23 साल के तेजस शिर्से 110-मीटर हर्डल्स (बाधा दौड़) में राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक हैं। उनका अगला लक्ष्य कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में देश के लिए पदक जीतना है। उन्होंने कहा कि वह देश में हर्डल को लोकप्रिय बनाना चाहते हैं।
ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले आईएएनएस से खास बातचीत में तेजस शिर्से ने कहा, "जीतना ही एकमात्र लक्ष्य है। मैं वहां जाकर यह नहीं कहना चाहता कि यह प्रक्रिया का हिस्सा है। प्रक्रिया मेरे लिए है। दुनिया के लिए जीत ही मायने रखती है। मुझे बस जीत की परवाह है। दुनिया भी जीत की ही परवाह करेगी। मैं दुनिया में सबसे अच्छा बनना चाहता हूं। मैं जिस भी इवेंट में हिस्सा लूं, उसमें सबसे अच्छा बनना चाहता हूं। अगर मेरी सोच ऐसी नहीं होगी, तो मैं कभी ऐसा नहीं कर पाऊंगा। मैं बस कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई खेलों में जाकर जीतना चाहता हूं—यही एकमात्र लक्ष्य है।"
कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में जगह बनाना तेजस शिर्से के लिए आसान नहीं रहा है। पिछले साल हर्डल के दौरान एक टक्कर के कारण उनके टखने में कई जगह चोट लग गई। उस वजह से उनका टखना तीन-चार जगहों से लगभग टूट गया था। उसके बाद, तेजस बहुत उदास हो गए थे।