बाद विर्ट्ज ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह लेवरकुसेन की तरफ से शुरुआती लाइनअप में शामिल होने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने। उन्होंने 17 साल और 15 दिन की उम्र में डेब्यू किया।
बार्यन म्यूनिख के खिलाफ विर्ट्ज ने अपने करियर का पहला गोल किया और बुंडसलीगा में सबसे कम उम्र में गोल करने वाले खिलाड़ी बने। साल 2021 में उन्हें जर्मनी की नेशनल टीम की ओर से डेब्यू करने का मौका मिला। विश्व कप क्वालीफायर मुकाबले में विर्ट्ज आइसलैंड के खिलाफ मैदान पर उतरे। विर्ट्ज अपनी शानदार तकनीक, ड्रिबलिंग और तेज रफ्तार के दम पर इंटरनेशनल स्टेज पर भी छाप छोड़ने में सफल रहे।
साल 2024 में फ्रांस के खिलाफ हुए एक दोस्ताना मुकाबले में विर्ट्ज ने सिर्फ 7 सेकंड के अंदर गोल करते हुए अपने नाम की सनसनी फैला दी थी। वह जर्मनी की तरफ से मैच में सबसे कम समय के अंदर गोल करने वाले खिलाड़ी बने। वहीं, यूरो कप में विर्ट्ज जर्मनी की ओर से यूरोपीय चैंपियनशिप में सबसे कम उम्र में गोल करने वाले खिलाड़ी बने।
बार्यन म्यूनिख के खिलाफ विर्ट्ज ने अपने करियर का पहला गोल किया और बुंडसलीगा में सबसे कम उम्र में गोल करने वाले खिलाड़ी बने। साल 2021 में उन्हें जर्मनी की नेशनल टीम की ओर से डेब्यू करने का मौका मिला। विश्व कप क्वालीफायर मुकाबले में विर्ट्ज आइसलैंड के खिलाफ मैदान पर उतरे। विर्ट्ज अपनी शानदार तकनीक, ड्रिबलिंग और तेज रफ्तार के दम पर इंटरनेशनल स्टेज पर भी छाप छोड़ने में सफल रहे।
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पिछले फीफा वर्ल्ड कप में विर्ट्ज इंजरी की वजह से टूर्नामेंट का हिस्सा नहीं रहे थे। हालांकि, फीफा वर्ल्ड कप 2026 में उन्हें जर्मनी का ट्रंप कार्ड माना जा रहा है। मौजूदा समय में उनकी गिनती विश्व के सबसे बेहतरीन मिडफील्डर्स में की जाती है। साल 2025 में वह लेवरकुसेन का साथ छोड़कर लिवरपूल में शामिल हो गए हैं।