खबर आई कि मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन, वानखेड़े स्टेडियम में खास लाउंज को सचिन तेंदुलकर और अजिंक्य रहाणे के साथ-साथ माधव मंत्री के नाम दे, उन्हें सम्मानित कर रहे हैं। तेंदुलकर और रहाणे के नाम तो आज के क्रिकेट प्रेमियों के लिए जाने पहचाने हैं पर ये माधव मंत्री कौन हैं? जैसे तेंदुलकर और रहाणे के किसी परिचय की जरूरत नहीं, माधव मंत्री के परिचय की जरूरत है तभी तो मौजूदा क्रिकेट प्रेमियों को पता चलेगा कि आज भारतीय क्रिकेट को जो सम्मान मिल रहा है, उसमें कैसे-कैसे योगदान शामिल रहे हैं। माधव मंत्री एक बिल्कुल अलग दौर के खिलाड़ी थे, सिर्फ 4 टेस्ट मैच खेले और 67 रन बनाए पर ये रिकॉर्ड असल माधव मंत्री को न समझने जैसा है।
वह एक बेहतरीन विकेटकीपर, बॉम्बे के सफल कप्तान, तीन बार रणजी ट्रॉफी जीतने वाली टीम के खिलाड़ी, नेशनल सेलेक्टर और एडमिनिस्ट्रेटर थे। इससे भी खास ये कि क्रिकेट की गहरी समझ थी और इसे सिर्फ मुंबई के दो बड़े बल्लेबाजों, सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर तक ही नहीं, इस पीढ़ी के कई क्रिकेटरों तक पहुंचाया। उनका योगदान, उनके टेस्ट रिकॉर्ड से कहीं ज्यादा था।
उन्होंने एक बार बताया था कि सीके नायडू ने उन्हें सिखाया कि विकेटकीपर सिर्फ स्टंप्स के पीछे खड़ा एक खिलाड़ी नहीं, कप्तान का 'दोस्त, सलाहकार और गाइड' भी हो सकता है। इसी समझ ने माधव मंत्री की अपनी लीडरशिप को आकार दिया। 1952 में भारत के इंग्लैंड टूर पर, अंपायर फ्रैंक चेस्टर ने उनकी विकेटकीपिंग की तारीफ की और वे हैरान थे कि भारत ने माधव मंत्री को सीरीज के सभी टेस्ट में क्यों नहीं खिलाया? वे विकेटकीपिंग में सिर्फ कैच लपकने और स्टंपिंग के रोल को नहीं निभाते थे।