श्रीलंका क्रिकेट इतिहास में ऐसे कई बल्लेबाज हुए हैं जिन्होंने अपनी प्रभावशाली तकनीक और बेहतरीन क्षमता का प्रदर्शन करते हुए विश्व क्रिकेट को समृद्ध बनाया है और बल्लेबाजी को दर्शनीय बनाया है। ऐसे बल्लेबाजों में एक बेहद प्रमुख नाम पूर्व कप्तान और देश के सबसे सफल बल्लेबाजों में से एक महेला जयवर्धने का है।
महेला जयवर्धने ने देश का तीनों ही फॉर्मेट में लंबे समय तक प्रतिनिधित्व किया और कप्तानी भी की। तीनों फॉर्मेट में महेला ने अपनी बल्लेबाजी से श्रीलंका को कई यादगार जीत दिलाई। 18 अगस्त का दिन महेला जयवर्धने के लिए विशेष और भावनात्मक है। इस दिग्गज ठीक 12 साल पहले यानी 18 अगस्त 2014 को अपने 17 साल लंबे टेस्ट करियर पर विराम लगा दिया था। जयवर्धने ने पाकिस्तान के खिलाफ अपना आखिरी टेस्ट खेला था और आखिरी पारी में 54 रन बनाए थे। इस टेस्ट को श्रीलंका ने 105 रन से जीता था। जीत के साथ ही जयवर्धने ने टेस्ट करियर को अलविदा कह दिया था।
जयवर्धने ने अगस्त 1997 में भारत के खिलाफ अपने टेस्ट करियर का आगाज किया था। अपने 17 साल के करियर में जयवर्धने ने 149 टेस्ट खेले और 252 पारियों में 15 बार नाबाद रहते हुए 34 शतक और 50 अर्धशतक लगाते हुए 49.83 की औसत से 11,814 रन बनाए। वह टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले चंद बल्लेबाजों में शामिल हैं। उनका सर्वाधिक स्कोर 374 है। वह टेस्ट क्रिकेट में कुमार संगकारा के बाद श्रीलंका के दूसरे सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। टेस्ट क्रिकेट में जयवर्धने ने कुमार संगकारा के साथ मिलकर तीसरे विकेट के लिए 624 रन की साझेदारी की थी। यह इस फॉर्मेट में किसी भी विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी है।