एक शांत स्वभाव का लड़का। कम दोस्त-यार। क्रिकेट के प्रति जुनून और बचपन से ही जबरदस्त अनुशासन में रहने की आदत। भारत के बल्लेबाज रजत पाटीदार की कहानी कुछ ऐसी ही रही है। रजत शुरुआत में एक तेज गेंदबाज बनना चाहते थे, लेकिन कोच के समझाने के बाद उन्होंने बल्लेबाजी में अपनी काबिलियत को पहचाना।
रजत का जन्म मध्य प्रदेश के इंदौर में 1 जून, 1993 को हुआ। रजत एक मिडिल क्लास परिवार से थे और उनके पिता मनोहर पाटीदार का मोटरपंप का बिजनेस था। रजत को शुरुआत से ही क्रिकेट से खास लगाव था। हालांकि, वह काफी शांत रहने वाले बच्चों में से एक थे। रजत अपने काम से काम रखते थे। बचपन से ही रजत को अनुशासन में रहना पंसद था। 8 साल की उम्र में रजत एक क्रिकेट क्लब से जुड़ गए।
दो साल बाद ही रजत ने अपनी उम्र से बड़े खिलाड़ियों के साथ खेलना शुरू कर दिया। पढ़ाई से ज्यादा मन रजत का क्रिकेट में लगता था और यही वजह रही कि वह 12वीं के बाद आगे पढ़ाई नहीं कर सके। रजत शुरुआत में तेज गेंदबाज बनना चाहते थे, लेकिन उनके कोच को रजत में बतौर बल्लेबाज काबिलियत नजर आई। इसके बाद रजत ने गेंद छोड़कर बल्ला थाम लिया।