भारतीय बैडमिंटन इतिहास के लिए '17 सितंबर' एक स्वर्णिम दिन है। इसी दिन साल 2017 में पीवी सिंधु 'कोरिया ओपन सुपर सीरीज' जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। इस जीत ने सिंधु को नई ऊंचाई देते हुए भारतीय बैडमिंटन की ताकत को विश्वभर में साबित किया।

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भारत की स्टार शटलर पीवी सिंधु उस समय वर्ल्ड नंबर 4 थीं। रियो ओलंपिक 2016 में सिल्वर मेडल जीतकर पीवी सिंधु के हौसले बुलंद थे।

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रविवार के ऐतिहासिक दिन पीवी सिंधु के सामने वर्ल्ड नंबर 9 जापान की नोजोमी ओकुहारा थीं।

सिंधु ने विश्व चैंपियनशिप में मिली हार का बदला लेते हुए विमेंस सिंगल्स में ओकुहारा को 22-20, 11-21, 21-18 से हराकर अपना तीसरा सुपर सीरीज खिताब जीता। यह मुकाबला 1 घंटे 24 मिनट तक चला।

पहले गेम में पीवी सिंधु और नोजोमी ओकुहारा के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली, लेकिन आखिरकार सिंधु ने यह गेम 22-20 से अपने नाम किया।

इसके बाद, अगले गेम में सिंधु अपनी लंबाई और सटीकता के साथ संघर्ष करती रहीं और ओकुहारा ने इसे 21-11 से जीता।

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तीसरे और निर्णायक गेम में पीवी सिंधु ने जापानी चुनौती को ध्वस्त करते हुए 21-18 से जीत दर्ज की और चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया।

कोरिया ओपन सुपर सीरीज की शुरुआत साल 1991 में हुई थी। 26 साल के इतिहास में पीवी सिंधु से पहले किसी भी भारतीय शटलर ने इसमें खिताबी सफलता हासिल नहीं की थी।

5 जुलाई 1995 को आंध्र प्रदेश में जन्मीं पुसरला वेंकट सिंधु के माता-पिता राष्ट्रीय स्तर के वॉलीबॉल खिलाड़ी थे। उनके पिता पीवी रमना ने साल 1986 में सियोल एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज जीता था, जबकि मां पी विजया एक प्रोफेशनल वॉलीबॉल खिलाड़ी थीं। यही वजह रही कि बचपन से ही खेल के प्रति पीवी सिंधु का खास लगाव था।

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महज 8 साल की उम्र से ही सिंधु ने बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था। उन्होंने सिकंदराबाद में इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ सिग्नल इंजीनियरिंग एंड टेलीकम्युनिकेशन में महबूब अली की देखरेख में बैडमिंटन खेलना शुरू किया, जिसके बाद पुलेला गोपीचंद की एकेडमी में दाखिला लिया।

सिंधु ने साल 2009 में सब-जूनियर एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज जीता। अगले ही साल ईरान में अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन चैलेंज में सिल्वर अपने नाम किया। इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

साल 2014 में कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर सिंधु चर्चा में आ गई थीं। साल 2016 में उन्होंने ओलंपिक मेडल जीतकर इतिहास रचा। यह किसी भी भारतीय का ओलंपिक में पहला सिल्वर मेडल था। इसके बाद टोक्यो 2020 ओलंपिक में उन्होंने ब्रॉन्ज अपने नाम किया।

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सिंधु ने साल 2009 में सब-जूनियर एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज जीता। अगले ही साल ईरान में अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन चैलेंज में सिल्वर अपने नाम किया। इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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बैडमिंटन में उत्कृष्ट योगदान के लिए पीवी सिंधु को साल 2013 में 'अर्जुन अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया था। इसके बाद साल 2015 में उन्हें 'पद्म श्री' से नवाजा गया। सिंधु को साल 2016 में 'मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवॉर्ड' और 2020 में 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया गया है।

Article Source: IANS

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