भारतीय टेनिस के क्षेत्र में जीशान अली का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। एक सफल पेशेवर टेनिस खिलाड़ी के रूप में अपना करियर समाप्त करने के बाद जीशान कोच के रूप में भी सफल पारी खेल रहे हैं।
1 जनवरी 1970 को कोलकाता में जन्मे जीशान अली के परिवार में लोग टेनिस खेलते थे, इसलिए टेनिस में उन्हें करियर बनाने के फैसले में किसी अड़चन का सामना नहीं करना पड़ा। जीशान ने 10 साल की उम्र में टेनिस खेलना शुरू किया था। 13 साल की उम्र में उन्होंने बंगाल मेन्स स्टेट चैंपियनशिप जीत ली थी। फाइनल में उन्होंने किसी और को नहीं बल्कि अपने पिता को हराया था। 16 साल की उम्र में, वह सबसे कम उम्र के भारतीय राष्ट्रीय चैंपियन बने। यह खिताब उन्होंने एकल वर्ग में पांच बार और डबल्स में चार बार जीता।
जीशान अली आईटीएफ में जूनियर्स स्तर पर विश्व रैंकिंग में दूसरे नंबर पर पहुंचे थे। जूनियर स्तर पर 1986 में विंबलडन का सेमीफाइनल और 1987 में ब्रेट स्टीवन के साथ यूएस ओपन जूनियर्स में डबल्स के फाइनल में पहुंचना उनके करियर की शानदार उपलब्धियों में है। दिसंबर 1988 में एटीपी विश्व रैंकिंग में वह 126वें नंबर पर पहुंचे थे। यह किसी भारतीय युवा खिलाड़ी की सर्वोच्च रैंक थी।
1987-1994 तक जीशान अली डेविस कप में भारत के मुख्य खिलाड़ी थे। 1987 में स्वीडन के खिलाफ फाइनल और 1993 के सेमीफाइनल में भारतीय टीम का हिस्सा रहे थे। हिरोशिमा में 1994 के एशियाई खेलों में उन्होंने टीम के साथ स्वर्ण पदक जीता था।
जीशान के करियर की मुख्य उपलब्धियों में इंडियन सैटेलाइट सर्किट में जीत, सियोल ओलंपिक में दूसरे राउंड तक पहुंचना, शेनेक्टेडी में एटीपी इवेंट, और न्यू हेवन में चैलेंजर फाइनल खेलना शामिल है, जिसमें विजय अमृतराज के खिलाफ उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, शामिल है।
पीठ की इंजरी की वजह से जीशान का करियर बेहद छोटा रहा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने से पहले ही फीका पड़ गया। इंजरी की वजह से मात्र 25 साल की उम्र में उन्हें संन्यास लेना पड़ा।
संन्यास के बाद से वह कोचिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। 2013 से अगले 10 साल तक वह डेविस कप में भारतीय टीम के कोच रहे। 2016 रियो ओलंपिक्स, 2018 और 2022 एशियन गेम्स में टीम को लीड किया। 2020 में, उन्होंने दिल्ली में नेशनल टेनिस सेंटर के प्रमुख के रूप में भी काम किया।
पीठ की इंजरी की वजह से जीशान का करियर बेहद छोटा रहा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने से पहले ही फीका पड़ गया। इंजरी की वजह से मात्र 25 साल की उम्र में उन्हें संन्यास लेना पड़ा।
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इंजरी की वजह से अगर जीशान अली को संन्यास लेने पर मजबूर न होना पड़ता तो टेनिस के क्षेत्र में वह और बड़े मुकाम हासिल कर सकते थे।