New Delhi: केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मंडाविया का कहना है कि 'खेलो इंडिया मिशन' सिर्फ इसलिए लाया जा रहा है, ताकि देश आने वाले समय में कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक की तैयारी कर पाए। खेल मंत्री ने संसद के प्रश्नकाल में बोलते हुए कहा कि सरकार कई मिशन के जरिए खेलों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी कर रही है।

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मनसुख मंडाविया ने कहा, "एक समय था जब तैयारी समय पर नहीं होती थी, बजट भी नहीं होता था। 'खेलो इंडिया मिशन' इसलिए ही लाया जा रहा है ताकि आने वाले दिनों में देश कॉमनवेल्थ की तैयारी कर पाए, देश ओलंपिक की तैयारी भी कर पाए, और देश मेडल टेली में भी इजाफा कर पाए। देश में पारंपरिक तरीके से जो स्पोर्ट चल रहा था और स्पोर्ट में फेडरेशन के द्वारा राजनीति चल रही थी, उससे बाहर आकर तालमेल के साथ स्पोर्ट सेक्टर में आगे बढ़ने के लिए हमने इसलिए ही स्पोर्ट्स पॉलिसी भी लाई।"

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उन्होंने आगे कहा, "हमने स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल भी लाया। ये मोदी सरकार है, जिसने स्पोर्ट्स सेक्टर में व्यापक योजना बनाई। पहले देश में स्पोर्ट्स कल्चर को डेवलप करने के लिए खेलो इंडिया, फिट इंडिया, बाद में स्पोर्ट्स खेलो भारत नीति, उनके बाद स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल, और इसके बाद देश में स्पोर्ट्स को आगे बढ़ाने के लिए अभी खेलो इंडिया मिशन के जरिए देश को स्पोर्ट्स में एक नई ऊंचाइयों पर लेकर जाने की तैयारी चल रही है।"

मनसुख मंडाविया ने कहा, "एक समय था जब तैयारी समय पर नहीं होती थी, बजट भी नहीं होता था। 'खेलो इंडिया मिशन' इसलिए ही लाया जा रहा है ताकि आने वाले दिनों में देश कॉमनवेल्थ की तैयारी कर पाए, देश ओलंपिक की तैयारी भी कर पाए, और देश मेडल टेली में भी इजाफा कर पाए। देश में पारंपरिक तरीके से जो स्पोर्ट चल रहा था और स्पोर्ट में फेडरेशन के द्वारा राजनीति चल रही थी, उससे बाहर आकर तालमेल के साथ स्पोर्ट सेक्टर में आगे बढ़ने के लिए हमने इसलिए ही स्पोर्ट्स पॉलिसी भी लाई।"

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उन्होंने कहा, "देश की तरफ से जब कोई टीम विदेश में टूर्नामेंट खेलने जाती है तो उसका पूरा खर्चा सरकार उठाती है। कई ऐसी प्रतियोगिताएं भी होती हैं जो राष्ट्रीय स्तर की नहीं होतीं, जिनमें फेडरेशन के द्वारा सत्तावर रूप से भारत की टीम नहीं जाती है, लेकिन किसी व्यवस्था से हमारे खिलाड़ी टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए विदेश जाते हैं। ऐसी स्थिति में हमको एप्लीकेशन मिलती है कि एक अच्छा खिलाड़ी है और विदेश में भाग लेने जा रहा है और उनके पास पैसे नहीं हैं। ऐसे में हमारे पास सत्ता और व्यवस्था है, उसमें से भी हम उस खिलाड़ी का सहयोग कर देते हैं। खिलाड़ी के टिकट की हम व्यवस्था कर देते हैं, ताकि किसी खिलाड़ी को खेलने में कोई असुविधा ना रहे।"

Article Source: IANS

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