भारत और चीन की मुक्केबाज अपने शानदार अभियान के दम पर महिंद्रा आईबीए विमेंस वल्र्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक के प्रबल दावेदार होंगी। इन दोनों देशों की चार-चार मुक्केबाजों की निगाहें शनिवार और रविवार को यहां इंदिरा गांधी खेल परिसर में खेली जाने वाली फाइनल बाउट जीतकर गोल्ड मेडल पर टिकी होंगी।

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 चैम्पियन नीतू घंघास, मौजूदा विश्व चैम्पियन निखत जरीन, टोक्यो ओलम्पिक की कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन और तीन बार की एशियाई पदक विजेता स्वीटी बूरा फाइनल में भारत की चुनौती पेश करेंगी।

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दूसरी ओर, चीन की चार मुक्केबाज वू यू (52 किग्रा), यांग चेंगयु (63 किग्रा), यांग लियू (66 किग्रा) और वांग लीना (81 किग्रा) फाइनल में पहुंची हैं, जिनका लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतने का होगा।

भारत के स्वर्ण पदक के अभियान की शुरूआत दो बार की यूथ वल्र्ड चैम्पियन नीतू (48 किग्रा) के मुकाबले से होगी, जो शनिवार को फाइनल बाउट में दो बार की एशियाई चैम्पियनशिप में कांस्य पदक विजेता मंगोलिया की लुत्सेखान अल्तांसेटसेग से भिड़ेंगी। नीतू अपनी दूसरी वल्र्ड चैम्पियनशिप में प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। उनका अब तक का अभियान शानदार रहा है। इस दौरान उन्होंने रेफरी स्टॉप कॉन्टेस्ट (आरएससी) फैसलों के जरिये तीन बाउट जीती है और फाइनल में भी वह इसी लय को बरकरार रखने की कोशिश करेंगी।

नीतू ने कहा, पिछली बार (वल्र्ड चैम्पियनशिप क्वार्टर फाइनल में) हारने के बाद से कजाखस्तान के खिलाफ जीतना मेरे लिए सबसे अधिक दबाव वाला था और जीतने के बाद मैं खुद में आत्मविश्वास महसूस कर रही हूं। मैं अपने खेल में बहुत सुधार देख सकती हूं क्योंकि पहले मैं सिर्फ एक ही तरह का खेल खेलती थी लेकिन अब मुझे पता है कि अपने अलग-अलग प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ अपनी तकनीक कैसे बदलनी है, और मुझे यकीन है कि मैं इसी तरह का प्रदर्शन आगे भी जारी रखूंगी। मैंने फाइनल के लिए अपने प्रतिद्वंद्वी के मुकाबले नहीं देखे हैं, लेकिन मैं उसके मुकाबले देखूंगी और उसी के अनुसार तैयारी करूंगी। जहां तक आक्रामकता का सवाल है तो वो मुकाबले पर निर्भर करेगा।

निखत (50 किग्रा) अपने खिताब का बचाव करके लगातार वल्र्ड चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वह रविवार को फाइनल में दो बार की एशियाई चैम्पियन और 2018 एशियाई खेलों में कांस्य पदक विजेता वियतनाम की गुयेन थी टैम से भिड़ेंगी। तेलंगाना की स्टार मुक्केबाज इस बार लाइट फ्लाईवेट कैटेगरी में उतरी हैं, इसके बावजूद वह अब तक अपनी सभी प्रतिद्वंद्वियों पर हावी रही हैं, जिसमें अल्जीरिया की अफ्रीकी चैम्पियन रौमेसा बौआलम, दो बार की वल्र्ड ब्रॉन्ज मेडलिस्ट थाईलैंड की चुथमत रक्सत और रियो ओलम्पिक की कांस्य पदक विजेता कोलंबिया का इंग्रिट वालेंसिया शामिल हैं।

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निखत ने कहा, यह मेरे मुक्केबाजी करियर की पहली प्रतियोगिता है जहां मैं कुल छह बाउट लड़ रही हूं, खासतौर पर अनुभवी और कठिन विरोधियों के खिलाफ मुझे लगातार लड़ना पड़ा है। हालांकि, मैं अपने प्रदर्शन से बेहद खुश हूं। मैंने 50 किग्रा भार वर्ग के फाइनल में भी अपनी जगह बना ली है और मेरे खिताब को जीतने और बचाने के लिए सिर्फ एक और मैच बाकी है। जैसे-जैसे मैं आगे बढ़ रही हूं मेरे खेल में सुधार हो रहा है इसलिए मुझे फाइनल में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की उम्मीद है।

दो वल्र्ड चैम्पियनशिप 2018 और 2019 में दो कांस्य पदक हासिल करने वाली लवलीना (75 किग्रा) इस बार अपने पदक को स्वर्ण के रूप में देखना चाहती हैं और इसे जीतने के लिए अपना सब कुछ झोंक देगी। वह रविवार को फाइनल में दो बार की कॉमनवेल्थ गेम्स पदक विजेता ऑस्ट्रेलिया की कैटलिन पार्कर से भिड़ेंगी। निखत की तरह इस असमी मुक्केबाज ने भी अपनी वेट कैटेगरी बदली है और वह पूरे टूर्नामेंट में अपने खेल में शीर्ष पर रही हैं। उन्होंने गुरुवार को सेमीफाइनल बाउट में चीन की बेहद मजबूत मुक्केबाज ली कियान को हराया।

लवलीना ने कहा, जब मैंने 75 किग्रा वर्ग में खेलना शुरू किया, तो मैं राष्ट्रीय खेलों, राष्ट्रीय चैम्पियनशिप और एशियाई चैम्पियनशिप खेली। अब इस समय, मैंने इस कैटेगरी में अब तक जितने भी बाउट खेले हैं, वे बढ़िया ढंग से चले हैं और मुझे लगता है कि मैं इस कैटेगरी में अधिक सहज हूं क्योंकि मुझे खुद को बहुत अधिक नियंत्रित करने की आवश्यकता नहीं है। आगे फाइनल मुकाबला कठिन होगा लेकिन कोच जो कहेंगे मैं उसका पालन करूंगी और परिस्थितियों के आधार पर रिंग के अंदर अपनी कुछ योजनाओं को लागू करूंगी। मैं अपने देश के लिए लड़ती रहूंगी और अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमताओं के अनुसार भारत के लिए गोल्ड जीतने की कोशिश करूंगी और अपना 100 प्रतिशत दूंगी।

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अपना दूसरा विश्व चैम्पियनशिप फाइनल खेल रही स्वीटी (81 किग्रा) शनिवार को खिताबी मुकाबले में 2018 की विश्व चैम्पियन चीन की वांग ली ना से भिड़ेंगी। हरियाणा की अनुभवी मुक्केबाज को 2014 में वल्र्ड चैम्पियनशिप के फाइनल में पहुंचने के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा था। वो बाउट एक चीनी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ थी और इसलिए, वह उस परिणाम को दोहराने से बचने के लिए इस बार पूरी कोशिश करेंगी।

स्वीटी ने कहा, मुकाबला (कल) कठिन था और प्रतिद्वंद्वी अच्छी थी लेकिन मुझे अपनी स्कोरिंग पर भरोसा था और मुझे विश्वास था कि मैं जीत जाऊंगी। मेरे पास अपने रजत पदक को स्वर्ण में बदलने का सुनहरा मौका है और मुझे उम्मीद है कि मैं ऐसा करने में सफल रहूंगी। मैंने इसके लिए दिन-रात काम किया है और मैं अपने देश को गौरवान्वित करना चाहती हूं।

अपना दूसरा विश्व चैम्पियनशिप फाइनल खेल रही स्वीटी (81 किग्रा) शनिवार को खिताबी मुकाबले में 2018 की विश्व चैम्पियन चीन की वांग ली ना से भिड़ेंगी। हरियाणा की अनुभवी मुक्केबाज को 2014 में वल्र्ड चैम्पियनशिप के फाइनल में पहुंचने के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा था। वो बाउट एक चीनी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ थी और इसलिए, वह उस परिणाम को दोहराने से बचने के लिए इस बार पूरी कोशिश करेंगी।

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