1970 के दशक में भारतीय स्पिन चौकड़ी को अबूझ पहेली माना जाता था। दुनिया का बड़े से बड़ा बल्लेबाज भारत के चार स्पिनर्स, बिशन सिंह बेदी, प्रसन्ना, चंद्रशेखर और राघवन, के आगे घुटने टेक देता था। इस चौकड़ी में से एक थे बिशन सिंह बेदी, जिनका इंटरनेशनल करियर उपलब्धियों से भरा रहा।
बिशन सिंह बेदी का जन्म 25 सितंबर, 1946 को पंजाब के अमृतसर में हुआ। बेदी बचपन से ही गेंद को घुमाने में माहिर थे। महज 15 साल की उम्र में उन्हें उत्तर पंजाब की राज्य टीम में शामिल किया गया था। 1961 में बिशन सिंह बेदी ने घरेलू क्रिकेट में अपना डेब्यू किया और इसके बाद अपनी गेंदबाजी से हर किसी को प्रभावित करते चले गए।
बिशन बेदी को भारतीय टीम की ओर से खेलने का पहली बार मौका 1967 में वेस्टइंडीज के खिलाफ मिला। इस मैच में बेदी सिर्फ 2 विकेट ही निकाल सके। हालांकि, धीरे-धीरे अपनी घूमती गेंदों के बूते बेदी ने भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की कर ली। प्रसन्ना, चंद्रशेखर, राघवन के साथ मिलकर बिशन बेदी बल्लेबाजों की अग्निपरीक्षा लिया करते थे। बेदी की गेंदों को समझ पाना काफी कठिन हुआ करता था। उन्हें बल्लेबाज पढ़ने में पूरी तरह से नाकाम रहते थे।