भारतीय टीम के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज नरेन तम्हाने ने अपने करियर की शुरुआत एक गेंदबाज के तौर पर की थी। वह इत्तेफाक से विकेटकीपर बने और उन्होंने अपनी फुर्ती और तेज रिफ्लेक्स के दम पर बतौर विकेटकीपर अपनी खास पहचान बनाई।
नरेन तम्हाने का जन्म 4 अगस्त, 1931 को मुंबई में हुआ। नरेन के पिता सरकार कर्मचारी थे। नरेन को शुरुआत से ही क्रिकेट से खास लगाव था और वह बतौर गेंदबाज अपना करियर बनाने चाहते थे। हालांकि, क्लब क्रिकेट के एक मैच में विकेटकीपर की गैरमौजूदगी में नरेन को विकेट के पीछे दस्ताने पहनने की जिम्मेदारी सौंपी गई और इसके बाद तो मानो उनकी किस्मत पलट गई।
नरेन अपनी फुर्ती और विकेटकीपिंग में काबिलियत के चलते जल्द ही चर्चा का विषय बन गए। उन्होंने साल 1951 में अपने फर्स्ट क्लास करियर का आगाज किया। नरेन 1952-53 में खेले गए टूर्नामेंट रोहिंटन बारिया ट्रॉफी में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। उन्होंने टूर्नामेंट में 68.20 की एवरेज से 341 रन बनाए। लगातार शानदार प्रदर्शन के चलते अगले सीजन नरेन को फ्रैंक वॉरेल की कॉमनवेल्थ इलेवन के खिलाफ हुए अनौपचारिक टेस्ट मुकाबले में ऑल इंडिया टीम में रखा गया। इसी साल उन्होंने रणजी ट्रॉफी में भी अपना डेब्यू किया।